मध्यप्रदेशमंडला

नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम हो रही अवैध प्लाटिंग, प्रशासन ने साध रखी चुप्पी

नियमों को ताक पर रखकर खुलेआम हो रही अवैध प्लाटिंग, प्रशासन ने साध रखी चुप्पी

TNCP और RERA नियमों की अनदेखी से नागरिक सुविधाओं पर संकट, शासन को राजस्व हानि

मंडला यशो :- जिले में अवैध प्लाटिंग अब कोई छिपा हुआ खेल नहीं रह गया है, बल्कि खुलेआम नियमों को ताक पर रखकर भू-माफिया मोटी रकम कमा रहे हैं। न तो TNCP के नियमों का पालन हो रहा है और न ही RERA की गाइडलाइन का। इसका सीधा खामियाजा आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है, वहीं शासन को भारी राजस्व हानि हो रही है।

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि इतनी बड़ी-बड़ी प्लाटिंग होने के बावजूद संबंधित पटवारी और राजस्व अधिकारियों को “जानकारी न होने” की बात कही जा रही है, जो राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।

बिनेका में हाईवे से सटी अवैध प्लाटिंग का मामला उजागर

नगर से सटी ग्राम पंचायत बिनेका में जबलपुर बायपास से लगे खसरा क्रमांक 174/1 पर अवैध प्लाटिंग का कार्य धड़ल्ले से किया जा रहा है। इस प्लाटिंग में TNCP और RERA के किसी भी नियम का पालन नहीं किया जा रहा।

यह प्लाटिंग साइट नेशनल हाईवे से सटी होने के कारण ढलान पर स्थित है, जिससे बारिश के मौसम में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न होने की आशंका बनी हुई है। TNCP के अनुसार किसी भी प्लाटिंग साइट में सड़क स्तर तक भराव (फिलिंग) कराना कॉलोनाइजर का प्राथमिक दायित्व होता है, लेकिन यहां उसका भी पालन नहीं किया गया।

जब बुनियादी भराव ही नहीं है, तो सड़क, बिजली, नाली और ड्रेनेज जैसी सुविधाओं की उम्मीद करना बेमानी प्रतीत होता है।

नाले से सटाकर प्लॉटिंग? नियमों का सीधा उल्लंघन

TNCP नियमों के अनुसार यदि कोई नाला किसी खसरे से होकर गुजरता है, तो उस क्षेत्र को ग्रीन बेल्ट या ओपन एरिया के रूप में छोड़ना अनिवार्य होता है। नाले से सटाकर प्लॉट काटना ले-आउट की शर्तों का स्पष्ट उल्लंघन माना जाता है।

लेकिन बिनेका की इस प्लाटिंग में कॉलोनी की दीवार सीधे नाले के क्षेत्र से सटी हुई दिखाई दे रही है। नियमों के अनुसार किसी भी कॉलोनी या प्लाटिंग की दूरी जल क्षेत्र या छोटे नाले से कम से कम 9 मीटर होनी चाहिए, जबकि यहां इसके ठीक विपरीत हाईवे से कुछ मीटर अंदर नाले के मार्ग पर पाइप डालकर उसके ऊपर प्लॉटिंग कर दी गई है।

यदि यह जलभराव क्षेत्र नहीं है, तो फिर सड़क निर्माण एजेंसी द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से यहां पुल का निर्माण क्यों किया गया? और कॉलोनाइजर ने आगे जाकर बड़े पाइप क्यों लगाए? ये सवाल प्रशासनिक जांच की मांग करते हैं।

महंगे दामों पर प्लॉट बिक्री, सुविधाएं नदारद

इन तमाम अव्यवस्थाओं और नियम उल्लंघनों के बावजूद यहां प्लॉट ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं और कॉलोनाइजर भारी मुनाफा कमा रहे हैं। वहीं खरीदार भविष्य में बुनियादी सुविधाओं और कानूनी वैधता को लेकर अनिश्चितता में फंसे हुए हैं।

प्रशासन का पक्ष

इस संबंध में जब मंडला तहसीलदार से शिकायत की गई, तो उन्होंने बताया कि मामले की जांच जारी है और संबंधित पटवारी को मौके का निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि क्या जांच केवल कागजों तक सीमित रहेगी, या अवैध प्लाटिंग पर वास्तव में कार्रवाई होगी?

Dainikyashonnati

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!