मध्यप्रदेशधर्मसिवनी

“चिता जलने से पहले अपने चित्त को जगावे” – शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का जीवन-दर्शन

द्वारकाधीश मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा एवं भागवत ज्ञान यज्ञ, सीलादेही सिवनी

द्वारकाधीश मंदिर में राधा-कृष्ण प्राण-प्रतिष्ठा से सिवनी धर्ममय

सिवनी | सीलादेही | 22 फरवरी 2026 —
द्वारकाधीश मंदिर सीलादेही में आयोजित राधा-कृष्ण विग्रह प्राण-प्रतिष्ठा एवं सप्तदिवसीय भागवत ज्ञान यज्ञ
के दूसरे दिवस सिवनी नगर पूरी तरह धर्म, भक्ति और अध्यात्म की ऊर्जा से सराबोर हो उठा।

भागवत कथा श्रवण से शोक, मोह और भय का नाश होता है। प्रतिष्ठित व्यक्ति का अपयश मृत्यु से भी अधिक कष्टकारी होता है।
अन्यायपूर्वक अर्जित स्वर्ण और धन में कलियुग का वास होता है — ऐसे गूढ़ आध्यात्मिक संदेश
सहज संतोष आश्रम सीलादेही में चल रही कथा मंडपम में संतों के मुखारविंद से प्रवाहित हुए।

Radha Krishna Pran Pratishtha Seoni Dwarkadhish Mandir Siladehi
द्वारकाधीश मंदिर सीलादेही में राधा-कृष्ण प्राण-प्रतिष्ठा से सिवनी धर्ममय

भागवत कथा परमात्मा की शब्दरूपी मूर्ति

कथा व्यास गीता मनीषी ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूप जी ने द्वितीय दिवस के कथा प्रसंग में
चतुष् श्लोकी भागवत की आध्यात्मिक व्याख्या करते हुए कहा कि यही भागवत रूपी विशाल वटवृक्ष का बीज है।
उन्होंने बताया कि व्यास पुत्र शुकदेव जी महाराज वैराग्य के प्रतीक थे और उन्हें
18,000 श्लोक कंठस्थ थे।

कथा में महाभारत युद्ध के 18वें दिन का वर्णन, अश्वत्थामा द्वारा पांडवों के पुत्रों का वध,
द्रौपदी का क्षमाशील किंतु दृढ़ निर्णय, परीक्षित के गर्भ में ब्रह्मास्त्र प्रयोग,
भीष्म स्तुति, राजा परीक्षित का अश्वमेध यज्ञ तथा कलियुग के प्रवेश का मार्मिक चित्रण किया गया।

Radha Krishna Pran Pratishtha Seoni Dwarkadhish Mandir Siladehi
द्वारकाधीश मंदिर सीलादेही में राधा-कृष्ण प्राण-प्रतिष्ठा से सिवनी धर्ममय

नारद जी की प्रेरणा से परम वीतराग शुकदेव जी महाराज द्वारा परीक्षित के उद्धार हेतु
भागवत कथा का उपदेश देकर मृत्यु-भय का निवारण किया गया।

जगतगुरु शंकराचार्य का दिव्य पदार्पण

द्वितीय दिवस की कथा समाप्ति पर द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती जी महाराज
का दिव्य पदार्पण कथा मंडपम में हुआ।
उन्होंने सिवनी नगर में निकली राधा-कृष्ण की भव्य शोभायात्रा की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

शंकराचार्य जी ने आयोजन समिति, नगर के धर्मप्रेमी नागरिकों तथा कलश यात्रा में सम्मिलित
मातृशक्ति की सराहना करते हुए कहा कि आप सभी ने शोभायात्रा में सहभागी बनकर
सिवनी की सनातन संस्कृति का सम्मान बढ़ाया है।

उन्होंने कहा —
“मनुष्य को देह रहते ही परमात्मा को प्राप्त कर लेना चाहिए।
चिता जलने से पहले चित्त को जागृत करना ही जीवन की सबसे बड़ी साधना है।”

 विशेष सूचना

23 फरवरी 2026 को भागवत कथा समापन के पश्चात
भव्य भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा।

इस अवसर पर सुप्रसिद्ध भजन कलाकार मनीष अग्रवाल
अपनी सुमधुर प्रस्तुतियां देंगे।
उनका लोकप्रिय भजन “अंगना पधारो महारानी…”
हिंदी भाषी क्षेत्रों में विशेष रूप से चर्चित रहा है।

https://www.youtube.com/watch?v=kpTpCJGk6Ug

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