गांव से अनुभाग तक हर मंगलवार जनसुनवाई, अब अफसरों तक पहुंचेगी जनता की आवाज
कलेक्टर नेहा मीना ने बदली जनसुनवाई की व्यवस्था, ग्राम पंचायत से अनुभाग स्तर तक होगी सुनवाई; इसी मंगलवार से लागू होगा नया सिस्टम
सिवनी में अब हर मंगलवार गांव से अनुभाग तक जनसुनवाई, कलेक्टर नेहा मीना ने जारी किए आदेश
Seoni 30 August 2026
सिवनी यशो:- आम नागरिकों की शिकायतों और समस्याओं के निराकरण के लिए अब लोगों को जिला मुख्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने जिले की जनसुनवाई व्यवस्था को और अधिक प्रभावी एवं जनसुलभ बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू करने के आदेश जारी किए हैं। इसके तहत अब हर मंगलवार ग्राम पंचायत से लेकर अनुभाग स्तर तक जनसुनवाई होगी। नई व्यवस्था की शुरुआत इसी मंगलवार से होगी।
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को स्थानीय स्तर पर ही अधिकारियों के सामने अपनी समस्याएं रखने का अवसर उपलब्ध कराना है। जनसुनवाई के दौरान संबंधित अधिकारियों एवं मैदानी अमले की मौजूदगी में शिकायतों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी, जिससे लोगों को छोटी-छोटी समस्याओं के लिए जिला मुख्यालय तक आने की जरूरत न पड़े।
हर मंगलवार 11 बजे से अनुभाग स्तरीय जनसुनवाई
आदेश के अनुसार जिले के सभी अनुभागों में प्रत्येक मंगलवार सुबह 11 बजे से जनसुनवाई समाप्त होने तक अनुभाग स्तरीय जनसुनवाई आयोजित की जाएगी। इसकी अध्यक्षता अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) करेंगे।
जनसुनवाई में ब्लॉक एवं अनुभाग स्तर के सभी संबंधित विभागों के अधिकारी अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे। अधिकारी अपने विभाग से संबंधित शिकायतों और आवेदनों की सुनवाई कर नियमानुसार निराकरण की कार्रवाई करेंगे।
अनुभाग स्तरीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिला स्तरीय जनसुनवाई से भी जुड़े रहेंगे, ताकि जिला और अनुभाग स्तर के बीच समन्वय बना रहे।
गांव में ही मिलेंगे पटवारी, सचिव और रोजगार सहायक
नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी ग्राम पंचायत स्तर पर होने वाली जनसुनवाई होगी। जिले की सभी ग्राम पंचायतों में प्रत्येक मंगलवार सुबह 11 बजे से जनसुनवाई आयोजित की जाएगी।
एसडीएम द्वारा तैयार रोस्टर के अनुसार संबंधित पटवारी, पंचायत सचिव और रोजगार सहायक अनिवार्य रूप से ग्राम पंचायत में उपस्थित रहेंगे। संबंधित कर्मचारी पूरे दिन ग्राम पंचायत कार्यालय में मौजूद रहकर ग्रामीणों की शिकायतें एवं आवेदन प्राप्त करेंगे तथा आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे।
जनसुनवाई की जानकारी अधिक से अधिक ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए कोटवारों, पंचायत सचिवों और अन्य मैदानी शासकीय अमले के माध्यम से व्यापक प्रचार-प्रसार भी कराया जाएगा।
दो तहसीलों वाले अनुभागों में बदलेगा स्थान
जिन अनुभागों में दो तहसीलें हैं, वहां एसडीएम एक सप्ताह मुख्यालय की तहसील और अगले सप्ताह दूसरी तहसील में जनसुनवाई करेंगे। इससे दोनों तहसील क्षेत्रों के नागरिकों को नियमित रूप से स्थानीय स्तर पर अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्याएं रखने का अवसर मिलेगा।
जनसुनवाई के बाद सीएम हेल्पलाइन में लंबित शिकायतों की समीक्षा भी अनिवार्य रूप से की जाएगी।
शिकायत अटकी तो तय होगी मैदानी अधिकारी की जिम्मेदारी
कलेक्टर नेहा मीना ने शिकायतों के निराकरण में विभागों के बीच बेहतर समन्वय के निर्देश दिए हैं। राजस्व, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य, विद्युत वितरण कंपनी सहित सभी संबंधित विभागों को प्राप्त शिकायतों का नियमानुसार और निर्धारित समय-सीमा में निराकरण करना होगा।
यदि निर्धारित समय-सीमा में शिकायत का निराकरण नहीं होता है तो संबंधित मैदानी अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
न्यायालयीन मामलों में वैधानिक प्रक्रिया की जानकारी
भूमि के नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन आदि से जुड़े ऐसे न्यायालयीन प्रकरण, जिनमें विधिक प्रक्रिया के तहत पहले ही आदेश पारित हो चुके हैं, उन्हें सामान्य शिकायत के रूप में निराकृत नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों में आवेदक को संबंधित वैधानिक प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।
यदि किसी मामले में नया प्रकरण दर्ज किया जाना आवश्यक है तो निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रकरण दर्ज किया जाएगा।
हर शनिवार होगी शिकायतों की समीक्षा
प्राप्त शिकायतों की निगरानी के लिए प्रत्येक शनिवार को एसडीएम द्वारा विभागवार निराकरण की समीक्षा की जाएगी। इसमें संबंधित अधिकारी प्रत्यक्ष अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल होंगे।
समीक्षा एवं जनसुनवाई का प्रतिवेदन जिला स्तरीय समय-सीमा बैठक में प्रस्तुत किया जाएगा। वहीं अनुभाग स्तर पर आयोजित प्रत्येक जनसुनवाई का पूरा विवरण उसी दिन शाम 6 बजे तक कार्यालय लोक सेवा प्रबंधक को भेजना अनिवार्य किया गया है।
अपर कलेक्टर एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत के मध्य विभागों के विभाजन के अनुरूप जनसुनवाई में प्राप्त आवेदनों की सतत समीक्षा एवं पर्यवेक्षण भी सुनिश्चित करेंगे।
नई व्यवस्था के लागू होने से अब प्रशासन और ग्रामीणों के बीच दूरी कम होने की उम्मीद है। खास तौर पर राजस्व, पंचायत, बिजली, स्वास्थ्य और अन्य विभागों से जुड़ी स्थानीय समस्याओं को गांव और अनुभाग स्तर पर ही संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने का रास्ता आसान होगा।
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