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हनुमान जी की भक्ति से भरे सुंदरकांड का पाठ करने उमड़ रहे श्रद्धालुजन

सिवनी यशो:- श्रद्धा, भक्ति, आस्था और उपासना के केंद्र के रूप में जन जन के आकर्षण का केंद्र बने हुए बाल रूप हनुमान मंदिर में सावन के इस माह में सुंदरकांड की मनमोहक, भव्य और संगीतमय प्रस्तुति लोगों के मन में भक्ति का नया भाव जागृत कर रही है। लोगों का अटूट विश्वास उनकी सारी मनोकामनाएं भी पूरी कर रहा है संभवत है इसी विश्वास के चलते नगर ही नहीं अपितु जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए भक्तगण भी बढ़-चढ़कर सुंदरकांड पाठ के साथ ही प्रात:काल होने वाले अभिषेक में भी बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं।
“सियावर रामचंद्र की जय” के उद्घोष के साथ ही पाठ प्रारंभ होने के पूर्व ही भक्तगणों में उत्साह, उमंग, विश्वास, भक्ति और समर्पण का भाव जागृत कर देता है। श्री बालरूप हनुमान मंदिर में सभी आस्था रखने वाले निष्ठावान श्रद्धालु प्रभु श्री जी की शरणागति और आशीर्वाद पाने हेतु सावन के पवित्र माह में गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित सुंदरकांड का पाठ करने के लिए नियम से रात्रि 8:00 बजे उपस्थित हो रहैं हैं।
मंदिर के पुजारी जी द्वारा सुंदरकांड के पाठ का महत्व बताते हुए कहा गया कि बल,बुद्धि, कृपा,सुख समृद्धि, स्वास्थ्य लाभ बढ़ाने के लिए यह पाठ अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो रहा। यहां विराजे चमत्कारिक मंशापूर्ण बाल रूप हनुमान जी के आशीर्वाद से भक्तगणों के मनोरथ पूरे हो रहे हैं।
पुजारी जी द्वारा कहा गया कि, प्रभु श्रीराम के भक्तशिरोमणि हनुमान जी जल्द प्रसन्न होने वाले देवता हैं। सुंदरकांड का पाठ करने से स्वयं, परिजनों,तथा स्नेहीजनों के जीवन में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहैं हैं । भक्तों की एकाग्रता और आत्मविश्वास में वृद्धि हो रही है।
पुजारी जी द्वारा कहा गया कि, हनुमान जी की सेवा में समर्पित, श्री बाल रूप हनुमान मंदिर समिति, के समयदानी सेवकों सुंदरकांड पाठ मे शामिल श्रद्धालुओं के कंठ में मां सरस्वतीजी की कृपा विराजती है। यही कारण है कि लोग इसके आकर्षण में बंधे हुए इस आयोजन में शामिल होने बरबस ही चले आते हैं।
मंदिर समिति द्वारा सभी ग्राम तथा नगर वासियों से आग्रह करते हुए कहा गया कि, कि आप सभी धार्मिक लाभ पाए और इसे दूसरों को बांटे, बढा़ए तथा प्रसार करें। मंदिर में प्रतिदिन सुंदरकांड के संगीतमय पाठ व आरती के बाद भक्तों द्वारा प्रभु श्री को अर्पित भांति भांति के विविध व्यंजनों के रूप में फल और मिष्ठानों के साथ प्रसाद का वितरण किया जा रहा है।

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