गांधी चौक सिवनी में विराट हिन्दू सम्मेलन, संतों ने दिया एकता और राष्ट्रसेवा का संदेश
जातिवाद से ऊपर उठकर सनातन संस्कार अपनाने का आह्वान, भारत माता पूजन से हुआ शुभारंभ
Seoni 31 January 2026
सिवनी यशो:- सिवनी नगर के ऐतिहासिक गांधी चौक, शुक्रवारी बाजार में शुक्रवार को कटंगी नाका बस्ती द्वारा विराट हिन्दू सम्मेलन का भव्य एवं ऐतिहासिक आयोजन किया गया। सम्मेलन में परमपूज्य स्वामी प्रज्ञानंद सरस्वती जी महाराज, हितेंद्र शास्त्री जी महाराज, जैन समाज के संत-महात्मा एवं आर्यिकाओं के ओजस्वी, मार्गदर्शी और चेतनादायी उद्बोधनों से संपूर्ण वातावरण धर्म, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत हो गया।

सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा, महिलाएं एवं नगरवासी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ भारत माता के पूजन के साथ हुआ, जिसके पश्चात राष्ट्रभक्ति और सनातन संस्कृति को दर्शाती आकर्षक झांकियों की प्रस्तुति दी गई।
जातियों में बांटने वालों से सावधान रहने का आह्वान
अपने आशीर्वचनों में स्वामी प्रज्ञानंद सरस्वती जी महाराज ने हिन्दू समाज को संगठित रहने और संस्कारयुक्त समाज निर्माण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म किसी एक वर्ग या जाति का नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण की भावना से प्रेरित है।

उन्होंने कहा कि आज कुछ शक्तियां हिन्दू समाज को जाति, भाषा, क्षेत्र और वर्ग के नाम पर बांटकर आपसी वैमनस्य फैलाने का प्रयास कर रही हैं। ऐसे तत्वों से सतर्क रहने की आवश्यकता है।
स्वामी जी ने कहा कि –
आदिवासी समाज ने अयोध्या के भगवान श्रीराम के संघर्ष और गौरव में ऐतिहासिक योगदान दिया है,
किंतु आज उन्हें भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि –
भारत की संस्कृति “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश देती है,
किंतु जब समाज आपसी भेदभाव में उलझता है,
तब विघटनकारी शक्तियां मजबूत होती हैं।
धर्म, संस्कृति और राष्ट्रसेवा को जीवन का मूल उद्देश्य बताते हुए उन्होंने कहा कि-
सनातन परंपराओं को व्यवहार में उतारना ही सशक्त राष्ट्र की नींव है।

RSS के 100 वर्ष: जैन संतों की देशना से जनमानस हुआ जागृत
नगर के ऐतिहासिक हृदय स्थल गांधी चौक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस विराट हिन्दू सम्मेलन में परमपूज्य मुनि श्री पावनसागर जी महाराज की देशना ने जनमानस को गहराई से प्रभावित किया।
मुनि श्री ने कहा कि “अदृश्य शक्तियां घर-परिवार में दस्तक दे रही हैं, यदि समय रहते सचेत नहीं हुए तो गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।”
उन्होंने संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि 1925 में डॉ. हेडगेवार ने तुष्टिकरण और सांस्कृतिक अन्याय के दौर में हिन्दू समाज को संगठित करने के उद्देश्य से संघ की नींव रखी।

भारत का वैभवशाली अतीत और आत्मनिर्भर भविष्य
भारत के गौरवशाली इतिहास का उल्लेख करते हुए मुनि श्री ने कहा कि-
सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के काल में भारत “सोने की चिड़िया” था। मध्यकालीन आक्रांताओं और
औपनिवेशिक शासन ने भारतीय संस्कृति को गहरा आघात पहुंचाया।
उन्होंने स्वतंत्र भारत के लिए तीन सूत्र बताए—
ब्रेक इन इंडिया (आंतरिक अराजकता और आतंकवाद पर रोक),
मेक इन इंडिया (उद्योग, विकास और आत्मनिर्भरता),
लुक इन इंडिया (भारत को विश्व गुरु के रूप में स्थापित करना)।
उन्होंने चेताया कि यदि समाज सजग नहीं हुआ तो कश्मीर, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे हालात भविष्य में भारत में भी उत्पन्न हो सकते हैं।
विशेष रूप से कन्या सुरक्षा और पारिवारिक सतर्कता पर जोर दिया गया।
“गर्व से कहो हम हिंदू हैं” – आर्यिका भावनामति माताजी
पूज्य आर्यिका श्री भावनामति माताजी ने कहा कि-
“गर्व से कहो हम हिंदू हैं, क्योंकि हिंदू वह है जो मानसिक हिंसा भी नहीं करता।”
उन्होंने भगवान महावीर, श्रीराम, श्रीकृष्ण और ऋषभदेव की संस्कृति पर चलने को ही सच्चा हिंदुत्व बताया।
नारी गरिमा पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि-
चरित्र और शील ही नारी का वास्तविक सौंदर्य है।
सम्मान समारोह और भारत माता की आरती
स्वामी प्रज्ञानंद जी महाराज के सानिध्य में आयोजित सम्मान समारोह में जैन समाज की ओर से श्री पारस जैन, डॉ. अपूर्व जैन एवं रोहित चौधरी को भारत माता का स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया।
समरसता भोज के साथ हुआ समापन
विराट हिन्दू सम्मेलन में बड़ी संख्या में श्रोता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन समरसता भोज के साथ किया गया,
जिसमें समाज के सभी वर्गों ने सहभागिता निभाई।
आयोजन ने सिवनी नगर में धार्मिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय एकता का सशक्त संदेश दिया।



