सिवनी में मनी आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज की समाधि स्मृति, पर्युषण पर्व का शुभारंभ
जैन संस्कृति का महापर्व – भक्ति, संयम और तप का संदेश
Seoni 26 August 2025
सिवनी यशो:-श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन बड़ा मंदिर सिवनी, मध्यप्रदेश में 25 अगस्त 2025 को प्रातः बेला में आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज का समाधि स्मृति महोत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव से मनाया गया।
इस अवसर पर परम पूज्य मुनि श्री धर्मसागर जी महाराज एवं मुनि श्री भावसागर जी महाराज के सान्निध्य में मंगलाचरण, पूजन, चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं शास्त्र अर्पण सम्पन्न हुए।
कार्यक्रम में पवन दिवाकर ने आचार्य श्री शान्तिसागर जी महाराज के तप, त्याग और संलेखना की महान परंपरा को स्मरण करते हुए कहा कि –
उन्होंने 18 करोड़ जाप, 9938 उपवास और कठिन तप के माध्यम से जैन धर्म के आदर्श प्रस्तुत किए।
धन्य कुमार दिवाकर ने भी आचार्य श्री की तपस्वी साधना का वर्णन करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने इस अवसर पर कहा कि –
“साधु परंपरा पंचम काल तक अविरल चलती रहनी चाहिए। समाधि मरण को वीर मरण कहा गया है और इसे जैन धर्म में मृत्यु महोत्सव माना जाता है।”
पर्युषण पर्व का महत्व
समारोह के दौरान मुनि श्री ने पर्युषण पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पर्व आत्मोपासना, आत्मालोचना और आत्मनिरीक्षण का महापर्व है।
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यह भक्ति, उपवास, व्रत, संयम, साधना और तप का पर्व है।
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दस लक्षण पर्व मनुष्य को आत्मजागृति, आत्मालोकन और आत्मसाक्षात्कार की ओर ले जाता है।
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यह पर्व पूरे विश्व में मनाया जाता है, जिसमें अनेक श्रद्धालु लगातार 10 दिन निर्जल या जल लेकर उपवास करते हैं।
मंदिर समिति एवं श्रद्धालु समाज ने इस आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय सहयोग दिया।



