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good morning thoughts : जीवन की छोटी, किन्तु महत्वपूर्ण बातें

       जीवन की सफलता-असफलता पर हमारे व्यवहार की छोटी-छोटी बातों का भी बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है। छोटी-छोटी खराब आदतें, स्वभाव की जरा सी विकृति, रहन-सहन का गलत ढंँग आदि सामान्य सी बातें होने पर भी मनुष्य की उन्नति, विकास, सफलता के मार्ग में रोड़ा बनकर खड़ी हो जाती है।
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       किन्तु इनका सुधार न करके लोग अपनी असफताओं को दूसरे कारण गढ़कर अपने आप को सन्तुष्ट करने का असफल प्रयास करते हैं। दूसरों पर पड़ने वाला प्रभाव मनुष्य के व्यक्तित्व को संसार में रास्ता देता है।
       मनुष्य के व्यवहार, बातचीत, जीवन, तौर-तरीकों एवं व्यावहारिक पहलुओं के आधार पर ही समाज उसके प्रति अपनी राय निर्धारित करता है, जिसका मनुष्य के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान होता है। समाज में उच्च स्थान और उसका सहयोग पाकर मनुष्य बहुत बड़ी सफलता अर्जित कर सकता है।
       समाज से तिरस्कृत और दूर हटकर मनुष्य, जीवन की सभी बाह्य संभावनाओं से वंचित भी हो सकता है। अतः सामान्य भूलों, स्वभाव की विकृति, रहन-सहन, बोलचाल का फूहड़पन एवं अन्य भद्दे तौर-तरीकों में सुधार करना आवश्यक है।
       कई लोग उत्तेजित स्वभाव के होते हैं, किन्तु बात-बात पर हर समय व्यवहार में उत्तेजित होने वाले मनुष्य सहज ही दूसरों से लड़ाई-झगड़ा कर लेते हैं। किसी बात पर ऐसे लोग ठण्डे दिमाग से विचार नहीं कर पाते।
       इसी तरह कई व्यक्ति इस तरह के होते हैं, कि मन ही मन किसी सोच-विचार, मानसिक उलझन से परेशान रहते हैं। उनके चेहरे पर क्लान्ति, द्वन्द्व- बेचैनी के भाव झलकते रहते हैं। कईयों को आत्मविश्वास का अभाव, हीनता की भावना, घबराहट आदि ही असन्तुलित बना देते हैं।
       इस तरह की सभी बातें मनुष्य की मानसिक अस्वस्थता का परिचायक है, जो जीवन के प्रत्येक क्रियाकलाप में प्रकट होती रहती है। इससे प्रभावित होने वाले दूसरे लोगों की अच्छी राय नहीं बनती।
       कोई भी समझदार आदमी उत्तेजित, हीन भावनायुक्त, अन्तर्द्वन्द्व में परेशान, क्लान्त व्यक्ति को अपने काम में लगाना या साथ रखना पसन्द नहीं करेगा। ये सभी बातें सामान्य सी लगती है, किन्तु किसी भी क्षेत्र में सफल होने के लिए यह बहुत बड़ी बाधक है।
       प्रत्येक व्यक्ति स्वमेव ही अपने आपका एक चलता-फिरता, बोलता विज्ञापन है। यह भी सच है कि विज्ञापन जैसा होगा, उसका प्रभाव भी वैसा ही पड़ेगा। बातचीत, वेशभूषा, रहन-सहन से मनुष्य का व्यक्तित्व प्रदर्शित होता है।
       जिन बुरी आदतों से अपना गलत विज्ञापन हो, अपना फूहड़पन, बेवकूफी जाहिर हो, उन्हें छोड़ने का प्रयत्न करना आवश्यक है। कई लोग दूसरों के सामने नजर से नजर मिलाकर बातचीत करने में झिझकते हैं। कई तो बातचीत करते हुए कपड़ों के छोर ऐंठने लगते हैं, कई तिनका उठाकर जमीन कुरेदने लगते हैं। कई मुंँह में उंँगली देकर नाखून चबातें हैं।
       इनका प्रभाव दूसरों पर अच्छा नहीं पड़ता। इससे व्यक्तित्व का खोखलापन, छुद्रता जाहिर होती है। समाज में ऐसे लोगों को महत्व नहीं मिलता और न अच्छी श्रेणी के लोगों में समझा जाता है। इस तरह झिझकने वाले, कमजोर मनोंभूमि के लोगों से किसी बड़े काम के सम्पादन की आशा भी नहीं की जा सकती।

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