हम अपने स्व का जागरण करें और राष्ट्र को सशक्त बनाये – ब्रजकांत जी
भारत के समक्ष आंतरिक एवं बाह्य चुनौतियाँ विषय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का व्याख्यान का कार्यक्रम संपन्न
सिवनी 04 जनवरी 2025
सिवनी यशो:- राष्ट्र को सशक्त और समृद्ध बनाना है तो हमें अपने स्व का जागरण करना होगा देश और समाज के प्रति हमारे जो कर्तव्य है उनका पालन करना होगा । हमारे स्वाभिमान और मूल्यों पर हजारों वर्षो तक कुठाराघात होते रहा है परंतु आजादी के बाद भी हमारे हमारे गौरव को स्थापित करने का कोई सार्थक प्रयास नहीं हुआ और स्वतंत्र भारत में भी भारतीय गौरव, परंपराओं और शिक्षा व्यवस्था पर घूसपैठ का क्रम जारी रहा और आज भी यह जारी है आज की आवश्यकता है कि हम अपने विवेक को जागृत करें और अपने गौरव को स्थापित करने की दिशा में सजगता से आगे बढ़े पाश्चात्य संस्कृति राष्ट्र को खोखला कर रही है तो वहीं बिगड़ी शिक्षा व्यवस्था भारतीय समाज परिवार व्यवस्था को छिन्न भिन्न करने में लगी हुई ।
इस आशय के विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक ब्रजकांत जी ने सिवनी नगर के राशि लाँन में आयोजित भारत के समक्ष आंतरिक एवं ब्राह्य चुनौतियाँ विषय पर व्याख्यान कार्यक्रम के दौरान उपस्थित बुद्धिजीवीयों के बीच व्यक्त किये ।
आयोजित कार्यक्रम ब्रजकांत जी मुख्यवक्ता के रूप में उपस्थित थे जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता डाँ रविशंकर नाग प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय सिवनी द्वारा की गयी कार्यक्रम की मुख्य आतिथि नेत्र रोग विशेषज्ञ डां. नीलिमा बघेल रही तथा संघ के जिला संघचालक सुरेन्द्र सिसोदिया मंचासीन रहे ।
आयोजित कार्यक्रम में प्रबुद्धवर्ग के महिला एवं पुरूषों श्रोताओं से खचाखच भरे लांन में ब्रजकांत जी के विषय को गंभीरता सुना गया । अपने ओजस्वी उद्बोधन में उन्होंने कहा कि भारत को राजनैतिक रूप से 1947 में स्वतंत्रता मिल अवश्य गयी थी परंतु भारत की शासन व्यवस्था ने स्वतंत्र रूप से भारत की नीतियाँ बनाने में संकोच किया, गुलामी काल में भारतीय सभ्यता और हमारी जीवन शैली अपमानित करने का काम किया, हमारे जीवन मूल्यों को अपमानित और कमजोर किया गया वह स्वाधीनता के बाद भी जारी रहा है और आज भी हमारे गौरव शाली अतीत को बताने का प्रयास किया गया । एक प्रतिष्ठित अखबार ने लिखा भी है कि स्वाधीनता सही मायने में 2014 में प्राप्त हुई जब हमारे राजनैतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक मूल्यों को गौरांवित करने का सिलसिला आरंभ हुआ।
श्री ब्रजकांत जी ने कहा कि हमें अपने स्व विवेक जागृत करने की आवश्यकता है । जो भ्रम और पाश्चात्य संस्कृति का भारत में थोपने का प्रयास हो रहा है वह परिवारों और समाज को तोडऩे का प्रयास है और यह देश में वर्ग संघर्ष की स्थिती को उत्पन्न कर देश को कमजोर करने के षडयंत्र है उन्हें समझने का हमें प्रयास करना चाहिये ।
भारत को व्यापारिक साम्राज्यवादी ताकते कमजोर करने की मानसिकता से काम रही है । देश में अनेक प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न करना, और अस्थिरता पैदा करने के लिये विदेशी ताकते सक्रिय है । मुख्यवक्ता ने कहा कि मणीपुर में अशांति फैलाना, किसानों के आंदोलन करवाना, वर्ग संघर्ष की स्थिती बनाने के लिेय विदेशों से बड़ी फंडिंग हो रही है ।
श्री ब्रजकांत जी ने कहा कि देश की शासन व्यवस्था से हमे हमारे अधिकारों के लडऩा तो बताया जाता है परंतु हम अच्छे नागरिक बनकर देश के प्रति जो कर्तव्य है उनका पालन करे यह कौन बतायेंगा । आज देश को सशक्त बनाने की राह में अनेक चुनौतियां है उन निपटने के लिये यह बहुत आवश्यक है कि हम अच्छे नागरिक बने, परिवार की चिंता करें समाज की एकता को मजबूत करें पाश्चातीकरण से दूर रहे अपने संस्कारों और गौरव का स्मरण रखे ।




