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चाणक्य और चंद्रगुप्त सी जोड़ी मोदी और शाह की –  मुनि समतासागर 

जब उनकी प्रेरणा से जी20 के आमंत्रण पर इंडिया के स्थान पर, भारत लिख कर विश्व के सभी राष्ट्र अध्यक्षों को भेजा गया – अमित शाह 

 प्रथम समाधी पुण्य तिथि पर डोंगर गढ़ पहुंचे गृह मंत्री 

Seoni 07 February 2025
 सिवनी यशो:- चंद्रगिरी जैन तीर्थ डोंगरगढ में संत शिरोमणी आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के प्रथम समाधि पुण्य स्मृति दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में पधारे भारत के यशस्वी गृह मंत्री माननीय श्री अमित शाह ने पूज्य निर्यापक श्रमण श्री समतासागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित समाधि स्मारक शिलान्यास एवं विनयांजलि सभा में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर निर्यापक श्रमण श्री समता सागर महाराज ने कहा कि यह देश भगवान राम के आदर्श,भगवान महावीर की अहिंसा,योगीराज श्री कृष्ण के गौ प्रेम, बुद्ध की करुणा और आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के राष्ट्र प्रेम से ओत प्रोत है।
     समाज और संप्रदायों से उठकर आचार्य श्री के विचार आध्यात्म स्तर पर कल्याणकारी,सामाजिक स्तर पर संगठन कारी एवं राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्र हितकारी थे। मैने इतिहास पढ़ा है जब भारत का स्तर गिरने लगा राजघराने विलासी और व्यसनाधीन होने लगे तो भारत के स्तर को सुधारने के लिए चाणक्य और चंद्रगुप्त मिले थे वर्तमान में भी इस देश की डगमगाती हुई नैया को संभालने के लिए वर्तमान भारत को चाणक्य और चंद्रगुप्त के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह जैसे व्यक्तित्व मिले जिन्होंने पूरे विश्व में भारत का परचम शान से लहरा दिया। भारत की आजादी के बाद भी खंड खंड भारत को अखंड बनाने का जो पुरूषार्थ उस समय के गृह मंत्री सरदार पटेल ने भारत को एक अखंड रूप में खड़ा करने का पुरुषार्थ किया था उसी तर्ज पर कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत को एक करने में धारा 370 एवं 35 ए को समाप्त कर भारत को अखंडता प्रदान करने का पुरुषार्थ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं गृह मंत्री अमित शाह ने किया वह सराहनीय है। अब कश्मीर से कन्या कुमारी एवं बंगाल से सोमनाथ तक तिरंगा शान से लहराता है।
    मुनि श्री ने कहा कि धर्म की रक्षा करते हुए आचार्य श्री का महा प्रयाण इस धरा पर हुआ यहां से ही आशीर्वाद लेकर प्रधानमंत्री जी आगे बढ़े थे और उन्होने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा था कि मैं अभी अभी देव तुल्य आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के दर्शन  करके आ रहा हूं।ऐसा आदर भाव उनके प्रति उनका था उनकी सरकार भारत को व्यसन मुक्ति का संदेश देकर स्वयं सात्विक जीवन जीकर वसुदेव कुटुम्बकम के भावना से सभी वर्ग के नागरिकों का हित कर रही है। इन सभी पुरुषार्थों में कही न कही आचार्य श्री की भावनाएं ही निहित है।
    गृह मंत्री श्री शाह ने आचार्य श्री के प्रति श्रद्धांजली व्यक्त करते हुए कहा कि आज मेरा सौभाग्य रहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की अंतिम साधना स्थली चंद्रगिरी डोंगरगढ में मुझे उनके समाधि के एक वर्ष बाद आने का अवसर प्राप्त हुआ। आचार्य श्री मात्र जैन संत नहीं बल्कि एक महान युग पुरूष युग दृष्टा थे।
     मुझे मेरे जीवन में अनेकों बार दर्शनों का सौभाग्य मिला हर बार उनका आग्रह रहता था कि हमारी भाषाओ का संरक्षण,संवर्धन होना चाहिए हमारी संस्कृति अक्षुण्ण रहनी चाहिए।भारतीयता का गौरव दिग दिगांतर तक फैलना चाहिए। भारत की पहचान इंडिया नही अपने मूल नाम भारत से होना चाहिए। पूरा विश्व अचंभे में पड़ गया जब जी 20की मेजबानी भारत कर रहा था और जब जी 20 का निमंत्रण विश्व भर के राष्ट्र अध्यक्षों को गया तो वहां प्राइम मिनिस्टर ऑफ इंडिया की जगह प्राइम मिनिस्टर ऑफ भारत लिख कर भेजा गया।माननीय प्रधान मंत्री नरेन्द्र जी मोदी ने आचार्य श्री के विचारो को बिना किसी राजनीति के एक क्षण में ही जमीन पर उतार कर उनके संदेश का अनुकरण करने का कार्य किया। इस मूल विचार के पीछे आंदोलन आचार्य श्री का ही था। अहिंसा परमो धर्म का सिद्धांत किसी की भी आलोचना किए बिना समग्र विश्व में आज समयानुकूल व्याख्या कर प्रस्थापित करने का कार्य आचार्य श्री का ही था।मुझे याद है पहली बार जब मैं उनसे जबलपुर में मिला था तो उन्होंने कहा था कि हमारे देश की भाषाई विविधता ही हमारी संस्कृति की सच्ची शक्ति है इस विषय को उन्होंने हम जैसे संसारी जीवो को समझाते हुए कहा था कि जैसे भोजन के थाल में जितने अधिक सुस्वादु व्यंजन होंगे थाल उतना ही स्वाद से समृद्ध होगा उसी प्रकार जिस देश के पास अनेक व अलग अलग भाषाएं,लिपियां,बोलियां,व्याकरण व गाथाएं होंगी वह देश सांस्कृतिक रूप से उतना ही अधिक समृद्ध शाली होगा।
आजादी के बाद देश और देश का शासन पाश्चात्य विचारों से प्रभावित होकर चलने लगा तब भारत को पकड़ कर रखने वाले वह एक मात्र आचार्य थे जिन्होंने भारत भारतीयता भारतीय संस्कृति हमारे धर्म और हमारी भाषाओं को पकड़कर रखा।आचार्य श्री केवल एक संत या जैन आचार्य ही नही थे एक प्रकार से वे एक युग पुरुष ही थे जिन्होंने एक नव विचार नव युग का प्रवर्तन किया ऐसा उनका जीवन काल था।उन्होंने धर्म के साथ साथ देश की पहचान को समग्र विश्व में व्याख्यायित करने का कार्य किया।
 उल्लेखनीय है कि मंचासीन होने के पूर्व  गृह मंत्री जी ने आचार्य श्री के समाधि स्मारक का शिलान्यास का  मांगलिक कार्य भी अपने कर कमलों से संपन्न किया। इस अवसर उन्होंने आचार्य श्री द्वारा लिखित अनेक ग्रंथ जिन्हे रजत, ताम्र एवं ताड़ पत्रों पर संरक्षित किया गया है उनका विमोचन साथ ही साथ वित्त मंत्रालय द्वारा ज़ारी आचार्य श्री के चित्र से समन्वित 100 रूपये मूल्य के सिक्के का एवं डाक विभाग द्वारा जारी विशेष आवरण का लोकार्पण किया गया।
    माननीय गृह मंत्री के साथ मंच पर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री व गृह मंत्री विजय शर्मा, वित्त मंत्री ओपी चौधरी, सासद संतोष पाण्डेय, राज्य सभा सांसद नवीन जैन आगरा एवं जैन जगत के भामाशाह अशोक पाटनी आर के मार्बल उपस्थित रहे।

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