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धर्ममध्यप्रदेशसिवनी

तपोनिष्ठ संत ब्रह्मचारी कैवल्यानन्द प्रयागराज में ब्रह्मलीन

सिवनी में ग्राम कमकासुर में जन्म लेकर सनातन धर्म सेवा में अग्रणी रहे
श्री राममंदिर सिवनी में स्थापित संस्कृत विद्यालय में अध्ययन किया

 Seoni 30 January 2025

सिवनी यशो:-धर्मसम्राट् अनंतश्री विभूषित ज्योतिष् एवं द्वारका- शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज के विरक्त वरिष्ठ प्रिय एवं परमशिष्य पूज्य श्री कैवल्यानन्द जी महाराज का आज प्रयागराज में सदा के लिये ब्रह्म में लीन हो गये । दिनांक 29 जनवरी 2025 बुधवार को प्रात: 9.45 पर कुम्भपर्व युक्त मौनी अमावस्या की अति उत्तम तिथि में प्रयागराज की सर्वोत्तम भूमि में मनकामेश्वर महादेव के सामीप्य आपने भौतिक शरीर छोड दिया। जैसे ही पूज्यपाद श्री ब्रह्मचारी जी के ब्रह्मलीन होने समाचार प्राप्त हुआ वैसे ही समस्त क्षेत्र में शोक की लहर व्याप्त हो गयी।

उक्ताशय की जानकारी देते हुये मातृधाम प्रभारी धर्मवीर अजित तिवारी ने बताया कि पूज्य ब्रह्मचारी जी बचपन से अपने पूज्य गुरुदेव के सान्निध्य में रहे और गुरु के साथ सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में सदा अग्रणी रहे। आपने बताया कि पूज्य ब्रह्मचारी जी विगत 5 दिसम्बर से पांच दिवसीय सिवनी प्रवास पर आये और आपके दिशा निर्देश में अपने ग्रह ग्राम कामकासुर में आपने अपने माता, पिता और गुरु के दिव्य विग्रह की स्थापना कर मातृदेवोभव, आचार्यदेवोभव और पितृदेवोभव का महान संदेश जनमानस को दिया था। सिवनी प्रवास के दौरान आप गुरुधाम,मातृधाम पधारे और? गुरुपरिवार के पारिवारिकजनों से मुलाकात की ।

इसके पश्चात् आप गीता जयंती पर अपने गुरुदेव की तपोस्थली श्री परमहंसी गंगा आश्रम झोंतेश्वर में भगवती राजराजेश्वरी त्रिपुर सुन्दरी के पाटोत्सव समारोह और गुरु समाधि मंदिर के लोकार्पण पर उपस्थित रहे। श्री कैवल्यानन्द? जी का जन्म ही सिवनी जिले के अंतर्गत ग्राम कामकासुर में 7 नवंबर सन 1949 मार्गकृष्ण पक्ष द्वितीया संवत् 2006 में कान्यकुब्ज उपमन्यु गोत्र ब्राह्मण परिवार में स्वर्गीय माता श्री फूलमती दुबे एवं पिता स्वर्गीय पं.मनीराम द्विवेदी जी के यहां हुआ। आप संस्कृत के मूर्धन्य विद्वान साहित्य वेदांत वाचस्पति साहित्याचार्य थे। आपने पूज्यपद जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज से सन् 1968 में श्रीविद्या की दीक्षित होकर गुरुचरणों में ही सम्पूर्ण जीवन समर्पित कर दिया।

आपने वेद- वेदांगों एवं सत्साहितों का अध्ययन किया। धर्मनिष्ठ,ब्रह्मनिष्ठ जान गुरु ने प्रसन्न होकर 14 अप्रैल 1974 को हरिद्वार कुंभ में आपको ब्रह्मचर्य की दीक्षा देकर कैवल्यानन्द नाम प्रदान किया। आप गुरुसेवा में तत्पर रहकर श्रीविद्या उपासना करते रहे और वैशाख शुक्ल तृतीया संवत 2058 सन 2009 ई. में आपको श्रीविद्या की पूर्णाभिषेक दीक्षा देकर कैवल्यानन्दनाथ: नाम दिया। आध्यात्मिक साधना एवं चिंतन का कार्य निरंतर करते रहे, गुरु आज्ञा से वनवासी क्षेत्र में जहां पर धर्मांतरण हो रहा था वैसे दुर्गम स्थान में अपने रहकर सनातन धर्म की रक्षा के लिए जनजागरण एवं धर्मजागरण अभियान चलाया। वनवासी क्षेत्र में स्थित झारखंड में काली कोकिला नदी के संगम में विश्व कल्याण आश्रम में निराश्रितों एवं आदिवासियों के मध्य रहकर सनातनधर्म का प्रचार किया और पूज्यपाद गुरुदेव भगवान की आज्ञा से स्वधर्मानयन अभियान चलाकर सनातन धर्मकी रक्षा की और यही स्थापित विश्व कल्याण आश्रम में अपना अधिकतर समय? व्यतीत किया। आपने संपूर्ण जीवन ही गुरु सेवा में समर्पित कर आप सदा गुरुभक्तों का मार्गदर्शन करते थे।आप श्रीविद्या के परमोपासक थे।

आपने कई श्रीविद्या के साथ -साथ अनेक सत्साहित्यों का प्रकाशन किया। प्रातर्मंगलम, गुरुपूजा पद्धति, सत्यानुसंधान और अनेक ग्रंथों की रचना कर साधकों को उपलब्ध कराया। पूज्यपाद जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद जी महाराज के अत्यंत प्रिय शिष्य रहे परमवीतराग, तपोनिष्ठ ब्रह्मचारी जी निश्चित ही दिव्यात्मा थे। महाकुंभ के महापर्व मौनी अमावस्या में प्रयागराज में ब्रह्मीभूत हो जाना यह सिद्ध करता है। आप सदा से ही सनातन धर्म के जनकल्याणकारी लोकोपकारी कार्य में सहभागी रहे और सदा श्रीविद्या की अधिष्ठात्री देवी श्री राजराजेश्वरी त्रिपुर सुंदरी का नित्य आराधना करते रहे। सम्पूर्ण जीवन ही आपका आदर्श रहा। आपके ब्रह्मलीन होना सनातन धर्म की अपूरणीय क्षति है।

अजीत तिवारी ने बताया कि कुंभपर्व के महापर्व मौनी अमावस्या में पूज्य श्री ब्रह्मचारी जी महाराज का पार्थिव शरीर प्रयागराज गंगा तट पर पंचतत्त्व में विलीन कर दिया गया। इस अवसर पर साधु-संत सहित गुरुभक्त उपस्थित रहे। पूज्य ब्रह्मचारी जी गुरुसेवा समर्पण का पावन स्मरण किया गया। पूज्य कैवल्यानन्द जी ब्रह्मचारी के ब्रह्मलीन होने पर आध्यात्मिक उत्थान मंडल, मातृधाम, गुरुधाम मंदिर समिति श्री बालाभवानी मंदिर गणेशगंज ने गुरुपरिवार और सिवनी जिले की अपूरणीय क्षति बताते हुये विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

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