सिवनी

90 की उम्र में भी कर्मठ और जुझारू: डी. बी. नायर का प्रेरणादायी जीवन

छात्र आंदोलनों से लेकर पेंशनरों तक का सफर, संघर्ष और सेवा का अनूठा उदाहरण

15 सितंबर को डी. बी. नायर के जन्मदिन के अवसर पर पत्रकार संजय सिंह का आलेख

छात्र आंदोलन से शुरू होकर कर्मचारियों और अब पेंशनरों के आंदोलनों का कुशल नेतृत्व करने वाले बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी डी. बी. नायर जिले ही नहीं, प्रदेश में भी किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं।

श्री नायर का जन्म दक्षिण भारत के सुप्रसिद्ध महाराजा मार्तंड वर्मा द्वारा श्री पद्मनाभ स्वामी को समर्पित तिरुवितांकोर राज्य (वर्तमान में केरल प्रदेश का दक्षिण क्षेत्र) स्थित तिरुवनंतपुरम जिले के एक गाँव में, एक संभ्रांत नायर परिवार में दिनांक 15 सितंबर 1935 को हुआ।

प्रारंभिक शिक्षा गाँव में पूरी करने के बाद उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए नायर सर्विस सोसाइटी के महात्मा गांधी कॉलेज, तिरुवनंतपुरम में प्रवेश लिया। उस समय आज़ादी के सात–आठ वर्ष बीत जाने के बाद भी तिरुवितांकोर राज्य ब्रिटिश शासन से मुक्त नहीं हुआ था। स्वतंत्रता की मांग को लेकर राज्य के छात्रों ने आंदोलन छेड़ दिया। राष्ट्रभक्ति के जोश में श्री नायर भी अछूते नहीं रहे और उन्होंने आंदोलन में सक्रिय भागीदारी की। आंदोलन इतना उग्र हुआ कि उन्हें कॉलेज की पढ़ाई छोड़नी पड़ी।

सन 1956 में राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत त्रावणकोर और मालाबार को जोड़कर केरल राज्य बना। आंदोलन तो सफल हो गया, किंतु जीविकोपार्जन की तलाश में श्री नायर को मध्यप्रदेश के सिवनी जिले आना पड़ा। जिले की माटी और यहाँ के लोग उन्हें इतने भाए कि वे यहीं के होकर रह गए।

16 जनवरी 1959 को उन्होंने सिंचाई विभाग सिवनी में लिपिक पद पर नौकरी प्रारंभ की। बहुमुखी प्रतिभा के कारण उन्होंने शासन की कई कल्याणकारी योजनाओं में सहभागिता की। नौकरी के दौरान ही अपने जुझारू स्वभाव के चलते कर्मचारियों के हक के लिए संघर्ष शुरू कर दिया। यहीं से उनका कर्मचारी राजनीति में प्रवेश हुआ। शासन के विरुद्ध कई संघर्षों का नेतृत्व किया। सत्तापक्ष का दबाव और प्रताड़ना भी झेली, लेकिन कर्मचारियों का साथ कभी नहीं छोड़ा।

30 सितंबर 1993 को जल संसाधन विभाग से निष्कलंक सेवा पूर्ण कर वे सेवानिवृत्त हुए।

राजनीति और सामाजिक योगदान

सेवानिवृत्ति के बाद भी वे घर नहीं बैठे। कर्मचारी और पेंशनरों के हित में संघर्ष करते रहे। उन्हें जिला पेंशनर एसोसिएशन सिवनी का सचिव बनाया गया।

वर्ष 1993 में, राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी की नीतियों से प्रेरित होकर और स्व. सुश्री विमला वर्मा एवं स्व. ठाकुर हरवंश सिंह के आग्रह पर, उन्होंने कांग्रेस की सदस्यता तत्कालीन केंद्रीय मंत्री के. एन. प्रधान से ग्रहण की। इसके बाद वे 1993 से 2018 तक जिला कांग्रेस कमेटी में विभिन्न पदों पर कार्यरत रहे। वर्ष 2012 से 2018 तक उन्होंने संगठन सचिव एवं कार्यालय प्रभारी का दायित्व कुशलता से निभाया। वर्तमान में वे पार्टी के स्थाई आमंत्रित सदस्य हैं।

सामाजिक क्षेत्र में भी उनकी अग्रणी भूमिका रही। वर्ष 2002 में अखिल भारतीय उपभोक्ता कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी. एस. शर्मा ने उन्हें सिवनी जिला अध्यक्ष नियुक्त किया।

उनकी सक्रियता और नेतृत्व क्षमता को देखते हुए उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बनाया गया।

परिणामस्वरूप उपभोक्ता संरक्षण क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ और सिवनी जिले को वर्ष 2011 व 2015 में प्रथम तथा 2016 में द्वितीय राज्य स्तरीय पुरस्कार मिला।

सम्मान और उपलब्धियाँ

  • 2008 – दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे नागपुर ने उन्हें मंडल रेल उपभोक्ता सलाहकार समिति का सदस्य नामित किया।

  • 2013 व 2016 – भारत सरकार रेल मंत्रालय द्वारा उन्हें क्षेत्रीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति, बिलासपुर का सदस्य नियुक्त किया गया।

  • तत्कालीन कलेक्टर श्री भारत यादव ने उन्हें दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति समिति एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण समिति का सदस्य बनाया।

वर्तमान समय में श्री नायर अपनी बढ़ी हुई उम्र के कारण राजनीति व

सामाजिक गतिविधियों से दूर रहकर प्रदेश के पेंशनर्स संगठन में सक्रिय हैं।

प्रदेश के लगभग 4.80 लाख पेंशनरों को संगठित कर उनके अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

वरिष्ठ नागरिक पेंशनर एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष एड. राजकुमार दुबे ने –

उनकी कर्मठता और संगठन क्षमता को देखते हुए उन्हें वरिष्ठ उप प्रांताध्यक्ष एवं प्रदेश प्रवक्ता का दायित्व सौंपा है।

31 अगस्त 2024 को इंदौर में आयोजित वरिष्ठ नागरिक पेंशनर एसोसिएशन के सम्मेलन में,

प्रदेश कैबिनेट मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट ने उन्हें अभिनंदन पत्र भेंट किया और कहा कि-

“नायर जैसे बुजुर्ग पेंशनर नेता की कार्यकुशलता पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायी है।”

निजी जीवन

श्री नायर का परिवार सम्पन्न रहा है,किंतु नियति के आगे कोई नहीं।

कुछ वर्ष पूर्व उनकी जीवनसंगिनी का देहांत हुआ और कोरोना काल में उनकी बेटी जयश्री नायर भी संसार छोड़ गईं।

वर्तमान में वे अपने पुत्र श्रीकुमार नायर, पुत्रवधू, पोते–पोतियों के साथ स्वस्थ एवं संतुलित जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

आज, 15 सितंबर 2025 को, श्री डी. बी. नायर 90 वर्ष की आयु में प्रवेश कर रहे हैं।

हम सबके लिए यह सौभाग्य की बात है। मंगलकामना है कि वे सदा स्वस्थ, प्रसन्न और दीर्घायु रहें।

उन्हें जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ।

Dainikyashonnati

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