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जगद्गुरू रामभ्रद्राचार्य जी की रामकथा 09 सितंबर से

सिवनी यशो:- सनातन धर्मियों के श्रद्धा और अस्था के केन्द्र तुलसीपीठाधीश्वर पद्मविभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज द्वारा सिवनी जिला मुख्यालय की धरा से रामनामी पवित्र कथा का प्रवाह किया जायेगा । मंगल करनि कलिमल हरनि तुलसी कथा रघुनाथ की आगामी 9 सितंबर से 17 सितंबर तक जिले के पॉलीटेक्निक ग्राउंड में संपन्न होने वाली है। इस दिव्य रामकथा के आयोजन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुँचने की संभवनाओं को देखते हुये राम कथा के आयोजक सिवनी विधायक दिनेश राय मुनमुन द्वारा व्यापक व्यवस्थाएँ की जा रही है ।

व्यापक प्रभावकारी होगी कथा

धार्मिक और आध्यात्मिक विचारधारा के प्रमुख, श्री चित्रकूट तुलसीपीठाधीश्वर पद्मविभूषण जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामभद्राचार्य जी महाराज, द्वारा सिवनी जिलेवासियों को राम कथा के साथ साथ अपने उपदेशों द्वारा जीवन को ईश्वर अनुरागी बनाने वाला सफल आयोजन सिद्ध होगा । दिव्य महात्मा की अमृत वाणी का जादू कथा श्रवण करने वाले श्रोताओं पर व्यापक प्रभावकारी होता है यह परम श्रद्धेय स्वामी रामभद्राचार्य जी की साधना का प्रताप है ।

जिले के लिये सौभाग्य का विषय

जिला मुख्यालय में इस तरह का भव्यतम आयोजन धर्मप्रेमियों सनातनियों के लिये सौभग्य का विषय तो है ही यह आयोजन देश की राष्ट्रीय पहचान भगवान राम की जन्मभूमि विवाद को सुलझाने वाले दिव्य महात्मा के दर्शन कराने वाला ऐतिहासिक क्षण है । इन्हीं परम श्रद्धेय स्वामी जी की गवाही को सवोच्चय न्यायालय ने अहम माना और उसी के आधार पर निर्णय दिया था जिसके कारण आयोध्या में भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माण का कार्य चल रहा है और सैकड़ो वर्षो से चल रहा विवाद समाप्त हुआ ।

भगवान राम का भव्य मंदिर में जद्गुरू के चमत्कारी तथ्य

वेद-पुराणों के उद्धरणों के साथ उनकी गवाही का कोर्ट भी कायल हो गया था। श्रीराम जन्मभूमि के पक्ष में वे वादी के तौर पर उपस्थित हुए थे। ऋग्वेद की जैमिनीय संहिता से उन्होंने उद्धरण दिया था। इसमें सरयू नदी के स्थान विशेष दिशा और दूरी का बिल्कुल सटीक ब्योरा देते हुए रामभद्राचार्य ने श्रीराम जन्मभूमि की स्थिति बताई थी।
कोर्ट में इसके बाद जैमिनीय संहिता मंगाई गई। उसमें जगद्गुरु ने जिन उद्धरणों का जिक्र किया था, उसे खोलकर देखा गया। सभी विवरण सही पाए गए। पाया गया कि जिस स्थान पर श्रीराम जन्मभूमि की स्थिति बताई गई, विवादित स्थल ठीक उसी स्थान पर पाया गया।

वेद पुराण उपनिषद कंठस्थ 22 भाषाओं पर अधिकार

कोर्ट के लिये यह बात भी आश्चर्य कारक थी जन्मांध व्यक्ति वेद पुराणों, संहिता, से जिस तरह से प्रमाणिक जानकारी दे रहा है यह किसी ईश्वरी शक्ति के बिना संभव नहीं है । रामजन्म भूमि विवाद को समाप्त कराने वाला यह दिव्य महात्मा वेद, पुराण, उपनिषद श्रुती स्मृतियों को कंठस्थ धारा प्रवाह बोलते है और लगभग 22 भाषाओं का ज्ञान है । यह ईश्वरीय चमत्कार ही है ।
पद्मविभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य जी श्री रामानंदी संप्रदाय के जगद्गुरु हैं । स्वामी रामभद्राचार्य प्रख्यात आध्यात्मिक मार्गदर्शक और जगतगुरु रामानंदाचार्य हैं । स्वामी जी प्राचीन शास्त्रों और दर्शन के प्रकांड विद्वान हैं । उन्होंने कई दशकों के अपने समर्पित अध्ययन से और लगातार अभ्यास के जरिये सनातन संस्कृति और भगवान राम की समृद्ध धरोहर में गहरी अंतरदृष्टि प्राप्त की है। आप बाघेश्वर धाम के विख्यात पुजारी पंडित धीरेन्द्र शास्त्री के गुरू भी है जिनकी ख्याति और यश का यशोगान पूरी दुनिया में हो रहा है ।

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