कचरे से बनायें खाद, कार्यशाला संपन्न

Seoni 06 february 2025
सिवनी यशो:- 4 फरवरी 2025 एवं 5 फरवरी 2025 को प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ़ एक्सीलेंस की इको क्लब इकाई द्वारा प्रचार्य डॉ. रवि शंकर नाग के संरक्षण एवं इको क्लब प्रभारी डॉ पूनम अहिरवार के मार्गदर्शन में “वर्मी कम्पोस्टिंग एवं पोल्ट्री वेस्ट मैनेजमेंट” विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया इस अवसर पर सर्वप्रथम डॉ. मनीष शेन्डे संचालक, पशुपालन विभाग, सिवनी, म. प्र. एवं डॉ. के. के. देशमुख साइंटिस्ट कृषि विज्ञान केंद्र सिवनी म. प्र. अतिथि व्याख्याता के रूप में उपस्थित हुए। कार्यशाला में अतिथि व्याख्याता के रूप में आए डॉक्टर के के देशमुख ने विद्यार्थियों को वर्मी कंपोस्टिंग विषय पर व्याख्यान देते हुए बताया कि वर्मी कंपोस्टिंग न केवल जैविक कृषि को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण कदम हैं बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक सार्थक पहल हैं। वर्मी कम्पोस्टिंग के माध्यम से हम दैनिक जीवन से निकलने वाले कचरे का पुनर्चक्रण कर उपजाऊ खाद तैयार कर सकते है। यह परियोजना विद्यार्थियों को जैविक खेती और सतत विकास के महत्व को समझने में सहायक सिद्ध होगी
। इसके उपरांत पशुपालन विभाग से पधारे अतिथि व्याख्याता डॉ मनीष शिंदे ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि पहले ऐसा माना जाता था, कि विज्ञान पश्चिमी देशों की देन है परन्तु ऐसा नहीं है हमारी बरसो पुरानी भारतीय संस्कृति में विज्ञान समाहित हैं, हमारे हर रिवाज में विज्ञान छुपा हुआ हैं, भारतीय ज्ञान परंपरा का उद्देश्य भी यही है कि हमारे स्वदेशी विज्ञान को समाज के सामने लाना, और समाज के हर नागरिक का उससे परिचय कराना।
अपने व्याख्यान में उन्होंने बताया कि पोल्ट्री फार्म से निकलने वाले वेस्ट मटेरियल को प्रक्रिया करके जैविक खाद में बदला जा सकता है जो नाइट्रोजन से भरपूर होती है यह पौधों की पैदावार को नेचुरल तरीके से बढ़ाने में सहायक है इससे न केवल पैदावार को बढ़ाया जा सकता है बल्कि यह विधि जैविक कृषि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है यह खाद मिट्टी की उर्वरता को बढ़ाने और रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने का एक प्राकृतिक तरीका हैं यह 100% जैविक और पर्यावरण के अनुकूल होता है तथा जलवायु परिवर्तन को नियंत्रित करने में मदद करता हैं। यह कचरे के पुनर्चक्रण करके प्रदूषण को कम करने का अच्छा माध्यम है।
इसके उपरांत कार्यक्रम संयोजक डॉ.पूनम अहिरवार ने वर्मी कम्पोस्टिंग के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि वर्मी कम्पोस्टिंग एक ऐसी जैविक प्रक्रिया है जिसमें केंचुए की सहायता से जैविक कचरे को उच्च गुणवत्ता वाली खाद में बदला जाता हैं। उन्होंने वर्मी कम्पोस्टिंग के लाभ तथा आवश्यकता पर भी विस्तृत जानकारी दी। कार्यक्रम का मंच संचालन एवं आभार प्राणी शास्त्र विभाग के विभाग अध्यक्ष डॉ. राधेश्याम डहेरिया द्वारा किया गया ।विद्यार्थियों को आर्द्रभूमि संरक्षित रखने हेतु शपथ भी दिलाई गई।
कार्यक्रम में इको क्लब प्रभारी प्रो. के.के. बरमैया, सह-प्रभारी डॉ. पूनम अहिरवार सहित प्राणी शास्त्र विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ राधेश्याम डहेरिया, डॉ. संदीप शुक्ला, डाॅ टी.पी. सागर, श्रीमती मनीषा सोनेकर एवं श्री धनेंद्र कुमार गुरडेकर उपस्थित रहे।




