44 लाख से बन रहा फुटबॉल मैदान भी खिलाड़ियों को नहीं भाया, बोले- ऐसा ग्राउंड बने जहां राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं हो सकें
कमलनाथ के समय बने मैदान की गुणवत्ता पर पहले भी उठे थे सवाल, अब नए निर्माण में भी मानकों की अनदेखी का आरोप
छिंदवाड़ा फुटबॉल मैदान निर्माण पर उठे सवाल, खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय स्तर का ग्राउंड बनाने की उठाई मांग
Chhindwara 09 July 2026
छिंदवाड़ा यशो: – फुटबॉल प्रेमियों के शहर के रूप में पहचान रखने वाले छिंदवाड़ा में स्टेडियम स्थित फुटबॉल मैदान के निर्माण को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
खिलाड़ियों का कहना है कि सांसद विवेक बंटी साहू के प्रयासों से 44 लाख रुपये की स्वीकृति मिलने के बाद भी मैदान का निर्माण राष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुरूप नहीं हो रहा है।
उनका कहना है कि यदि इतनी राशि खर्च की जा रही है तो ऐसा मैदान तैयार होना चाहिए, जहां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकें।
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40 साल पहले होती थी ऑल इंडिया फुटबॉल प्रतियोगिता
खिलाड़ियों का कहना है कि लगभग चार दशक पहले लाल बहादुर शास्त्री ऑल इंडिया फुटबॉल टूर्नामेंट शहर की पहचान हुआ करता था।
उस समय मैच टिकट के माध्यम से आयोजित होते थे और बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचते थे।
आज भी शहर में फुटबॉल के प्रति युवाओं का उत्साह बरकरार है, लेकिन गुणवत्तापूर्ण मैदान का अभाव महसूस किया जा रहा है।
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पहले 22 लाख, अब 44 लाख से हो रहा निर्माण
जानकारी के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के कार्यकाल में मैदान के निर्माण के लिए 22 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे, लेकिन खिलाड़ियों का आरोप है कि निर्माण कार्य गुणवत्ता के अनुरूप नहीं हुआ।
अब वर्तमान सांसद विवेक बंटी साहू ने खेल मंत्री से 44 लाख रुपये स्वीकृत कराए हैं और नगर पालिका को निर्माण एजेंसी बनाया गया है।
निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल
खिलाड़ियों का आरोप है कि मैदान में डाली गई काली मिट्टी (कापू) में कंकड़-पत्थर अधिक हैं, जबकि खेल मैदान के लिए महीन मिट्टी की आवश्यकता होती है।
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इसके अलावा मैदान में लगाई गई घास की जगह कई स्थानों पर जंगली घास उगने लगी है, जिससे निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर का मैदान बनाने की मांग
फुटबॉल खिलाड़ियों का कहना है कि छिंदवाड़ा में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। यदि मैदान अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जाए तो यहां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित की जा सकती हैं।
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उनका मानना है कि इससे खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिलेंगे और जिले की खेल पहचान भी मजबूत होगी।



