हवाला कांड: मुख्यमंत्री का सख्त रुख, बोले – कानून तोड़ने वालों पर होगी मिसाल बनने वाली कार्रवाई
पूजा पांडे सहित 11 पुलिसकर्मी FIR में नामजद, 5 गिरफ्तार —IG जबलपुर ने SP और ASP को भी थमाया शो-कॉज नोटिस
सिवनी यशो :- सिवनी जिले में सामने आए बहुचर्चित हवाला कांड ने अब राज्य स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों ही हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एसडीओपी पूजा पांडे सहित 11 पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है, जिनमें से 5 की गिरफ्तारी हो चुकी है।
वहीं, आईजी जबलपुर जोन ने इस प्रकरण में सिवनी एसपी और एडिशनल एसपी को शो-कॉज नोटिस जारी कर दिए हैं।
मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश
मामले पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने एक्स (X) हैंडल पर स्पष्ट चेतावनी भरे शब्दों में लिखा —
> “सिवनी प्रकरण में दोषियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है।
किसी भी दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।
कानून का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर होने जा रही कार्रवाई मिसाल बनेगी।
अपराध मुक्त मध्यप्रदेश और नागरिकों की सुरक्षा हमारा संकल्प है।”
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद पूरे पुलिस विभाग में तेज हलचल देखी जा रही है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट मुख्यालय को सौंपी है और
आगे की कानूनी प्रक्रिया क्राइम ब्रांच जबलपुर की निगरानी में जारी है।
8-9 अक्टूबर की रात हुआ था घटनाक्रम
यह पूरा मामला 8 और 9 अक्टूबर की दरमियानी रात का है, जब थाना लखनवाड़ा क्षेत्र में हवाला रकम की जप्ती को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ।
सूत्रों के अनुसार, जप्ती की गई वास्तविक राशि और दर्ज राशि में भारी अंतर पाया गया था,
और जब्ती की वीडियोग्राफी भी नहीं की गई थी, जो कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 105 का उल्लंघन माना जा रहा है।
इसी के चलते, विभागीय जांच में कई पुलिस अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई,
जिसके बाद निलंबन और अब एफआईआर की कार्रवाई की गई है।
गंभीर प्रशासनिक संकेत
आईजी जोन की ओर से एसपी और एएसपी को नोटिस दिए जाने से संकेत साफ हैं कि —
यह मामला केवल निचले स्तर तक सीमित नहीं रहेगा,
बल्कि इसकी जवाबदेही वरिष्ठ अधिकारियों तक तय होगी।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि आगे की जांच में वीडियोग्राफी अभिलेख, जब्त राशि का परीक्षण और
कॉल डिटेल्स भी खंगाले जा रहे हैं।
सिवनी हवाला कांड अब एक प्रमुख राज्य स्तरीय जांच का विषय बन गया है।
मुख्यमंत्री के बयान के बाद स्पष्ट है कि –
यह केवल एक विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं,
बल्कि सिस्टम की जवाबदेही की परीक्षा बन चुकी है।
यदि जांच में मीडिया रिपोर्टों के तथ्य पुष्ट हुए,
तो यह मामला मध्यप्रदेश पुलिस इतिहास के सबसे बड़े वित्तीय भ्रष्टाचार प्रकरणों में से एक माना जाएगा।
https://x.com/DrMohanYadav51/status/1978015149601476999?t=SiVS1ZLHL3qtQ_8Yt4OiLg&s=19



