विषाद से प्रसाद की ओर ले जाने वाला ग्रंथ है भगवत गीता – गीता मनीषी निर्विकल्प स्वरूप जी
श्रीमद् भगवद् गीता सत्संग महोत्सव स्मृति लान 20 दिसंबर से 24 दिसंबर, सनातन धर्म, नित्य शाश्वत है, ना तो यह उत्पन्न हुआ है और ना ही कभी इसका अंत होगा – गीता मनीषी निर्विकल्प स्वरूप जी
Seoni 23 December 2024
सिवनी यशो:- विषाद से प्रसाद की ओर ले जाने वाला ग्रंथ है भगवत गीता। पंचतत्व पृथ्वी ,जल, अग्नि, आकाश ,और वायु समस्त प्राणियों के जीवन का आधार हैं। तृष्णा का क्षय होना ही,स्वर्ग की प्राप्ति है । जो भगवान को जान लेता है वह भगवद् स्वरूप हो जाता है।
उक्ताश्य के प्रेरक प्रवचन, गीता मनीषी ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूप जी के मुखारविंद से गीता सत्संग उत्सव के तीसरे दिन प्रकाशित हुए। *ब्रह्मलीन द्वीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य महाराज श्री* के कृपा- पात्र शिष्य, ब्रह्मचारी जी ने, भगवद् गीता के सातवें अध्याय में श्लोक क्रमांक 8 से 13 का विद्वतापूर्ण आध्यात्मिक भावार्थ सरल भाषा में बताया। आप श्री ने कहा कि प्राकृतिक पांच तत्वों को बाधित और दूषित करने से मनुष्य का जीवन सुविधा भोगी तो हो जाता है, किंतु वास्तविक सुख से वह वंचित हो जाता है।
अपने व्यक्तिगत अनुभव के आधार पर आप श्री ने कहा कि सिवनी जिले से निकलने वाली पवित्र बैनगंगा नदी देवी स्वरूपा , फलदायनी है। समस्त नदीयां विराट पुरुष परमात्मा की नाडी हैं ,इन्हें बाधित और दूषित करने से बचना चाहिए। मनुष्य के जीवन का कारण अन्न, जल है । हिंसक पशुओं का ही भोजन मांसाहार है । मनुष्य को मांसाहार के सामूहिक एवं व्यक्तिगत पाप से दूर रहना चाहिए। ब्रह्मचारी जी ने अध्याय 7 के श्लोक नंबर 10 से 13 का लौकिक दृष्टांत, विद्वानों के भाष्य, तथा धर्म शास्त्रों के माध्यम से सरल अर्थ समझाते हुए कहा कि, संसार के संपूर्ण चराचर का सनातन बीज परमात्मा है । सनातन नित्य है यह ना तो उत्पन्न हुआ है और ना ही नष्ट होता है। ठीक इसी तरह सनातन धर्म का कभी अंत नहीं होगा। किंतु जो मानव निर्मित धर्म उत्पन्न हुए हैं, उनका अंत निश्चित है।
प्रसंगवश आप श्री ने सात्विक, राजसी , तामसी लक्षणों को दृष्टांत के माध्यम से समझाया। मनुष्य इन तीन भाव में फंसकर ही दुखी है। बुद्धिमान व्यक्ति सुखी होने के लिए अपने जीवन रथ की लगाम श्रेष्ठ व्यक्तियों के हाथ सौंप कर परम लक्ष्य को प्राप्त करता है।
ब्रह्मचारी जी ने गीता प्रेमी श्रोताओं से खचाखच भरे प्रवचन पंडाल में गुजराती भजन *प्रभु तुमे छुमारा जीवन रथ सारथी*……के भावर्थ सहित सस्वर गायन, के माध्यम से भक्ति रस का पान कराया।
आज की प्रवचन माला के समापन के पश्चात बांग्लादेश की कट्टरपंथी हिंसक घटनाओं में अकाल मृत्यु प्राप्त हुतात्माओं की आत्म शांति तथा वहां की सरकार को सद्बुद्धि प्रदान करने के निमित्त गीता के 12 अध्याय का सामूहिक पाठ किया गया तथा भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
आज समस्त गीता प्रेमियों की औओर से पतंजलि शाखा सिवनी के सदस्यों तथा विशिष्ट गणमान्य नागरिकों ने गीता आरती और माल्यार्पण किया।


