सिवनी गुरु और गंगा की पावन भूमि है : ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी
श्रावण मास में श्री शिव महापुराण कथा का भव्य शुभारंभ, कलश यात्रा में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब
सिवनी में श्री शिव महापुराण कथा का शुभारंभ, ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूप जी बोले- सिवनी गुरु और गंगा की पावन भूमि है
Seoni 03 August 2026
सिवनी यशो:- श्रावण मास के पावन अवसर पर सिवनी शहर के स्मृति लॉन में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा का शुभारंभ सोमवार को भव्य शोभायात्रा एवं कलश यात्रा के साथ हुआ। धार्मिक उत्साह और आस्था के वातावरण में श्रद्धालुओं ने भगवान शिव की मनोहारी झांकी के दर्शन किए तथा कलश यात्रा में बड़ी संख्या में शामिल होकर पुण्य लाभ अर्जित किया। शोभायात्रा के पश्चात कथा स्थल पर विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर प्रथम दिवस की कथा का शुभारंभ हुआ।

बैनगंगा के उद्गम से जुड़ी सिवनी की आध्यात्मिक महिमा
कथा का रसपान कराते हुए पूज्यपाद ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती जी महाराज के प्रिय शिष्य, गीता पराभक्ति मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं गीता मनीषी ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज ने कहा कि सिवनी गुरु और गंगा की पावन भूमि है।
उन्होंने कहा कि यह भूमि ब्रह्मलीन गुरुदेव की जन्मभूमि होने के साथ-साथ पवित्र बैनगंगा के उद्गम की धरा भी है। बैनगंगा आगे चलकर गोदावरी में समाहित होकर इस क्षेत्र की आध्यात्मिक महिमा को और अधिक गौरवान्वित करती है।
ब्रह्मचारी जी ने कहा कि भगवान शिव को सभी मासों में श्रावण मास अत्यंत प्रिय है। इसलिए इस पवित्र काल में शिव महापुराण का श्रवण करना अत्यंत फलदायी और कल्याणकारी माना गया है।
शिव महापुराण श्रवण से होती है मन की शुद्धि
प्रथम दिवस की कथा में ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी ने प्रयागराज में महर्षि शौनक एवं सूत जी के संवाद का प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि महर्षि शौनक ने सूत जी से ऐसी कथा सुनाने का आग्रह किया था, जो समस्त शास्त्रों का सार हो और जिससे मनुष्य के जीवन में सदाचार, विवेक एवं आध्यात्मिक चेतना का विकास हो।
उन्होंने कहा कि कलियुग में मनुष्य की बुद्धि अनेक विकारों और आसुरी प्रवृत्तियों से प्रभावित हो जाती है। ऐसे समय में आत्मकल्याण और मन की शुद्धि का सर्वोत्तम मार्ग भगवान शिव की कथा का श्रवण है।
श्रद्धापूर्वक शिव महापुराण श्रवण से प्राप्त होती है शिव कृपा
ब्रह्मचारी श्री निर्विकल्प स्वरूप जी ने कहा कि सूत जी ने स्पष्ट किया है कि शिव महापुराण से श्रेष्ठ मन को पवित्र करने वाला अन्य कोई साधन नहीं है। विशेष रूप से कलियुग के जीवों के लिए श्रद्धा और भक्ति के साथ शिव महापुराण का श्रवण भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का सरल माध्यम है।
उन्होंने कहा कि अनेक जन्मों के पुण्य उदय होने पर ही मनुष्य के हृदय में शिव महापुराण कथा सुनने की भावना उत्पन्न होती है।
कथा में उमड़ा श्रद्धालुओं का जनसैलाब
श्री शिव महापुराण कथा के प्रथम दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। भक्तों ने भगवान शिव की महिमा का श्रवण कर आध्यात्मिक आनंद प्राप्त किया। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं से आगामी दिनों में भी नियमित रूप से कथा में उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आग्रह किया।
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