80 लाख के भूखंड के बाद 31.21 लाख में मकान की रजिस्ट्री, पटवारी की संपत्तियों पर उठे सवाल
छिंदवाड़ा में पटवारी याचना सोनी की संपत्ति को लेकर नया मामला सामने आने का दावा; 2021 के मकान और 2025 के भूखंड के दस्तावेजों की जांच की मांग
छिंदवाड़ा पटवारी की संपत्तियों पर सवाल, मकान-भूखंड की जांच की मांग
Chhindwara 10 October 2026
छिंदवाड़ा यशो:- जिले में पटवारी याचना सोनी की संपत्ति को लेकर सवाल उठने का सिलसिला थम नहीं रहा है। खजरी हल्के में कथित अवैध कॉलोनी में लगभग 4,000 वर्गफुट का भूखंड खरीदे जाने के मामले में एसडीएम द्वारा नोटिस जारी कर जवाब मांगे जाने की जानकारी के बाद अब वर्ष 2021 में लोनियाकरबल की भायदे कॉलोनी में खरीदे गए मकान का मामला भी सामने आया है। उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, इस मकान की रजिस्ट्री 31 लाख 21 हजार रुपये में कराई गई थी, जबकि उसके सौदे का मूल्य लगभग 50 लाख रुपये बताया जा रहा है।
इन संपत्तियों की खरीद, वास्तविक बाजार मूल्य, आय के स्रोत और विभागीय अनुमति से जुड़े पहलुओं की जांच की मांग उठ रही है। सवाल यह है कि संपत्तियों की खरीद में कितना धन खर्च हुआ, भुगतान का स्रोत क्या था और संबंधित नियमों के तहत विभाग को सूचना या अनुमति दी गई थी या नहीं? इन बिंदुओं पर आधिकारिक दस्तावेजों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
2021 में मकान की रजिस्ट्री, 2025 में भूखंड की खरीदी
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, पटवारी याचना सोनी ने 29 जून 2021 को लोनियाकरबल स्थित भायदे कॉलोनी में मकान खरीदा था। इसके लिए ई-पंजीयन क्रमांक MP078202021A1498278 का उल्लेख किया गया है। बताया गया है कि मकान का सौदा करीब 50 लाख रुपये में हुआ, जबकि रजिस्ट्री 31 लाख 21 हजार रुपये में कराई गई। वास्तविक सौदा मूल्य, भुगतान और रजिस्ट्री में दर्ज मूल्य की पुष्टि संबंधित पंजीयन दस्तावेजों से की जानी चाहिए।
इसके बाद 4 नवंबर 2025 को खजरी हल्के में लगभग 4,000 वर्गफुट के भूखंड की खरीदी का विवरण सामने आया है। उपलब्ध जानकारी में ई-पंजीयन क्रमांक MP54IGR17052025A100992556 दर्ज है। भूखंड की रजिस्ट्री कीमत लगभग 25 लाख रुपये बताई गई है, जबकि स्थानीय बाजार के अनुमान के आधार पर इसकी कीमत करीब 80 लाख रुपये होने का दावा किया जा रहा है। बाजार मूल्य और रजिस्ट्री मूल्य में अंतर अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है, लेकिन संपत्ति के वास्तविक मूल्य, भुगतान और लेन-देन की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
2018 में भर्ती, वेतन और संपत्तियों के स्रोत पर सवाल
उपलब्ध विभागीय जानकारी के अनुसार, याचना सोनी की पटवारी पद पर नियुक्ति 6 अगस्त 2018 को हुई थी। उनका वर्तमान मासिक वेतन लगभग 44 हजार रुपये बताया गया है। खबर के लिए उपलब्ध विवरण में वर्ष 2018 से अब तक के वेतन की कुल राशि लगभग 34 लाख रुपये आंकी गई है।
हालांकि, वेतन की कुल राशि और किसी व्यक्ति की कुल संपत्ति की सीधे तुलना करके आय से अधिक संपत्ति का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसके लिए अन्य वैध आय, पारिवारिक संपत्ति, बैंक ऋण, संपत्ति की खरीद में किए गए वास्तविक भुगतान, देनदारियों और संबंधित अवधि के खर्च का भी परीक्षण आवश्यक है।
फिर भी, सामने आए संपत्ति संबंधी विवरणों के बाद यह जांच का विषय है कि दोनों संपत्तियां किन वित्तीय स्रोतों से खरीदी गईं, क्या बैंक ऋण लिया गया और यदि लिया गया तो उसकी राशि तथा किस्तों का भुगतान किस प्रकार किया जा रहा है। संपत्ति खरीद के संबंध में लागू सेवा नियमों के तहत विभाग को सूचना या पूर्व अनुमति आवश्यक थी या नहीं, इसकी भी पुष्टि की जानी चाहिए।
अवैध कॉलोनी और विभागीय भूमिका की भी हो जांच
खजरी हल्के में जिस कॉलोनी को अवैध बताया जा रहा है, उसकी वैधानिक स्थिति, भूखंड की अनुमति, भूमि उपयोग और संबंधित विभागीय अभिलेखों की जांच जरूरी है। यदि कॉलोनी के संबंध में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका भी निर्धारित की जानी चाहिए।
पटवारी के कार्यक्षेत्र में राजस्व संबंधी कामकाज को लेकर स्थानीय स्तर पर शिकायतें होने के आरोप भी लगाए गए हैं। इन शिकायतों की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं किसी व्यक्ति को अनुचित लाभ पहुंचाने, काम में अनावश्यक देरी करने या अवैध गतिविधियों की अनदेखी करने जैसी कोई अनियमितता तो नहीं हुई।
प्रशासन से जांच और स्पष्ट जवाब की अपेक्षा
मामले में प्रशासन के सामने प्रमुख सवाल हैं—दोनों संपत्तियों की वास्तविक खरीद कीमत क्या थी? भुगतान किन स्रोतों से किया गया? क्या संपत्ति खरीद की सूचना या आवश्यक अनुमति विभाग को दी गई थी? खजरी के भूखंड की कॉलोनी की स्थिति क्या है? और क्या संबंधित पटवारी की ज्ञात आय, संपत्तियों तथा देनदारियों का नियमानुसार परीक्षण किया गया है?
इन सवालों का जवाब अनुमान या आरोपों से नहीं, बल्कि पंजीयन दस्तावेजों, बैंक संबंधी अभिलेखों, आयकर विवरण, विभागीय रिकॉर्ड और निष्पक्ष जांच से सामने आना चाहिए। यदि जांच में आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति या सेवा नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
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