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मनरेगा में खुला ‘कट–कमीशन का खेल’ : दिग्विजय सिंह बने ग्राउंड रिपोर्टर, टिकारी में सिस्टम की पोल

परासपानी (कर्माझिरी) में मनरेगा बचाओ संग्राम | मजदूर बोले– ₹250 की जगह ₹150, चार माह से भुगतान बंद

 मनरेगा में खुला ‘कट–कमीशन का खेल’ : दिग्विजय सिंह बने ग्राउंड रिपोर्टर, टिकारी में सिस्टम की पोल

मनरेगा बचाओ संग्राम के दौरान टिकारी गांव में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह खुद कैमरा थामे ग्राउंड रिपोर्टर बने। सरपंच-मेट के इंटरव्यू में ₹250 की जगह ₹150 मजदूरी, 10% कमीशन और चार माह से भुगतान बंद होने के आरोप सामने आए। कुरई जनपद में भ्रष्टाचार की परतें खुलती नजर आईं।

सिवनी यशो :- कुरई जनपद | टिकारी ग्राम — ग्राम पंचायत परासपानी (कर्माझिरी) के ग्राम टिकारी में
मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सदस्य
माननीय दिग्विजय सिंह (राजा साहब) का आगमन हुआ।

इस अवसर पर उन्होंने मनरेगा के अंतर्गत चल रहे कार्यों का
स्थल निरीक्षण किया और मजदूरों, सरपंच व मेट से
पत्रकार अंदाज में सवाल-जवाब किए।

 वीडियो में खुली मनरेगा की सच्चाई

केवलारी विधायक ठाकुर रजनीश सिंह द्वारा फेसबुक पर साझा किए गए
वीडियो और फोटो में दिग्विजय सिंह कैमरा थामे
एक खोजी पत्रकार की भूमिका में नजर आते हैं।

वे मौके पर मौजूद सरपंच विजय उईके और
मेट अमित से सीधे सवाल करते हैं।

 ₹250 की जगह ₹150, कमीशन के बिना काम नहीं

वीडियो में सामने आया कि मनरेगा के तहत
एक किलोमीटर ट्रेंच (नाली) निर्माण किया जा रहा है,
लेकिन मजदूरों को निर्धारित मजदूरी
₹250 की जगह मात्र ₹150 का भुगतान किया जा रहा है।

सरपंच विजय उईके ने आरोप लगाया कि—

काम देने से पहले जनपद स्तर पर 10 प्रतिशत कमीशन मांगा जाता है,
न देने पर काम नहीं मिलता।

नियमों के खिलाफ मजदूरी कटौती

मेट अमित ने बताया कि—

  • मनरेगा में मूल्यांकन (Measurement) का नियम नहीं है
  • फिर भी उपमंत्री काम कम बताकर मजदूरी काट लेते हैं
  • मजदूरों को पिछले चार माह से भुगतान नहीं हुआ

जब दिग्विजय सिंह ने सवाल किया—
“मनरेगा में मूल्यांकन का प्रावधान नहीं, फिर कटौती कैसे?”
तो जवाब मिला—

काम कम बताकर मजदूरी काट ली जाती है।

 मजदूर पलायन को मजबूर

कम मजदूरी, समय पर भुगतान न होने और कटौती से परेशान मजदूर
गांव छोड़कर पलायन कर रहे हैं।
स्थिति यह है कि अब गांवों में
मनरेगा के लिए मजदूर मिलना मुश्किल हो गया है।

दिग्विजय सिंह का तीखा संदेश

मनरेगा गरीब और श्रमिक वर्ग के अधिकारों से जुड़ी योजना है।
इसके नाम, नियम और उद्देश्य से कोई समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उन्होंने मनरेगा का नाम बदलकर
‘जी-राम-जी योजना’ किए जाने पर भी सवाल उठाए।

बड़ा सवाल

क्या कुरई जनपद में मनरेगा
रोजगार योजना नहीं,
कट–कमीशन योजना बन चुकी है?

अब देखना होगा कि
प्रशासन इस वीडियो के बाद क्या कार्रवाई करता है।

Dainikyashonnati

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