सिवनी यशो:- लोकसभा के मानसून सत्र में बालाघाट सिवनी सांसद डॉ. ढालसिंह बिसेन द्वारा आसंदी के समक्ष नियम 377 के अधीन समान नागरिक संहिता लागू किये जाने संबंधी राष्ट्रीय स्तर का मामला आसंदी के समक्ष रखा गया। यह जानकारी सांसद के निज सचिव सतीश ठाकरे द्वारा जारी विज्ञप्ति में दी गई।
श्री ठाकरे ने बताया कि सांसद डॉ. ढालसिंह बिसेन ने आसंदी के समक्ष नियम 377 के तहत देश में समान नागरिक संहिता लागू करने की मांग के परिप्रेक्ष्य में ध्यान आकृष्ट किया कि एक राष्ट्र एक कानून और एक लोक के आधार पर हर राष्ट्र में एक ही कानून संचालित है। देश में संविधान अलग एवं धार्मिक कानून अलग अलग काम करते है। अब बढ़ती आबादी एवं सभी समान अधिकार के आधार पर एक देश एक कानून की महती आवश्यकता महसूस हो रही हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 में यह स्पष्ट निर्देशित है कि राज्य, भारत के पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा। इस संहिता के जरिये समान नागरिक संहिता पर्सनल लॉ बोर्ड के संबंध में धार्मिक भेदभावों का अंत किया जायेगा तथा सभी नागरिकों के लिए एक कानून की वकालत की जायेगी।
सांसद डॉ. बिसेन ने आसंदी के समक्ष स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 44 के अनुसार भारत में समान नागरिक संहिता लागू किया जाना सरकार का दायित्व है। समान नागरिक संहिता लागू होने से उसका लाभ देश के नागरिकों विशेषकर महिलाओं को मिलेगा एवं भेदभाव समाप्त होगा तथा साम्प्रदायिक सौहाद्र का वातावरण अपने आप निर्मित हो जायेगा। डॉ. बिसेन ने इस अवसर पर सभी निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, माननीय न्यायाधीशों, सांसदों, विधायकों से आग्रह किया कि वे भी भारत के संविधान का पालन करने की शपथ लेते है। अत: उनका भी दायित्व बनता है कि वे संविधान के परिपालन में समान नागरिक संहिता लागू कराने हेतु अपनी आवाज बुलंद करें। डॉ. बिसेन ने अंत में आसंदी से आग्रह किया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 के परिपालन में देश में समान नागरिक संहिता लागू करायें।




