पांच महापापों का प्रायश्चित् नहीं है- ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी
सिवनी यशो:- सरेखा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के कृपा पात्र शिष्य गीता मनीषी सद्गुरु चरणानुरागी ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज ने आज द्वितीय दिवस की कथा में कहा की पाँच महा पाप होते हैं इनका प्रायश्चित् नहीं है । ब्रह्म हत्या , किसी की भी हत्या नहीं करनी चाहिए, मगर ब्राह्मण की हत्या बिल्कुल नही करना चाहिए । किसी भी प्रकार का आभक्ष्य या पेय पदार्थ नही खाना पीना चाहिए, मगर शराब बिल्कुल नहीं पीना चाहिए। स्वर्ण चोरी, कोई भी चोरी नही करना चाहिए मगर स्वर्ण चोरी बिल्कुल नहीं करना चाहिए । व्यभिचार, किसी के भी साथ दुरव्यवहार नहीं करना चाहिए पर गुरु पत्नी गमन बिल्कुल नहीं करना चाहिए । पांचवा पाप ये जो चार पाप जो कर रहा उसका साथ देने वाला ये पांचवा पाप है । इसीलिए इस महापापों से वचना चाहिये । इन पापों से बचकर जो भगवान् का ध्यान, स्मरण करता है, उसी का उद्धार होता है।
भागवत कथा में शंकराचार्य जी महाराज का होगा आगमन
पूज्य अनन्त श्री विभूषित द्वारकाशारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य जी महाराज का आगमन शनिवार 04 मई की शाम 04 बजे होने जा रहा है। इस दौरान पूज्य शंकराचार्य जी महाराज के आशीर्वचन लाभ मिलेगा, आयोजक सुन्दर लाल दुबे जी ने समस्त क्षेत्र वासियों से अनुरोध किया है कि कथा में पहुँच कर धर्म लाभ लें ।Û





