अधिकारी-कर्मचारियों ने खोला मोर्चा; FIR और सार्वजनिक माफी की मांग, ‘कक्का’ की कथित टिप्पणी पर सिवनी में बवाल
महिला अधिकारियों की गरिमा का सवाल उठाकर कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन; भविष्य के धरना-प्रदर्शनों के लिए सख्त दिशा-निर्देश और महिला कर्मचारियों की सुरक्षा की भी मांग
सिवनी में कक्का जी की कथित टिप्पणी पर बवाल, अधिकारी-कर्मचारियों ने मांगी FIR
Seoni 11 September 2026
सिवनी यशो:- राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ‘कक्का जी’ द्वारा 10 सितंबर को सिवनी में आयोजित किसान जागरण यात्रा की आमसभा के दौरान जिले में पदस्थ महिला अधिकारी एवं कर्मचारियों को लेकर की गई कथित अमर्यादित टिप्पणी अब बड़ा विवाद बन गई है।

कथित टिप्पणी के विरोध में शुक्रवार को जिले के अधिकारी-कर्मचारी एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर के माध्यम से मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर शिवकुमार शर्मा ‘कक्का जी’ के खिलाफ FIR दर्ज करने, कानूनी कार्रवाई करने और सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग की।
अधिकारी-कर्मचारियों ने ज्ञापन में कहा कि सार्वजनिक मंच से प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी महिला अधिकारियों एवं महिला कर्मचारियों के विरुद्ध कथित रूप से अत्यंत अमर्यादित, असंसदीय और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया गया।
उन्होंने इसे केवल व्यक्तिगत टिप्पणी का विषय नहीं, बल्कि महिला सम्मान, शासकीय सेवकों की गरिमा और कार्यस्थल के वातावरण से जुड़ा गंभीर मामला बताया।
किसान सभा में हुई कथित टिप्पणी बनी विवाद की वजह
दरअसल, 10 सितंबर को राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ एवं संयुक्त किसान मोर्चा के तत्वावधान में सिवनी में किसान जागरण यात्रा का समापन कार्यक्रम प्रस्तावित था। ट्रैक्टर रैली और आमसभा को लेकर प्रशासन तथा किसान संगठन के बीच गतिरोध की स्थिति बनी रही। ट्रैक्टर रैली को शहर में प्रवेश नहीं दिए जाने के बाद आमाझिरिया के पास आमसभा आयोजित की गई।

इसी आमसभा में राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार शर्मा ‘कक्का जी’ ने प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कलेक्टर से कार्यक्रम की अनुमति को लेकर अपनी नाराजगी भी व्यक्त की।
कक्का जी का आरोप था कि अनुमति मांगने के लिए कलेक्टर से मिलने पहुंचे तो उन्हें इंतजार करवाया गया और मुलाकात नहीं हो सकी। इसी घटनाक्रम को लेकर उन्होंने जिला कलेक्टर एवं स्टेनोग्राफर के संबंध में कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणी की।
यही टिप्पणी अब सिवनी में राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर विरोध का कारण बन गई है।
अधिकारी-कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से मांगी FIR
11 सितंबर को अधिकारी-कर्मचारियों ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में कहा गया कि लोकतंत्र में अपनी मांगों को रखने और विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार सभी को है, लेकिन इसकी आड़ में शासकीय सेवकों की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का प्रयोग स्वीकार्य नहीं हो सकता।
अधिकारी-कर्मचारियों ने कहा कि महिला अधिकारी एवं कर्मचारी अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए शासन की व्यवस्थाओं को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंच से उनके सम्मान और गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली कथित टिप्पणियां उनके मनोबल और आत्मसम्मान को प्रभावित करती हैं।
‘सिर्फ FIR नहीं, सार्वजनिक माफी भी हो’
ज्ञापन में अधिकारी-कर्मचारियों ने केवल कानूनी कार्रवाई की मांग नहीं की, बल्कि संबंधित व्यक्ति से सार्वजनिक रूप से खेद व्यक्त कर माफी मांगने की मांग भी की है।
उनका कहना है कि महिला अधिकारियों एवं कर्मचारियों के संबंध में की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों के सम्मान की रक्षा के लिए स्पष्ट संदेश जाना आवश्यक है कि सार्वजनिक जीवन में रहते हुए भी किसी को शासकीय सेवकों की गरिमा का उल्लंघन करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
भविष्य के धरना-प्रदर्शनों पर भी सख्त नियम की मांग
अधिकारी-कर्मचारियों ने अपने ज्ञापन में भविष्य में होने वाले राजनीतिक, सामाजिक और धरना-प्रदर्शन कार्यक्रमों को लेकर भी शासन से सख्त दिशा-निर्देश जारी करने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि ऐसे सभी आयोजनों में शासकीय अधिकारियों एवं कर्मचारियों के सम्मान और मर्यादा का ध्यान रखना अनिवार्य किया जाए। यदि कोई आयोजक या संगठन शासकीय सेवकों की गरिमा बनाए रखने का वचन नहीं देता अथवा पूर्व में मर्यादा उल्लंघन का दोषी पाया गया हो, तो ऐसे आयोजनों को अनुमति देने के संबंध में शासन और प्रशासन स्तर पर सख्त निर्णय लिया जाए।
यह मांग इस मायने में महत्वपूर्ण है कि अधिकारी-कर्मचारी चाहते हैं कि मामला केवल एक घटना तक सीमित न रहे, बल्कि भविष्य में भी सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान शासकीय सेवकों के सम्मान और सुरक्षा को लेकर स्पष्ट व्यवस्था हो।
महिला अधिकारियों की सुरक्षा और गरिमा की गारंटी की मांग
ज्ञापन में जिले और प्रदेश में कार्यरत महिला अधिकारियों एवं कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर सख्त निर्देश जारी करने की मांग भी की गई है।
अधिकारी-कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से कहा कि निष्ठापूर्वक शासकीय दायित्व निभा रही महिला अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए ऐसा वातावरण सुनिश्चित किया जाना चाहिए, जहां वे बिना किसी दबाव अथवा अपमानजनक व्यवहार के अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।
विधायक दिनेश राय मुनमुन भी पहले ही जता चुके हैं विरोध
इस मामले में सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन भी अपना विरोध दर्ज करा चुके हैं। विधायक ने शिवकुमार शर्मा ‘कक्का जी’ की कथित टिप्पणी की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि महिला का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
विधायक के अनुसार किसान जागरण यात्रा की सभा में महिला अधिकारी एवं कर्मचारी की तुलना पालतू कुतिया से किए जाने संबंधी कथित टिप्पणी की गई। उन्होंने इस भाषा को शर्मनाक और अमर्यादित बताते हुए इसकी तीखी भर्त्सना की।
हालांकि विधायक ने किसानों के मुद्दों को लेकर आंदोलन करने के अधिकार का समर्थन किया। उनका कहना था कि किसान अपनी मांगों को पूरी मजबूती से रख सकते हैं और किसान हित की लड़ाई का समर्थन किया जाना चाहिए, लेकिन आंदोलन के नाम पर व्यक्तिगत अथवा अमर्यादित टिप्पणियां स्वीकार नहीं की जा सकतीं।
‘बच्चों को क्या संस्कार देंगे?’
विधायक दिनेश राय मुनमुन ने सार्वजनिक जीवन में भाषा और व्यवहार की मर्यादा बनाए रखने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंचों से इस तरह की भाषा का इस्तेमाल सिवनी विधानसभा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पूरे जिले के लिए अच्छा संदेश नहीं देता।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सार्वजनिक मंचों से इस प्रकार की अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जाएगा तो आने वाली पीढ़ी और बच्चों को आखिर कौन से संस्कार दिए जाएंगे।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
किसान जागरण यात्रा के दौरान शुरू हुआ विवाद अब महिला अधिकारियों एवं कर्मचारियों की गरिमा के सवाल पर केंद्रित हो गया है। एक ओर किसान संगठन अपने मुद्दों को लेकर आंदोलन की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर कथित टिप्पणी को लेकर अधिकारी-कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंचाकर FIR, कानूनी कार्रवाई और सार्वजनिक माफी की मांग रख दी है।
अब निगाह इस बात पर है कि मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन और उसमें की गई मांगों पर जिला प्रशासन तथा पुलिस की ओर से क्या कदम उठाया जाता है। साथ ही, यदि संबंधित पक्ष की ओर से इस कथित टिप्पणी पर कोई स्पष्टीकरण या पक्ष सामने आता है, तो वह भी पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।
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