जल जीवन मिशन की प्यास : अनियमितताओं की जांच, मंत्री तक पहुंचे सवाल
30 हजार करोड़ की योजना में गड़बडिय़ों के आरोप, केंद्र की नाराजग़ी और विभागीय जांच के आदेश
Bhopal / Seoni / Mandla 02 July 2025
पीएचई मंत्री संपतिया उइके के 1000 करोड़ रुपए कमीशन लेने के आरोप पर मंडला जिले में भी तीखी प्रतिक्रिया है और मंडला के बुद्धिजीवी इस बात को बहुत गंभीरता से ले रहे है और शासन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे है उनका मानना है कि एक हजार करोड़ रूपये का ही मंडला में ईमानदारी से उपयोग होता तो पूरे जिले की प्यास बुझ सकती थी । केवल एक विभाग में इस तरह का घोटाला पूरे प्रदेश का बंटाढार किये हुये है ।
हालांकि मंडला का बुद्धिजीवी वर्ग विपक्ष की भूमिका से भी संतुष्ट नहीं है और उनका कहना है कि इस तरह के घोटाले, फर्जीवाड़ा, आदिवासियों पर अत्याचार हो रहे है और विपक्ष केवल बयान जारी कर विरोध दर्ज करा देता है । एक पूर्व विधायक को पीएचई के घोटाले की जानकारी है परंतु विपक्ष को इस तरह की गड़बडियों की हवा तक नहीं है ।
वहीं कुछ लोग इस बात को भी कह रहे है कि यह एक ऐसा राजनैतिक हथकंडा है जो संपत्तियाँ उईके को प्रदेश अध्यक्ष बनने से रोकने के लिये अपनाया गया सत्ताधारी दल का ही षडयंत्र बता रहे है । मामला चाहे जो हो परंतु पीएचई में इतना बड़े घोटाले की खबर सुर्खियों में है और आम जनता में तीखी प्रतिक्रिेया है।
गांव-गांव जल पहुंचाने की केंद्र सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी योजना ‘जल जीवन मिशनÓ अब विवाद और जांच के घेरे में आ चुकी है। इस योजना की प्रगति और पारदर्शिता को लेकर उठे सवाल अब मंत्री स्तर तक पहुँच गए हैं।
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) ने अपनी ही विभागीय मंत्री सुश्री संपतिया उईके के खिलाफ जांच के आदेश जारी किए हैं। यह आदेश प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से मिली शिकायत और उसके आधार पर मांगी गई रिपोर्ट के बाद जारी किए गए।
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पीएचई के प्रमुख अभियंता संजय अंधवान ने प्रदेश के सभी मुख्य अभियंताओं और जल निगम के परियोजना निदेशकों को सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। विभाग के आंतरिक पत्राचार में उल्लेख है कि भारत सरकार ने राज्य को दिए गए 30 हजार करोड़ रुपए की उपयोगिता की विस्तृत जांच करने को कहा है।
मंत्री से इस्तीफा, पीएम को पत्र और सीबीआई जाँच की मांग

हालांकि इस प्रकार की जाँच को कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने अपर्याप्त बताते हुये कहा है कि 4 दिनों में एक हजार करोड़ रुपए की जांच समाप्त हो जाना अपने आप में बहुत कुछ बयां करता है।
पीसीसी चीफ ने जांच को लेकर कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी का चाल, चरित्र और चेहरा है, जो देश और दुनिया को स्पष्ट दिख रहा है। पटवारी ने कहा कि 21 तारीख को जांच के आदेश दिए जाते हैं और 25 तारीख को जांच पूरी हो जाती है। 4 दिनों में एक हजार करोड़ रुपए की जांच समाप्त हो जाना अपने आप में बहुत कुछ बयां करता है। उन्होंने कहा है कि मामले में प्रधानमंत्री को वह पत्र लिखेंगे और सीबीआई जांच की मांग करेंगे।
उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में जल जीवन मिशन के 60 प्रतिशत कमीशन का मामला है। इसका भौतिक सत्यापन होना चाहिए। मंत्री को तत्काल अपना इस्तीफा देना चाहिए। जीतू पटवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री को एक नेशनल टीम भेजकर इसकी जांच करनी चाहिए। साथ ही इसकी सीबीआई जांच भी कराई जाना चाहिए।
बीजेपी केवल खाने का काम कर रही है
पटवारी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का दावा था कि न खाऊंगा और न खाने दूंगा। लेकिन यहां भारतीय जनता पार्टी सिर्फ खाने का काम कर रही है। बीजेपी के नेता ही खा सकते हैं, दूसरों को उसमे भी कोई छूट नहीं है। । पटवारी ने कहा कि 21 तारीख को जांच के आदेश दिए जाते हैं और 25 तारीख को जांच पूरी हो जाती है। ये इसलिए की मंत्री बीजेपी की है, सरकार बीजेपी की है। पीसीसी चीफ ने कहा कि अगर यह देश के हित में नहीं है तो हमें लडऩा पड़ेगा ।
विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने जाँच को खानापूर्ति करार दिया
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा कि भाजपा के जल जीवन मिशन के नल से सिर्फ हवा आ रही है, पानी तो भाजपा के भ्रष्टाचार की भेट चढ़ चुका है। आज भी प्रदेश की महिलाएं पीने के पानी के लिए संघर्ष कर रही हैं, लेकिन भाजपा सरकार को सिर्फ कमीशन से मतलब है। इन्होंने मंत्री से संबंधित आरोपो पर अनेक सवाल उठाये है जो संलग्र लिंक पर जा कर पढ़े https://x.com/UmangSinghar/status/1939924470560391593
जमीनी हकीकत: नल है, पानी नहीं’
राजकुमार सिन्हा पर्यावरण और सामाजिक कार्यकत्र्ता है वे बताते है कि
जल जीवन मिशन की प्रस्तावित कवरेज और वास्तविक लाभार्थियों में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है।
लोकसभा में पेश रिपोर्ट के मुताबिक:
मध्यप्रदेश अब भी 30वें स्थान पर है। 
36.60 लाख परिवार अब भी वंचित हैं।
केंद्र द्वारा कराए गए सर्वे में 1271 गांवों में से 217 में नल ही नहीं लगे, लेकिन काम पूरा बताया गया।
पानी में बैक्टीरियल और रासायनिक मिलावट, जिससे स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा।
जबलपुर, मंडला, बालाघाट, छिंदवाड़ा में अधूरे कार्य, खाली पाइपलाइन और टंकियाँ, लेकिन भुगतान पूरा।
पूरी रिपोर्ट पढऩे के लिये कागज़़ी उपलब्धियों और ज़मीनी हकीकत के बीच पसरा है प्यासा भारत
वकीलों की प्रतिक्रिया
यह घोटाला कितना बड़ा है या तो जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। पर यह बात तो तय है कि जल जीवन मिशन शुरू होने के कितने सालों बाद भी अगर दूरस्थ ग्राम की जनता पानी के लिए तरस रही है तो यह स्थिति भ्रष्टाचार की ही देन है ।एडवोकेट अंशुलिका सोनी (हाइकोर्ट जबलपुर) 
राजनीतिक दल जनता के धन का उपयोग जनता के हित में ना करके अपने खुद के विकास में करते हैं। यह घोटाला उनका एक छोटा सा उदाहरण है।





