वन अधिकारियों पर उठ रहे सवाल, हर्रई वनपरिक्षेत्र में कट रहे जंगल
Chhindwara 23 April 2025
छिंदवाड़ा यशो:- पूर्व वन मंडल के अंतर्गत हर्रई वनपरिक्षेत्र के अंतर्गत सागौन की अवैध कटाई की जा रही है। जानकारी के अनुसार वनविभाग के अधिकारी पकड़े जाने के बाद कार्रवाई करते हैं लेकिन इसमें लीपापोती कर आरोपियों को बचाया जाता है। बताया जाता है कि कर्मचारियों द्वारा दो दिन उक्त वनपरिक्षेत्र में पहले सागौन से भरे एक वाहन को पकड़ा गया था, जिसमें कुछ आरोपी भी हिरासत में लिए गए थे। आरोपियों के खिलाफ वन अपराध दर्ज होने के बावजूद, वन अधिकारियों द्वारा कथित रूप से ‘सेटिंगÓ कर उन्हें राहत दे दी गई।
जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा का दावा करने वाले वन अधिकारियों की कार्यशैली पर तब सवाल उठे जब हर्रई में अपराधियों से सांठगांठ कर उन्हें फायदा पहुंचाया गया। सूत्रों के अनुसार, वन कर्मचारियों ने गश्त के दौरान एक वाहन को रोका, जिसकी तलाशी में लाखों रुपये मूल्य की सागौन की लकडिय़ां बरामद हुईं। इसके बाद औपचारिक रूप से वन अपराध दर्ज कर मामला न्यायालय में पेश किया गया।
नियमों के अनुसार, न्यायालय में पेशी के दौरान वन अधिकारियों को आगे की जांच के लिए आरोपियों की रिमांड मांगनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा कोई प्रयास नहीं किया गया और न ही आगे कोई पड़ताल की गई। वन अधिकारियों के इस रवैये से कर्मचारियों का मनोबल गिरा है। इस मामले पर रेंजर का कहना है कि अपराधियों को पकड़ा गया और उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया, न्यायालय से उन्हें जमानत मिली है जिसे वे रोक नहीं सकते।
सबूत मिटाने जंगल में लगवाई आग
वन विभाग के सूत्रों की मानें तो हर्रई वनपरिक्षेत्र में बम्हनी बीट में सागौन के हरे पेड़ों की कटाई हुई थी। इन पेड़ों को एक 407 वाहन से ले जाया जा रहा था, जिसे गश्त कर रहे कर्मचारियों ने पकड़ा। आरोप है कि वन अधिकारियों ने ‘सेटिंगÓ कर कर्मचारियों की कार्रवाई पर पानी फेर दिया, इतना ही नहीं सबूत मिटाने के लिए उस क्षेत्र में आग तक लगवा दी गई, ताकि सारे प्रमाण नष्ट हो जाएं।
रिमांड नही लिए, आरोपियों को दिया जमानत का मौका
वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा अपनी जान जोखिम में डालकर सागौन की लकडिय़ां पकड़ी जाती हैं, लेकिन आरोप है कि वन अधिकारी आरोपियों से मिलकर पूरे मामले को दबा देते हैं। इस मामले में भी वन अपराध तो दर्ज हुआ, लेकिन आरोपियों को जमानत न मिले, इसके लिए कोई प्रयास नहीं किया गया और न ही उन्हें आगे की पूछताछ के लिए रिमांड पर लेने की कोई पहल हुई। अधिकारियों की यह कथित लापरवाही कई सवाल खड़े करती है।


