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रिपोर्ट बदलने का आरोप: मारपीट, ₹7 हजार और मोबाइल छीनने की शिकायत पर एसपी से निष्पक्ष जांच की मांग

कोतवाली पुलिस पर शिकायत बदलने का आरोप, पीड़ित बोला- मूल रिपोर्ट में लूट और धमकी थी, एफआईआर में हटा दिए गए अहम तथ्य

कोतवाली पुलिस पर रिपोर्ट बदलने का आरोप, एसपी से जांच की मांग

सिवनी यशो :- शहर के कस्तूरबा वार्ड निवासी परसराम सनोडिया ने पुलिस अधीक्षक सिवनी को शिकायत देकर कोतवाली पुलिस पर उनकी लिखित शिकायत में बदलाव करने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि मारपीट, मोबाइल छीनने, ₹7,000 ले जाने और जान से मारने की धमकी जैसे आरोपों को पुलिस ने अपनी मर्जी से बदलकर अलग तरीके से दर्ज कर लिया, जिससे मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित हुई है।

शिकायत के अनुसार परसराम सनोडिया ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2024 में ग्राम खैरीटेक निवासी जितेन्द्र सनोडिया से चाय-नाश्ते की दुकान किराए पर ली थी। उनका आरोप है कि 27 मई 2026 को सुबह करीब 11:30 बजे जितेन्द्र सनोडिया दुकान पर पहुंचा और दुकान खाली करने को लेकर गाली-गलौज करने लगा। विरोध करने पर उसने दुकान के अंदर घुसकर मारपीट की, जान से मारने की धमकी दी तथा उनके हाथ से मोबाइल और दुकान के गल्ले से ₹7,000 लेकर चला गया। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि बाद में एक अन्य व्यक्ति राजू सनोडिया भी पहुंचा और मारपीट की। घटना के प्रत्यक्षदर्शी के रूप में रामलाल भलावी और दशरथ राठौर के नाम भी बताए गए हैं।

पीड़ित का आरोप है कि जब वह कोतवाली थाना रिपोर्ट दर्ज कराने पहुंचे तो उनकी मूल शिकायत को बदल दिया गया। उनके अनुसार पुलिस ने एफआईआर में केवल शराब पीने के लिए पैसे मांगने और मारपीट की बात दर्ज की, जबकि मोबाइल और नकदी छीनने तथा जान से मारने की धमकी जैसे गंभीर आरोपों का उल्लेख नहीं किया गया।

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि रिपोर्ट में बदलाव के कारण पुलिस ने कथित रूप से मोबाइल और ₹7,000 की जब्ती भी नहीं बनाई। उनका कहना है कि जब उन्होंने न्यायालय में मोबाइल और राशि के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया तो उन्हें बताया गया कि थाना स्तर पर इन वस्तुओं की जब्ती दर्ज ही नहीं की गई है।

परसराम सनोडिया ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर संबंधित थाना कर्मियों की भूमिका की जांच कराने तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।

(नोट: यह समाचार शिकायतकर्ता द्वारा पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन पर आधारित है। मामले में पुलिस अथवा दूसरे पक्ष का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)**

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