जासूसी प्रकरण में ‘गुरु-चेले’ की चर्चित राजनीतिक जोड़ी पर एफआईआर
परमजीत विज और विनोद मालवीय पर धोखाधड़ी एवं साजिश का मामला दर्ज, राजनीति में मचा भूचाल

परमजीत विज विनोद मालवीय मामला-जासूसी प्रकरण में परमजीत विज और विनोद मालवीय पर एफआईआर, राजनीति में हलचल
Chhindwara 22 May 2026
छिंदवाड़ा / परासिया यशो:- क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय से चर्चा में रहने वाली कथित “गुरु-चेले” की जोड़ी अब कानूनी शिकंजे में आ गई है। भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री परमजीत विज एवं नगर पालिका अध्यक्ष विनोद मालवीय के विरुद्ध न्यायालय के आदेश पर धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में मामला दर्ज होने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।
करीब डेढ़ वर्ष पुराने कथित जासूसी प्रकरण में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन भाजपा जिला मंत्री अनुज पाठकर की गतिविधियों पर नजर रखने के उद्देश्य से उनके ड्राइवर को कथित रूप से राजनीतिक प्रभाव का उपयोग कर नगरपालिका में नौकरी दिलाई गई। आरोप है कि यह नियुक्ति परमजीत विज के कहने पर नगर पालिका अध्यक्ष विनोद मालवीय द्वारा कराई गई और उसका भुगतान नगरपालिका के खाते से किया गया।
शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि सार्वजनिक धन का उपयोग निजी एवं राजनीतिक उद्देश्यों के लिए किया गया, जो गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता की श्रेणी में आता है।
न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज हुआ अपराध
शिकायतकर्ता दुर्गेश विश्वकर्मा के अनुसार मामले की शिकायत लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन राजनीतिक संरक्षण के चलते पुलिस स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद न्यायालय की शरण ली गई, जहां अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए धारा 420 एवं 120-बी के तहत अपराध दर्ज करने के निर्देश दिए।
मामले में शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से अधिवक्ता मुकेश मौर्य ने पैरवी की।
राजनीति की चर्चित ‘गुरु-चेले’ की जोड़ी पहली बार साथ में आरोपी
क्षेत्रीय राजनीति में परमजीत विज और विनोद मालवीय की जोड़ी लंबे समय से “गुरु-चेले” के रूप में चर्चित रही है। राजनीतिक हलकों में यह माना जाता रहा है कि विनोद मालवीय के कई महत्वपूर्ण राजनीतिक निर्णयों और रणनीतियों में परमजीत विज की प्रभावशाली भूमिका रही है।
इसी कारण दोनों नेताओं का पहली बार एक साथ किसी आपराधिक प्रकरण में आरोपी बनना क्षेत्र की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है।
पहले भी विवादों में रहे हैं विनोद मालवीय
नगर पालिका अध्यक्ष विनोद मालवीय पूर्व में भी कई विवादों और गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में रहे हैं। महिलाओं से संबंधित एक मामले में अपराध दर्ज होने के बाद वे 23 दिन जेल में रह चुके हैं और वर्तमान में जमानत पर बताए जाते हैं।
इसके अतिरिक्त वित्तीय अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार से जुड़े आरोपों को लेकर भी उनके विरुद्ध शिकायतें और जांच की चर्चाएं लगातार होती रही हैं। बताया जाता है कि वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के चलते उनके वित्तीय अधिकार भी समाप्त किए गए थे।
राजनीतिक सूत्रों के अनुसार पार्टी स्तर पर भी कार्रवाई हुई थी और महिलाओं से संबंधित अपराधों एवं भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते उन्हें छह वर्षों के लिए निष्कासित किया गया था। वहीं अब क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो गई है कि परमजीत विज पर भी संगठनात्मक कार्रवाई की तलवार लटक सकती है।
राजनीतिक संरक्षण पर उठ रहे सवाल
क्षेत्र में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद विनोद मालवीय अब तक अध्यक्ष पद पर बने हुए हैं। विपक्षी दलों एवं स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि राजनीतिक संरक्षण के कारण प्रशासनिक कार्रवाई में लगातार देरी और टालमटोल होती रही।
सूत्रों के अनुसार कुछ समाजसेवी अब भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े अन्य मामलों को लेकर उच्च न्यायालय जाने की तैयारी कर रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि यदि न्यायालय का हस्तक्षेप नहीं हुआ तो प्रशासनिक जांचें राजनीतिक दबाव में प्रभावित हो सकती हैं।
जनता की नजर अब जांच पर
स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग, प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक संरक्षण जैसे गंभीर सवालों से जुड़ा हुआ है।
फिलहाल पुलिस द्वारा नगरपालिका के वित्तीय रिकॉर्ड, भुगतान दस्तावेजों एवं संबंधित व्यक्तियों की भूमिका की जांच किए जाने की जानकारी सामने आ रही है।
अब क्षेत्र की जनता की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच निष्पक्ष, पारदर्शी और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ती है या नहीं।



