टेल क्षेत्र के किसानों के लिए सुविधाजनक सिंचाई कार्ययोजना लागू : संजय सरोवर परियोजना
पलेवा एक पानी की व्यवस्था से लोकल गेहूं और बीदर की बुआई संभव, टेल क्षेत्र में सिंचाई की समस्या का
सिवनी, 12 सितम्बर 2025:
संजय सरोवर परियोजना के तिलवारा बांयी तट नहर संभाग केवलारी के अंतर्गत सिंचाई सुधार के लिए नई कार्ययोजना तैयार की गई है। कार्यपालन यंत्री पी एन नाग ने बताया कि परियोजना की नहरें लगभग 35-40 वर्ष पुरानी हैं और उनका मूल सी.सी.ए. मात्र 32,610 हेक्टेयर था। वर्तमान में सिंचाई का रकबा बढ़कर 75,800 हेक्टेयर हो चुका है, जिसमें किसानों द्वारा हाईब्रिड गेहूं और मक्का की बुआई की जाती है।
उन्होंने बताया कि नहरों की वर्तमान क्षमता केवल बहाव (कोलावा) सिंचाई के लिए पर्याप्त है, जबकि किसानों द्वारा उगाई जाने वाली फसलों को 4-8 पानी की आवश्यकता होती है। हेड क्षेत्र के किसानों द्वारा नहर जल द्वार खोलने और अड़ावा लगाने से टेल क्षेत्र में पानी समय पर नहीं पहुंच पाता। इसके तकनीकी कारणों में सीपेज, सिल्टिंग, कटाव और नहरों का क्षतिग्रस्त होना शामिल है।
समस्या के समाधान के लिए संजय सरोवर परियोजना का ई.आर.एम. 332.56 करोड़ का प्रस्ताव केंद्रीय जल आयोग से स्वीकृत हो चुका है और टेंडर भी लग चुके हैं। शीघ्र ही कार्य प्रारंभ किया जाएगा।
टेल क्षेत्र के ग्रामों में पलेवा एक पानी की व्यवस्था:
टेल क्षेत्र और मुरम वाली हल्की जमीन वाले ग्रामों में पलेवा एक पानी देकर स्थानीय गेहूं और बीदर (चना, तिवड़ा, मशहूर, अलसी, मटर, सरसों आदि) की बुआई की जाएगी। इससे किसानों को कम पानी में पकने वाली फसलें उगाने में मदद मिलेगी।
प्रमुख ग्राम:
अलोनीखापा, भादूटोला, पीपरदौन, झोला, कुम्हड़ा, बगलई, डोकररांजी, जामुनपानी, मुनगापार, खैरी, मलारी, बिनेकी, कोहका, कछारी, मैरा, मैनापिपरिया।
थांवर नदी के पास के किसान:
पोंगार और सरई के किसान विद्युत मोटर पंपों से थांवर नदी से सिंचाई करेंगे। उपरोक्त अस्थायी प्रावधान नहरों की लाईनिंग तक लागू रहेगा।
श्री नाग ने किसानों से अनुरोध किया कि वे केवल निर्धारित फसलों की बुआई करें, जिससे नहरों की सुरक्षा बनी रहे और टेल क्षेत्र में सिंचाई की समस्या हल हो।



