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विद्यालय, महाविद्यालय की 13 सूत्रीय मांगो को ले अशैस ने सौपा ज्ञापन

जिले भर की प्रायवेट शाला के प्रबंधक हुये शामिल

सिवनी यशो:- जिले के अशासकीय विद्यालयों की सात सूत्रीय तथा अशासकीय महाविद्यालयों की 5 सूत्रीय मागों को लेकर जिला प्रशासन के समय अशैस संगठन ने ज्ञापन सौपा।
विद्यालयों की मांग के संदर्भ मे फीस नियामक आयोग के माध्यम से अशासकीय विद्यालयों की फीस का निर्धारण किया जाये, ताकि प्रति अभिभावको एवं संस्था के बीच पारदर्शिता बनी रहे। शासन के मापदण्ड पूर्ण करने वाले विद्यालयों को न्यूनतम 5 वर्षो की स्थायी मान्यता प्रदान की जाए।
अशासकीय विद्यालयों के प्राचार्यों को सी.बीएसई की तर्ज पर हाई/ हायर सैकेन्डरी तथा 5 वी 8 वी की परीक्षाओं में केन्द्राध्यक्ष बनाया जाने शासकीय विद्यालयों के शिक्षको के लिए शासकीय शिक्षा विद्यालयों में बीएड एवं डाइट संस्थानों से डी. एड प्रशिक्षण दिया जाता है इसी तर्ज पर 20 प्रतिशत सीट अशासकीय विद्यालय मे शिक्षण कर रहे शिक्षकों के लिए निर्धारित की जाए। उत्कृष्ट कार्य करने वाले अशासकीय विद्यालयों के शिक्षकों को राज्यपाल पुरुस्कार से सम्मानित किया जाए आर. टी. आई. शुल्क प्रक्रिया का शिथिलीकरण दिया जाए एवं पूर्व वर्षो से वंचित छात्रों के लिए एक वर्ष पोर्टल खोलकर गत वर्षो से रुके परिणाम प्रकरणों को पूर्ण करने अंतिम अवसर प्रतिपूर्ति का दिया हाको पर्यावरण उन्नयन समिति का गठन प्रत्येक विद्यालयों में किया जाए।
इसी तरह महाविद्यालयों को लेकर सौपे गये ज्ञापन में केन्द्र सरकार द्वारा निर्मित नई शिक्षा नीति को अक्षरश: प्रवेश परीक्षा उपस्थिति छात्रवृत्ति परीक्षा परिणाम, कौशल संवर्धन के लिए लागू किया जाए जिससे एक कक्षा में अधिकतम 40 छात्रों की प्रवेश व्यवस्था सतत उपस्थिति पर छात्रवृत्ति एवं परीक्षा एक रोजगार परक पाठ्यक्रम को लागू करने की व्यवस्था कठोरता से लागू की आए। 40 से अधिक प्रवेश किसी भी महाविद्यालय की किन्ही भी कक्षाओं में न कराया जाए हर राउण्ड में सीट वृद्धि बिना एप्रुबल की जाकर शिक्षा को प्रवेश मात्र प्रवेश, परीक्षा एवं डिग्री बाटने की व्यवस्था ना बनाया जाए।
एनईपी- 2020 के तहत अशासकीय महाविद्यालयों में समन्वय बनाने परीक्षा एक परीक्षाकेन्द्र प्रथक महाविधालय में किया जाना जरूरी है। अध्ययनरत महाविद्यालय का छात्र उसी महाविद्यालय में परीक्षा ना दे अन्यत्र महाविद्यालय में परीक्षा दे इसे कठोरता से लागू किया जाए। छात्रवृत्ति में असमानता दूर की जाए ताकि विद्यार्थियों को अन्य जिले में भटकना ना पड़े जिला स्तर पर विश्वविद्यालय का गठन किया जाए एवं नई शिक्षा नीति का सख्ती से पालन दिया जाए। शिक्षा में गुणवता हेतु परीक्षा अध्यापन एवं इंफ्रास्टक्चर उपस्थिति एवं सीटों सख्ती से पालन किया जाए।
इन मांगों से लेकर अशासकीय शैक्षणिक संगठन के प्रदेशाध्यक्ष डा. के.के. चतुर्वेदी, आर. आर. रघुवंशी बेलपेट, अखिलेश तिवारी चक्की खमरिया, तेरसिहं राहगंडाले गगेरुआ गजेश ठाकरे बरघाट, डा. ओम मिश्रा पीपरवानी कुरई गजेन्द्र देशमुख, सुरेश डहरवाल, मनीष पाण्डे खवासा फिरदौस खान धनौरा वाय.एस. राणा, नरेन्द्र अग्रवाल सिवनी राजेश शिवहरे भीमगढ मनीष चौरसिया जी.पी. सेन अखिलेश यादव दीपेन्द्र शुक्ला देवीसिह निर्मलकर एच.के चतुर्वेदी अमिता चतुर्वेदी आरके चतुर्वेदी देवी सिंह सहित अनेक लोग शामिल हुये।

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