धर्मविचारसिवनी

good morning thoughts : किसी व्यक्ति का आंकलन, मूल्यांकन-श्रीकृष्ण के अनुसार

जब भीष्म पितामह अपनी देह त्यागने वाले थे, तब श्रीकृष्ण ने पांडवों से कहा कि चलो, पितामह से राजधर्म की शिक्षा ले लो।
जब भीष्म ने बोलना शुरू किया, राजधर्म पे, तो उसी समय एक नारी स्वर से अट्हास गूंजा, लोगो ने देखा, अचानक ये क्या हो गया, सन्नाटा सा छा गया और द्रोपती जोर से हंसी और कहा-बस पितामह बस आपके मुंह से राजधर्म की बात अच्छी नहीं लगती। ये राजधर्म उस समय कहाँ था, जब मेरा चीर हरण किया जा रहा था, ये राजधर्म उस समय क्यों मौन था, जब दुर्योधन गरज के चिल्ला रहा था और दुःशासन के हाथ मेरी देह पर चले गये थे।
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आज आप राजधर्म की बातें कर रहे हैँ। भीष्म चुप हो गये, सन्नाटा छा गया और उस समय कृष्ण ने द्रोपती को देखा और कहा, कि तुमने आज जिस भीष्म का अट्हास करके परिहास किया और व्यंग्य कर दिया। एक बात याद रखना द्रोपती, मनुष्य होना कोई एक घटना नहीं होती, मनुष्य घटनाओं का जोड़ होता हैँ, कभी किसी आदमी को खंड-खंड करके मत देख लेना। किसी एक स्थिति में जो व्यक्ति श्रेष्ठ नजर आएगा, हो सकता हैँ कि दूसरी स्थिति में वो व्यक्ति पतित नजर आये। किसी एक स्थिति में गिरा हुआ आदमी, किसी दूसरी स्थिति में श्रेष्ठ हो सकता हैँ।
किसी का मूल्यांकन करो, किसी का विश्लेषण करो, तो एक घटना से मत कर लेना। मनुष्य घटनाओं का जोड़ हैँ। जिस भीष्म को तुम कोस रही हो, ये अपने जीवन की उच्चतम स्थिति से गुजरा हैँ।
एक घटना से मनुष्य का आंकलन, मूल्यांकन मत कीजिये। ये भगवान हमको भी सिखा रहे हैँ। परिवार में कई बार निर्णय ले लेते हैँ सदस्य, बड़े-बूढ़े। एक घटना से अपने परिवार के सदस्यों का मूल्यांकन मत करियेगा, घटनाओं के जोड़ को देखे तो रिश्तों की परिभाषा हो बदल जाती हैँ।

Dainikyashonnati

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