बिजली विभाग को 440 वोल्ट का करंट दे रहा आउटसोर्स कर्मचारी!
शिकायतों के बाद जांच तेज, बादलपार के जूनियर इंजीनियर का स्थानांतरण; कार्यपालन यंत्री बोले—दोषी और संरक्षण देने वालों पर भी होगी कार्रवाई
कुरई-बादलपार बिजली कनेक्शन मामला: जांच के बाद होगी कार्रवाई
Seoni, 11 October 2026
सिवनी यशो:- बिजली विभाग में आखिर किसका सिक्का चलता है—नियमों के तहत काम करने वाले अधिकारियों का या एक आउटसोर्स कर्मचारी का? कुरई-बादलपार क्षेत्र में विद्युत कनेक्शनों को लेकर सामने आए हस्तलिखित दस्तावेजों और 5,500 लिए जाने के उल्लेख ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला अब केवल एक कर्मचारी की कथित भूमिका तक सीमित नहीं है, बल्कि कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया, अधिकारियों की निगरानी और जिम्मेदारी तय करने तक पहुंच गया है।
मामले की गंभीरता के बीच विद्युत विभाग के कार्यपालन यंत्री राधेश्याम डाबर ने शिकायतें प्राप्त होने और जांच जारी रहने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि बादलपार के जूनियर इंजीनियर को स्थानांतरित कर दिया गया है, जबकि कुरई क्षेत्र की जांच अभी जारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में महिपाल नामक व्यक्ति की गलती सामने आने या उसे संरक्षण देने वालों की भूमिका उजागर होने पर निर्धारित नियमों के तहत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
छोटे पद पर कर्मचारी, लेकिन प्रभाव को लेकर बड़े सवाल
कुरई-बादलपार क्षेत्र में महिपाल नामक आउटसोर्स कर्मचारी की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर उसके प्रभाव को लेकर चर्चाएं हैं। ऐसे में जांच का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि उसकी आधिकारिक जिम्मेदारी क्या थी और विद्युत कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया में उसे किस सीमा तक अधिकार प्राप्त थे।
यदि कोई आउटसोर्स कर्मचारी निर्धारित जिम्मेदारियों से आगे बढ़कर कनेक्शन संबंधी कार्यों को प्रभावित कर रहा था, तो यह भी पता लगाना जरूरी होगा कि संबंधित अधिकारी उसकी गतिविधियों की निगरानी कैसे कर रहे थे। क्या उसे निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार काम सौंपा गया था या कहीं नियमों से परे जाकर काम करने की छूट मिली हुई थी? इन सवालों का जवाब विभागीय जांच से ही सामने आएगा।
हस्तलिखित दस्तावेज में 5,500 का उल्लेख
मामले से जुड़े हस्तलिखित दस्तावेज में टी.सी. के लिए महिपाल द्वारा 5,500 लिए जाने का उल्लेख है। दस्तावेजों में कोहका, कोहका निमटोला और टुरिया सहित विभिन्न स्थानों के उपभोक्ताओं के नाम तथा विद्युत कनेक्शन से संबंधित जानकारियां दर्ज हैं।
मामले को गंभीर बनाने वाला पहलू यह है कि संबंधित कनेक्शनों में से कुछ को जांच के दौरान अवैध बताए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, दस्तावेजों की प्रामाणिकता, राशि के वास्तविक भुगतान और कनेक्शनों की वैधता की आधिकारिक पुष्टि विभागीय रिकॉर्ड से होना बाकी है।
जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि संबंधित राशि किस मद में ली गई, क्या उसकी अधिकृत रसीद जारी हुई, पैसा विभागीय खाते में जमा हुआ या नहीं और कनेक्शन जारी करने की स्वीकृति किस अधिकारी ने दी थी।
शिकायतें मिलीं, जांच जारी; जूनियर इंजीनियर का स्थानांतरण
कार्यपालन यंत्री राधेश्याम डाबर के अनुसार, इस संबंध में शिकायतें प्राप्त हुई हैं और मामले की जांच की जा रही है। बादलपार के जूनियर इंजीनियर का स्थानांतरण किया जा चुका है, जबकि कुरई क्षेत्र की जांच जारी है।
डाबर ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच पूरी होने के बाद निर्धारित नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि महिपाल की गलती पाई जाती है या उसे संरक्षण देने वालों की भूमिका सामने आती है, तो उनके विरुद्ध भी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
कार्यपालन यंत्री का यह बयान मामले में महत्वपूर्ण है, क्योंकि अब जांच का दायरा केवल कथित रूप से राशि लेने वाले व्यक्ति तक सीमित रखने के बजाय उसकी भूमिका और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तक पहुंच सकता है।
संरक्षण किसका? जांच में खुलना चाहिए पूरा मामला
क्षेत्र में महिपाल को कथित संरक्षण मिलने की चर्चाओं के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि नियमों के विपरीत कोई गतिविधि हुई, तो उसे रोकने की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी। क्या संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी थी? क्या शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी हुई? और क्या किसी स्तर पर कर्मचारी को अनुचित छूट मिली?
फिलहाल संरक्षण या मिलीभगत को प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। लेकिन कार्यपालन यंत्री ने स्वयं यह कहा है कि यदि किसी व्यक्ति को संरक्षण देने की भूमिका सामने आती है, तो उसके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में जांच से यह स्पष्ट होने की अपेक्षा है कि कथित अनियमितता की जिम्मेदारी किस स्तर तक जाती है।
विभागीय रिकॉर्ड से खुलेगी असली तस्वीर
पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए हस्तलिखित दस्तावेजों में दर्ज नामों और कनेक्शन संबंधी विवरणों का विभागीय रिकॉर्ड से मिलान आवश्यक है। भुगतान की रसीदों, कनेक्शन की स्वीकृति, संबंधित अधिकारियों के आदेश और अवैध बताए गए कनेक्शनों की जांच रिपोर्ट से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
यह भी सामने आना चाहिए कि महिपाल की आधिकारिक भूमिका क्या थी, वह किन अधिकारियों के निर्देशन में काम करता था और कनेक्शन जारी करने की प्रक्रिया में किस स्तर पर निर्णय लिए गए।
अब कार्रवाई के आश्वासन पर नजर
कुरई-बादलपार क्षेत्र में सामने आए दस्तावेजों और शिकायतों ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। कार्यपालन यंत्री ने जांच के बाद दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और कार्रवाई केवल कर्मचारी तक सीमित रहती है या जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी तय होती है।
फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है—यदि एक आउटसोर्स कर्मचारी की भूमिका में अनियमितता पाई जाती है, तो उसके कामकाज की निगरानी करने वाली विभागीय व्यवस्था की जवाबदेही किस तरह तय होगी?
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