जबलपुर बनेगा डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का हब, 475 करोड़ से अधिक की टैंक ओवरहॉल परियोजना का शुभारंभ
सीएम डॉ. मोहन यादव और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया भूमि-पूजन, बोले—आत्मनिर्भर रक्षा क्षेत्र में मध्यप्रदेश निभाएगा बड़ी भूमिका
जबलपुर बनेगा डिफेंस हब, 475 करोड़ की टी-सीरीज टैंक ओवरहॉल परियोजना शुरू
Bhopal 27 August 2026
भोपाल/जबलपुर यशो:- रक्षाबंधन से एक दिन पहले संस्कारधानी जबलपुर से भारतीय सेना की क्षमता और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूती देने वाली बड़ी परियोजना की शुरुआत हुई। आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड की व्हीकल फैक्ट्री में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने टी-सीरीज टैंक ओवरहॉल परियोजना का भूमि-पूजन किया और शिलापट्ट का अनावरण किया। करीब 475 करोड़ रुपये से अधिक लागत वाली यह परियोजना जबलपुर को देश के प्रमुख डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भारतीय सेना को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने और उसकी क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश की विभिन्न रक्षा इकाइयों में आधुनिक उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जबलपुर की आर्मर्ड फैक्ट्री ने अपने कार्य और क्षमता के बल पर देशभर में विशेष पहचान बनाई है।
रक्षा क्षेत्र में जबलपुर की अलग पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षा के क्षेत्र में जबलपुर की अपनी विशिष्ट पहचान है। भारतीय सेना को पराक्रम और साहस के लिए जाना जाता है तथा आधुनिक समय में सैन्य शक्ति के साथ अत्याधुनिक तकनीक भी आवश्यक है।

उन्होंने जबलपुर की ऐतिहासिक विरासत का उल्लेख करते हुए रानी दुर्गावती तथा अमर शहीद राजा शंकर शाह-रघुनाथ शाह सहित स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि इतिहास से यह सीख मिलती है कि युद्ध में वीरता के साथ तकनीकी क्षमता भी निर्णायक भूमिका निभाती है।
औद्योगीकरण से रोजगार के नए अवसर
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में बदलाव का दौर चल रहा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश को रक्षा एवं औद्योगिक क्षेत्र में नई परियोजनाएं मिल रही हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश में औद्योगीकरण को बढ़ावा देकर युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार कर रही है। शिक्षा, रोजगार और निवेश सहित विभिन्न क्षेत्रों में मध्यप्रदेश तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश के निर्यात के 76 हजार करोड़ रुपये से अधिक पहुंचने का भी उल्लेख किया।
डिफेंस सेक्टर में बड़े निवेश की तैयारी
केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि टी-सीरीज टैंक ओवरहॉल परियोजना भारतीय सेना को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने मध्यप्रदेश सरकार की उद्योग अनुकूल नीतियों की सराहना करते हुए कहा कि प्रदेश में रक्षा क्षेत्र के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हुआ है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में डिफेंस सेक्टर की मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश की संभावनाएं मध्यप्रदेश की औद्योगिक सोच को दर्शाती हैं। इन प्रयासों से प्रदेश के स्पेस, एयरो और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की मजबूत नींव तैयार हो रही है।
आधुनिक युद्ध में टैंक अब भी महत्वपूर्ण
राजनाथ सिंह ने कहा कि युद्ध की तकनीक तेजी से बदल रही है। ड्रोन, मिसाइल और साइबर तकनीक आधुनिक युद्ध का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन ग्राउंड ऑपरेशन में टैंकों की भूमिका अभी भी महत्वपूर्ण है। टैंक जमीनी अभियानों में सैनिकों को आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण सहायता देते हैं।
उन्होंने कहा कि इसी वजह से भारतीय सेना के टैंकों को लगातार आधुनिक तकनीक से अपग्रेड किया जा रहा है। टैंक की भूमिका तकनीकी विकास के साथ बदल रही है और उन्हें आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना जरूरी है।
बढ़ेगी टैंक ओवरहॉल क्षमता
रक्षा मंत्री ने बताया कि परियोजना के पूरा होने के बाद देश की कुल टैंक ओवरहॉल क्षमता बढ़कर 230 टैंक प्रतिवर्ष हो जाएगी। उन्होंने कहा कि परियोजना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार तथा छोटे उद्यमियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय युवाओं में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता उन्हें सही तकनीक, अवसर और बेहतर इकोसिस्टम उपलब्ध कराने की है। जबलपुर आने वाले समय में नई तकनीक के साथ डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा।
रक्षा उत्पादन में भारत की लंबी छलांग
रक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में भारत के रक्षा क्षेत्र ने उल्लेखनीय प्रगति की है। उनके अनुसार वर्ष 2014 में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब 46 हजार करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपये हो गया है। इसी अवधि में रक्षा निर्यात भी करीब 1,000 करोड़ रुपये से बढ़कर 39 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। भारत अब रक्षा क्षेत्र में दूसरे देशों पर निर्भर रहने के बजाय अपने जवानों के लिए हथियार और उपकरण बनाने तथा उन्हें आधुनिक तकनीक से अपग्रेड करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में भारत डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में दुनिया का प्रमुख केंद्र बनेगा और जबलपुर इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
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