सिवनी के 13 मिलर्स पर आपराधिक मामला दर्ज, गरीबों दें रहे थे जहर

सिवनी में बड़ा खाद्यान्न घोटाला उजागर: घटिया चावल को बताया ‘मानक’, 13 मिलर्स और 2 निरीक्षक दोषी करार
सरकारी गोदामों में गरीबों के हिस्से का ‘जहरीला चावल’, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ की जांच में फूटा घोटाले का बम
सिवनी, मध्यप्रदेश | विशेष संवाददाता, दैनिक यशोन्नति
Seoni 15 June 2025
सिवनी यशो :- सिवनी जिले में वर्ष 2018 से दबे एक खाद्यान्न घोटाले का अब भंडाफोड़ हो गया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) जबलपुर इकाई ने सिवनी में 13 राइस मिलर्स और मध्यप्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन के दो गुणवत्ता निरीक्षकों के खिलाफ आपराधिक षड्यंत्र, धोखाधड़ी और मिलावट के संगीन आरोपों में FIR दर्ज की है।
घोटाले की जांच IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 272 (मिलावट), 120बी (षड्यंत्र) और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत की जा रही है।
घोटाले का प्रारंभ: 2018 में बोया गया विश्वासघात का बीज
जांच में सामने आया है कि वर्ष 2018 में सिवनी के कुछ चावल मिलर्स ने शासकीय धान का चावल तैयार करते समय निम्न गुणवत्ता वाले (घटिया) चावल को “मानक चावल” बताकर सरकारी गोदामों में जमा करवा दिया। इस पूरे षड्यंत्र में दो गुणवत्ता निरीक्षक—जगदीश गिरी गोस्वामी और विनय पाण्डेय शामिल रहे, जिन्होंने जानबूझकर इस चावल को “मानक अनुरूप” घोषित किया।
यह चावल बाद में PDS (सार्वजनिक वितरण प्रणाली) के जरिए आम जनता विशेषकर गरीब परिवारों में बांटा जाना था।
EOW की जांच में ये राइस मिल्स आए जांच के घेरे में:
- प्रो. अकबर राइस मिल
- प्रो. आर्यन राइस मिल
- प्रो. लक्ष्मी राइस इंडस्ट्रीज, वारापत्थर
- प्रो. माँ दुर्गा शक्ति राइस मिल, गोकलपुर
- मेसर्स लक्ष्मी राइस इंडस्ट्रीज, चिड़िया पलारी
- प्रो. श्री राइस मिल, भौमा
- प्रो. शुभम राइस एंड परबॉयलिंग उद्योग, तिगरा
- स्वास्तिक राइस मिल
- प्रो. त्रियंबक राइस मिल, कटिया
- प्रो. व्योम राइस मिल
- प्रो. यश उद्योग
- (अन्य दो गुणवत्ता निरीक्षक)
कैसे हुआ खुलासा?
यह मामला EOW को भोपाल मुख्यालय पर एक गुप्त शिकायत के माध्यम से ज्ञात हुआ। इस पर EOW जबलपुर इकाई ने कार्रवाई शुरू की और क्षेत्रीय गुणवत्ता निरीक्षक दल की रिपोर्ट से पुख्ता साक्ष्य मिले कि:
- चावल की गुणवत्ता जानबूझकर गलत रिपोर्ट की गई।
- सरकारी गोदामों में गरीबों को बांटने योग्य चावल की जगह अस्वीकृत/घटिया चावल जमा किया गया।
- शासन को आर्थिक हानि पहुंचाई गई और राइस मिलर्स को अवैध लाभ मिला।
कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज
FIR में निम्न कानूनी धाराएं लगाई गई हैं:
- IPC 420 – धोखाधड़ी और जालसाजी
- IPC 272 – मिलावटी खाद्य पदार्थ का वितरण
- IPC 120B – आपराधिक षड्यंत्र
- Essential Commodities Act 3/7 – आवश्यक वस्तुओं के दुरुपयोग के लिए दंड
सरकारी प्रतिक्रिया और अगली कार्रवाई
राज्य सरकार ने मामले को गंभीर अपराध मानते हुए जांच के आदेश दिए हैं।
EOW सूत्रों के अनुसार, इस मामले में जल्द ही कई लोगों की गिरफ्तारी संभव है, साथ ही दोषी मिलर्स के लाइसेंस निरस्त कर ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
जनता का आक्रोश
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों ने इस घोटाले को “गरीबों की थाली में ज़हर परोसने जैसा अपराध” बताया है। जनदबाव के चलते अब यह मांग उठ रही है कि सिर्फ मिलर्स नहीं, बल्कि सिविल सप्लाई कार्पोरेशन के उच्चाधिकारियों की भी जांच होनी चाहिए जिन्होंने चुप्पी साधी।
संक्षेप में:
| बिंदु | विवरण |
|---|---|
| स्थान | सिवनी, मध्यप्रदेश |
| घोटाले की अवधि | वर्ष 2018 |
| FIR में आरोपी | 13 राइस मिलर्स + 2 गुणवत्ता निरीक्षक |
| धाराएं | IPC 420, 272, 120B, EC Act 3/7 |
| घटिया चावल की मात्रा | हज़ारों क्विंटल (सटीक आंकड़ा जांच में) |
| चावल का उद्देश्य | PDS के तहत वितरण |



