स्वदेशी मेला: एकल सुरताल का दिव्य मंचन और मर्दानी खेल में अद्भुत शौर्य प्रदर्शन
Balaghat 23 November 2025
बालाघाट यशो:- स्वदेशी जागरण मंच, स्वावलंबी भारत अभियान और स्वर्णिम भारत वर्ष फाउंडेशन के संयुक्त आव्हान पर नगर के शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय खेल प्रांगण में आयोजित 10 दिवसीय स्वदेशी मेला (15 से 25 नवंबर) अपार जनसमुदाय के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। प्रतिदिन दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक हो रहे इस मेले में कला, संस्कृति, खेल और स्वदेशी उत्पादों की अद्भुत झलक देखने मिल रही है।
एकल सुरताल-वनवासी राम कार्यक्रम ने बांधा समां
कार्यक्रम की श्रृंखला में कल प्रस्तुत किए गए एकल सुरताल – वनवासी राम कार्यक्रम ने दर्शकों को आध्यात्मिक भाव, लोक कला और सांस्कृतिक वैभव में डूबो दिया। मंचन में भारतीय सभ्यता, लोक संस्कृति और राम वनवासी जीवन की भावनात्मक प्रस्तुति ने अपार सराहना पाई।

मर्दानी खेल में शौर्य, पराक्रम और रोमांच का प्रदर्शन
महाराष्ट्र के खिलाड़ियों द्वारा प्रस्तुत मर्दानी खेल ने रोमांच, साहस और अद्भुत शूरवीरता का प्रदर्शन किया। तेज गति, वीर मुद्रा और युद्ध कौशल की जीवंत प्रस्तुति ने दर्शकों को दांतों तले उंगलियां दबाने को मजबूर कर दिया। वातावरण गगनभेदी जयघोषों से गुंजायमान हो उठा।

जनजातीय कला, स्वदेशी उत्पाद और लोक-संस्कृति का अद्भुत उत्सव
मेले में लोक संस्कृति, जनजातीय कला, हस्तशिल्प, खेल, चित्र प्रदर्शनी और पारंपरिक स्वदेशी व्यंजन की अलौकिक प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। स्वदेशी उत्पादों की बिक्री के साथ ‘वोकल फॉर लोकल से ग्लोबल’ का संदेश भी प्रभावशाली रूप से प्रसारित किया जा रहा है।
आज होगा कुश्ती मुकाबला, शाम को लोकनृत्य
आज सुबह 11 बजे से स्वदेशी कुश्ती प्रतियोगिता में जिले के पहलवान दमखम दिखाएंगे। शाम 7 बजे से पारंपरिक सामूहिक लोकनृत्य और स्वदेशी लोककला संस्कृति मंचन होगा। मर्दानी खेल की झांकी आज भी पुनः प्रस्तुत की जाएगी।

स्वदेशी चेतना और आत्मनिर्भर भारत का संदेश
मौसम बिसेन स्वदेशी मेला संयोजक ने कहा —
“जब भी बाजार जाएंगे, सामान स्वदेशी लाएंगे। यही भाव स्वावलंबन को बढ़ाएगा और भारत को आत्मनिर्भर बनाएगा।”
इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने भी वोकल फॉर लोकल, आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में मौसम बिसेन,
सत्यनारायण अग्रवाल,
प्रणव पटेल,
यज्ञेश चावड़ा,
हेमेंद्र क्षीरसागर
सहित सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का उल्लेखनीय योगदान रहा।
मंच संचालन सुधीर गुड्डू चौधरी ने किया।
स्वदेशी चेतना, सामूहिक सहभागिता और
लोक संस्कृति का यह अनूठा उत्सव बालाघाट में नए संकल्पों की प्रेरणा बन रहा है।





