साइबर ठगों की बड़ी साजिश नाकाम
“डिजिटल अरेस्ट” के झांसे से 64 वर्षीय बुजुर्ग को बचाया त्वरित कार्रवाई से 73 लाख रुपये की ठगी टली
भोपाल 3 दिसम्बर 2025
भोपाल :- मध्यप्रदेश पुलिस साइबर अपराधों पर रोक लगाने और नागरिकों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चला रही है। इसी प्रयास के तहत बैतूल पुलिस ने “डिजिटल अरेस्ट” जैसी खतरनाक ठगी से 64 वर्षीय रिटायर्ड बुजुर्ग को मुक्त कराते हुए उनकी 73 लाख रुपये की जीवनभर की जमा-पूँजी को बचा लिया। पुलिस की त्वरित, संवेदनशील और तकनीकी कार्रवाई ने साइबर ठगों की बड़ी साजिश को विफल कर दिया।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्रीमती कमला जोशी, एसडीओपी सारणी सुश्री प्रियंका करचाम और थाना प्रभारी सारणी श्री जयपाल इनवाती के मार्गदर्शन में पाथाखेड़ा पुलिस टीम द्वारा की गई।
कैसे बुजुर्ग को फँसाया गया “डिजिटल अरेस्ट” में?
पीड़ित चैतराम नरवरे, निवासी अशोका गार्डन, भोपाल (रिटायर्ड WCL कर्मचारी) को एक वीडियो कॉल आया। कॉल करने वालों ने खुद को ईडी-सीबीआई अधिकारी बताया और उन पर मनी-लॉन्ड्रिंग का झूठा आरोप लगाकर भारी धनराशि की मांग की।
ठगों ने:
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उन्हें पाथाखेड़ा, सारणी बुलाया
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एक होटल के कमरे में “डिजिटल अरेस्ट” में रखा
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परिवार से बात करने से रोका
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बैंक एफडी तुड़वाने का दबाव बनाया
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73 लाख की एफडी के लिए RTGS फॉर्म तक भरवा लिया
तीन दिनों तक पीड़ित मानसिक रूप से दबाव में रहे और ठगों की हर बात पर विश्वास करते रहे।
परिजनों की सूचना और पुलिस की रेस्क्यू एक्शन
परिजनों को लगातार संपर्क न होने पर अनहोनी की आशंका हुई। उन्होंने तुरंत पुलिस को सूचना दी।
पाथाखेड़ा पुलिस टीम ने:
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पीड़ित की मोबाइल लोकेशन ट्रैक की
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लोकेशन राजेश गेस्ट हाउस, बगडोना में मिली
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टीम तुरंत होटल पहुँची
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बुजुर्ग मानसिक सदमे में थे और पुलिस को भी ठगों का हिस्सा समझ रहे थे
पुलिस टीम ने धैर्यपूर्वक पूरी स्थिति समझाई, उनका भ्रम दूर किया और सुरक्षित बाहर निकालकर परिजनों से मिलवाया।
समय पर की गई कार्रवाई से 73 लाख रुपये की ठगी होने से बच गई।
पुलिस की अपील: “डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई कानून नहीं!”
मध्यप्रदेश पुलिस ने स्पष्ट कहा है:
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भारतीय कानून में डिजिटल अरेस्ट नाम की कोई प्रक्रिया नहीं है
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कोई भी एजेंसी– पुलिस, ईडी, सीबीआई— वीडियो कॉल/व्हाट्सएप पर गिरफ्तारी नहीं कर सकती
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न धनराशि मांग सकती है, न ही बैंक विवरण
यदि कोई खुद को अधिकारी बताकर:
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डराए
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धमकाए
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पैसा माँगे
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या किसी लिंक / वीडियो कॉल पर दबाव बनाए
तो यह 100% साइबर ठगी है।
क्या करें? (जागरूकता संदेश)
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ऐसी किसी भी कॉल / लिंक पर विश्वास न करें
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अपनी निजी या बैंकिंग जानकारी साझा न करें
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तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर शिकायत करें
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या नजदीकी थाने को सूचना दें



