नगर पालिका अध्यक्ष को अविश्वास प्रस्ताव के भय से मुक्त कर निरंकुश बना दिया – कांग्रेस का आरोप
भाजपा लोकतंत्र को कर रही कमजोर : कांग्रेस
Seoni 02 November 2025
सिवनी यशो:- मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने नगरपालिका और नगरपरिषद अध्यक्ष पर अविश्वास प्रस्ताव लाने का अधिकार समाप्त कर दिया है। सरकार द्वारा यह संशोधन मध्यप्रदेश नगरपालिका (संशोधन) अध्यादेश 2025 के माध्यम से किया गया है, जिसे 9 सितम्बर 2025 को राजपत्र (असाधारण) में प्रकाशित किया गया था।
इस संशोधन से मध्यप्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 43-क में परिवर्तन करते हुए उसमें से “अध्यक्ष” शब्द को पूरी तरह हटा दिया गया है। इसका अर्थ यह हुआ कि अब किसी भी नगरपालिका या नगरपरिषद के अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकेगा।
गुना जिले से मामला उठा – विभागीय पत्र ने किया खुलासा
गुना जिले की मधुसूदनगढ़ नगर परिषद में दो तिहाई से अधिक पार्षदों ने अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने हेतु जिला कलेक्टर को हस्ताक्षरयुक्त पत्र सौंपा था।
कलेक्टर द्वारा मार्गदर्शन मांगे जाने पर नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने पत्र क्रमांक 3544/2025/18-3 दिनांक 16 सितम्बर 2025 में जवाब दिया कि संशोधित अधिनियम के अनुसार अब ऐसा प्रस्ताव लाना संभव नहीं है।
यह पत्र आर.के. कार्तिकेय, उप सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी किया गया।
भाजपा पर लोकतंत्र कमजोर करने का आरोप
कांग्रेस नेताओं का कहना है कि भाजपा सत्ता में बने रहने के लिए लोकतांत्रिक परंपराओं का गला घोंट रही है।
पूर्व में नगरपालिका अधिनियम की धारा 47 के अनुसार,
यदि चुनाव के दो वर्ष बाद दो-तिहाई पार्षद अविश्वास प्रस्ताव पारित करते थे, तो अध्यक्ष पद रिक्त माना जाता था।
परंतु भाजपा सरकार ने 2023 में संशोधन कर यह अवधि दो वर्ष से बढ़ाकर तीन वर्ष कर दी और
पार्षदों की संख्या दो तिहाई से बढ़ाकर तीन-चौथाई कर दी।
सिवनी की परिषदों में भी असंतोष
बताया गया है कि सिवनी जिले की लखनादौन, छपारा और केवलारी नगर परिषदों में पार्षदों द्वारा अध्यक्षों के खिलाफ प्रस्ताव लाने की तैयारी की जा चुकी थी।
ऐसे में भाजपा सरकार ने अपने दल के अध्यक्षों को बचाने के लिए यह संशोधन लागू किया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि-
यह कदम स्थानीय लोकतंत्र की जड़ों को कमजोर करता है और
भविष्य में इस पर माननीय उच्च न्यायालय से मार्गदर्शन की संभावना है।
📌 मुख्य बिंदु:
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नगरपालिका अधिनियम की धारा 43-क से “अध्यक्ष” शब्द हटाया गया।
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अब नगरपालिका या नगर परिषद अध्यक्ष पर अविश्वास प्रस्ताव लाना संभव नहीं।
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सिवनी समेत कई जिलों में पार्षदों में असंतोष।
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विपक्ष ने इसे लोकतंत्र विरोधी बताया।



