मंडलामध्यप्रदेशसिवनी

नरवाई जलाने पर प्रतिबंध से किसानों में आक्रोश — मंडला, सिवनी और छिंदवाड़ा में ट्रैक्टर रैली, हाईवे जाम

किसानों ने कहा—पराली नहीं जलाएंगे तो रबी फसल की बुवाई ठप पड़ जाएगी

मंडला / सिवनी 0 2 नवंबर 2025
मंडला यशो:- पराली (नरवाई) जलाने पर सख्त प्रतिबंध और किसानों पर एफआईआर दर्ज किए जाने के विरोध में मंडला में जहां किसानों हाईवे जाम कर दिया वहीं सिवनी, छिंदवाड़ा समेत पूरे महाकौशल अंचल के किसान सड़कों पर उतर आए हैं।

शुक्रवार को मंडला जिले में सैकड़ों किसानों ने जबलपुर–रायपुर नेशनल हाईवे-30 पर 300 से अधिक ट्रैक्टरों के काफिले के साथ जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने प्रशासनिक नीतियों को अव्यवहारिक बताते हुए प्रतिबंध में ढील और वैकल्पिक व्यवस्था की मांग की।

 300 ट्रैक्टरों का काफिला, 10 किमी लंबा जाम

सुबह से ही मंडला, बिछिया, निवास और आसपास के ग्रामीण इलाकों के किसान ट्रैक्टरों के साथ शहर की ओर निकल पड़े। रैली नेशनल हाईवे-30 पर पहुंची तो वाहनों की करीब 10 किलोमीटर लंबी कतार लग गई। किसानों ने तीन घंटे तक हाईवे जाम रखकर प्रशासन को चेताया कि यदि नरवाई जलाने पर लगे प्रतिबंध को वापस नहीं लिया गया, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।

 “पराली नहीं जलाएंगे तो रबी की फसल नहीं बो पाएंगे” — किसान 

किसानो ने कहा — “प्रशासन द्वारा नरवाई जलाने पर लगाए गए प्रतिबंध से हम बेहद परेशान हैं। पराली को खेत से हटाने में मजदूर और ट्रैक्टर का खर्च दोगुना हो गया है। यदि समय पर खेत तैयार नहीं हुए तो गेहूं की बुवाई असंभव होगी। ऊपर से एफआईआर और किसान सम्मान निधि रोकने की चेतावनी दी जा रही है — यह हमारे साथ अन्याय है।”

किसानों की 9 सूत्रीय मांगें — प्रतिबंध में ढील, वैकल्पिक साधन, और समर्थन मूल्य की गारंटी

किसानों ने जिला कलेक्टर को 9 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा, जिसमें नरवाई जलाने पर प्रतिबंध में ढील देने या वैकल्पिक व्यवस्था (मशीनरी, दवा, तकनीकी सहयोग) की मांग की गई। साथ ही, मक्का के समर्थन मूल्य ₹2400 प्रति क्विंटल पर खरीदी सुनिश्चित करने की भी मांग रखी गई।

प्रशासन ने दिया आश्वासन, मंडला में फिलहाल कानून शिथिल

अपर कलेक्टर राजेन्द्र सिंह ने कहा कि किसानों की सभी मांगों को उच्च प्रशासन तक भेजा जाएगा और फिलहाल जिले में नरवाई जलाने पर लागू प्रतिबंध को “शिथिल” किया जा रहा है।

सिवनी और छिंदवाड़ा में भी उठी वही मांग

मंडला के साथ-साथ सिवनी और छिंदवाड़ा जिलों में भी किसान संगठनों ने इसी मुद्दे पर प्रदर्शन किया। किसान नेताओं ने कहा कि खेतों से मक्का और धान की फसल कटने के बाद नरवाई इतनी अधिक बचती है कि बिना जलाए बुवाई असंभव है। प्रशासन को चाहिए कि वैज्ञानिक या मशीन आधारित समाधान लागू करे, न कि किसानों पर दंडात्मक कार्रवाई।

किसान संगठनों की चेतावनी

किसानों ने साफ कहा है कि यदि मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन प्रदेशव्यापी रूप ले लेगा। संयुक्त किसान मोर्चा, भारतीय किसान यूनियन, और अन्नदाता किसान संगठन ने चेतावनी दी है कि वे आने वाले दिनों में भोपाल की ओर रैली निकालेंगे।

Dainikyashonnati

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!