क्राइमछिंदवाड़ा

फर्जी सीबीआई ने डीपीसी से ठग लिये एक लाख तीस हजार

 

छिंदवाड़ा यशो:- गत अप्रैल को मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में सीबीआई की धौंस देकर ठगों ने सर्व शिक्षा अभियान के जिला परियोजना समन्वयक को लाखों की चपत लगा दी। परियोजना समन्वयक का पुत्र इंदौर में रहता है उसे पकड़ लिया है कहकर ठग ने फर्जी सीबीआई ऑफिसर बनकर डीपीसी से फोन पर संपर्क किया और रूपये की मांग की । डीपीसी ने इंक्वायरी किए बिना ठगों को 1 लाख 30 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए। अब डीपीसी ने साइबर सेल और कोतवाली थाने में अपने साथ हुए फर्जीवाड़े की लिखित शिकायत की है। पुलिस ने अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया है। टीआई उमेश गोल्हानी ने बताया कि डीपीसी जेके इरपाची ने शिकायत की है कि 17 अप्रैल को उनके मोबाइल पर एक फोन आया था। सामने वाले शख्स ने अपने आप को सीबीआई से बताते हुए कहा कि इंदौर में रह रहे उनके बेटे को किसी केस में पकड़ा गया है। छोडऩे के एवज में उसने रुपए की मांग की। उसने एक क्यूआर कोड भेजा। क्यूआर कोड पर उन्होंने 80 हजार रुपए और परिचित विनोद जैन के माध्यम से 30 हजार और 20 हजार रुपए ट्रांसफर कराए है। बाद में जब उन्होंने बेटे से फोन पर बात की तो मामला ठगी का निकला। बेटा अपने रूम में था। डीपीसी जेके इरपाची की शिकायत पर अज्ञात आरोपी के खिलाफ धारा 420 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस ने बताया कि ठगों के हौसले इतने बुलंद हैं कि डीपीसी ने जब उसी नम्बर पर दोबारा कॉल किया और एफआईआर कराने की धमकी दी तो ठग ने सात दिनों में पैसा वापस करने का आश्वासन भी दिया था। जब ठग ने रुपए नहीं लौटाए तब मामला पुलिस तक पहुंचा। 

 ऑनलाइन ठगी और इस तरह की वारदातों के लिए संस्थाएं लगातार लोगों को जागरुक कर रही है। इसके बावजूद लोग इस तरह ठगी का शिकार हो रहे है। बड़ा सवाल यह है कि दूसरों को शिक्षा और जागरुकता का जिम्मा संभाल रहे शिक्षा अधिकारी भी इस तरह की वारदातों के घेरे में फंस रहे है। डीपीसी के साथ हुई घटना के बाद कहा जा रहा है कि वे ठग की धौंस पर भरोसा करने के बजाए अपने बेटे की पतासाजी कर लेते या पुलिस को सूचना देते तो बच सकते थे।

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