सिवनी रेलवे फाटक बना ‘मौत का जाल’: उखड़ी सड़क, रोज हादसे—क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार?
छिंदवाड़ा मार्ग पर वर्षों से जर्जर हालात, बाइक सवार फिसलकर हो रहे घायल—रेलवे, नगरीय प्रशासन और रेल विकास समिति की निष्क्रियता उजागर
सिवनी रेलवे फाटक सड़क खराब उखड़ी सड़क, रोज हादसे
Seoni 19 April 2026
सिवनी यशो:- सिवनी शहर के छिंदवाड़ा रोड स्थित रेलवे फाटक इन दिनों हादसों का अड्डा बन चुका है। यहां सड़क की डामर परत पूरी तरह खत्म हो चुकी है, जिससे आम नागरिकों को रोजाना जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ रहा है।
हालात इतने खराब हैं कि अब यह सवाल उठने लगा है—क्या जिम्मेदार किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहे हैं?

रेलवे लाइन के दोनों ओर लगभग चार-चार फुट तक लगे चेकर टाइल्स उखड़ चुके हैं, वहीं इसके आगे करीब 20 फुट से अधिक दूरी तक सड़क पूरी तरह क्षतिग्रस्त पड़ी है।
यह समस्या नई नहीं, बल्कि कई वर्षों से लगातार बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार विभाग अब तक मूकदर्शक बने हुए हैं।
नगरीय प्रशासन की खानापूर्ति, रेलवे की चुप्पी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगरीय प्रशासन केवल मुरम डालकर औपचारिकता निभाता है, जिससे कुछ समय के लिए राहत मिलती है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हो पाता।
चूंकि यह क्षेत्र रेलवे की भूमि में आता है, इसलिए स्थायी सुधार की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन की है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई।

रेल विकास समिति: जिम्मेदारी या सिर्फ औपचारिकता?
रेल सुविधाओं के विकास और आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए गठित रेल विकास समिति पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
समिति में आधा दर्जन से अधिक सदस्य होने के बावजूद
न कोई निरीक्षण, न कोई ठोस कार्रवाई
और न ही जनता की समस्याओं के समाधान की कोशिश
स्थानीय लोगों का आरोप है कि समिति के सदस्य सिर्फ नाम और पद तक सीमित हैं, जबकि जमीनी समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।
गड्ढों और पटरियों से रोज हादसे
रेलवे ट्रैक के किनारे गहरे और चौड़े गड्ढे बन चुके हैं, जिससे बाइक चालकों के पहिए फंस जाते हैं या रेल की चिकनी पटरी पर फिसल जाते हैं। नतीजतन रोजाना लोग गिरकर घायल हो रहे हैं, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।
टकराव, जाम और बढ़ता खतरा
गड्ढों के कारण वाहन अचानक रुक जाते हैं, जिससे पीछे से आने वाले वाहन टकरा जाते हैं। इससे यहां दुर्घटनाओं का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है और जाम की स्थिति भी आम हो गई है।
पटरियां सड़क से ऊपर—जोखिम कई गुना
चेकर टाइल्स उखड़ने और डामर खत्म होने से कई जगह रेल पटरियां सड़क की सतह से ऊपर उठ गई हैं, जिससे बाइक, कार और भारी वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
‘हर दिन हादसे’—फिर भी चुप्पी क्यों?
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऐसा कोई दिन नहीं जाता जब यहां हादसा न हो, फिर भी जिम्मेदार विभागों और रेल विकास समिति की चुप्पी समझ से परे है।
नागरिकों की मांग
क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि:
रेल पटरियों के आसपास बने गड्ढों को तत्काल भरा जाए
मार्ग को समतल कर डामरीकरण कार्य शीघ्र कराया जाए
रेल विकास समिति को सक्रिय कर जवाबदेही तय की जाए
जब हर दिन हादसे हो रहे हों और जिम्मेदार चुप हों, तो यह लापरवाही नहीं—एक संभावित बड़ी त्रासदी को न्योता है।
https://indianrailways.gov.in/railwayboard/view_section.jsp?lang=0&id=0,5,377,1899





