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बरघाट जनपद में खरीदी पर फिर उठे सवाल: पैड मशीन और सोलर लाइट के बाद अब 'पेशाब घर' खरीदी का मामला गरमाया

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Dainik Yashonnati / Aug 08, 2026 09:11 pm / Post views : 210

बरघाट जनपद में खरीदी पर फिर उठे सवाल: पैड मशीन और सोलर लाइट के बाद अब 'पेशाब घर' खरीदी का मामला गरमाया
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बरघाट जनपद पंचायत भ्रष्टाचार - खरीदी पर सवाल: 25 पंचायतों में 24,500 के 'पेशाब घर' खरीदने का आरोप

Seoni 08 August 2026 सिवनी / बरघाट यशो:- जनपद पंचायत बरघाट में शासकीय राशि से की जा रही सामग्री खरीदी को लेकर एक के बाद एक सवाल खड़े हो रहे हैं। पैड मशीन और सोलर पैनल लाइट की खरीदी को लेकर उठे विवाद और शिकायतों की जांच पूरी भी नहीं हुई थी कि अब पंचायतों में फाइबर के 'पेशाब घर' खरीदी का मामला सामने आया है। आरोप है कि कई ग्राम पंचायतों में बिना पंचायत प्रस्ताव के सामग्री खरीदी गई और इसके एवज में लाखों रुपये का भुगतान किया गया।

मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि करीब 25 ग्राम पंचायतों में फाइबर के यूरिनल बॉक्स खरीदे गए और लगभग ढाई करोड़ रुपये का भुगतान एक निजी फर्म मां नर्मदा इंटरप्राइजेज, जेवनारा को किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इन आरोपों और भुगतान की वास्तविकता की पुष्टि के लिए अधिकृत रिकॉर्ड एवं जांच जरूरी है।

24,500 प्रति नग की दर पर खरीदी का आरोप

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायतों द्वारा खरीदे गए फाइबर के पेशाब घर की कीमत करीब 24,500 प्रति नग के हिसाब से भुगतान की गई। आरोप यह भी है कि सामग्री की गुणवत्ता बेहद खराब है और बाजार दर की तुलना में काफी अधिक कीमत पर खरीद की गई।

यदि ये आरोप दस्तावेजी जांच में सही पाए जाते हैं तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि एक ही सामग्री की दर किस आधार पर तय हुई और अलग-अलग पंचायतों ने किस प्रक्रिया के तहत इसकी खरीदी की?

इन पंचायतों में खरीदी और भुगतान का दावा

शिकायत में जिन पंचायतों का उल्लेख किया गया है, उनमें साल्है, पनवास, दौंदीवाड़ा, जन्मखारी, खाली, मानेगांव कला, बोरी खुर्द, धपारा, गंगेरूवा, गुर्रापाठा, मानेगांव खुर्द, आष्टा, लालपुर, टिकारी, आमागढ़, धोबीसर्रा, विजयपानी कला, चिरचिरा, उसरी, अरी, नयागांव और जाम सहित अन्य पंचायतें शामिल बताई गई हैं।

दावा है कि संबंधित पंचायतों में अलग-अलग संख्या में फाइबर के पेशाब घर खरीदे गए और कई मामलों में भुगतान भी किया जा चुका है।

पैड मशीन और सोलर लाइट की खरीदी भी सवालों में

बरघाट जनपद पंचायत में यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले करीब 20 पंचायतों में पैड मशीनों की खरीदी को लेकर भी सवाल उठ चुके हैं। आरोप लगाया गया है कि इनकी खरीदी निर्धारित दर से काफी अधिक कीमत पर की गई।

इसी तरह सोलर पैनल लाइट की खरीदी को लेकर भी कई पंचायतों में अधिक दर पर भुगतान किए जाने के आरोप लगे हैं। इन मामलों को लेकर उच्च अधिकारियों से शिकायत किए जाने की बात सामने आई है और जांच लंबित बताई जा रही है।

अब नए मामले ने यह सवाल और गंभीर कर दिया है कि आखिर पंचायतों में सामग्री खरीदी की निगरानी कौन कर रहा है और एक जैसी सामग्री अलग-अलग पंचायतों में किस प्रक्रिया के तहत खरीदी जा रही है?

जनपद अध्यक्ष की दुकान से खरीदी के आरोप

शिकायतकर्ताओं ने जनपद पंचायत अध्यक्ष पर राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपनी दुकान 'मां नर्मदा इंटरप्राइजेज' से पंचायतों को सामग्री खरीदने के लिए दबाव बनाए जाने का गंभीर आरोप लगाया है।

हालांकि यह गंभीर आरोप है, जिसकी स्वतंत्र प्रशासनिक जांच और दस्तावेजी सत्यापन आवश्यक है। यदि पंचायतों को वास्तव में किसी व्यक्ति या संस्था से सामग्री खरीदने के लिए दबाव डाला गया है, तो यह जांच का महत्वपूर्ण विषय होगा कि निर्देश किस स्तर से दिए गए और भुगतान की प्रक्रिया किसके अनुमोदन से पूरी हुई।

जनपद CEO बोलीं- हमने कोई खरीदी आदेश नहीं दिए

मामले में जनपद पंचायत बरघाट की मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतिभा परते ने स्पष्ट किया कि जनपद पंचायत की ओर से ऐसी किसी सामग्री की खरीदी के आदेश नहीं दिए गए हैं।

उन्होंने कहा—

“जनपद पंचायत बरघाट द्वारा ऐसे किसी को खरीदी के आदेश नहीं दिए गए हैं। पंचायतें किस मद से अपनी मर्जी से खरीदी कर रही हैं, यह नहीं मालूम। यदि शिकायत आती है तो हम जांच कराएंगे।”

वहीं ब्लॉक समन्वय अधिकारी टेकचंद तुमसरे ने भी कहा कि स्वच्छता अभियान के तहत किसी भी पंचायत को ऐसी सामग्री की खरीदी के आदेश नहीं दिए गए हैं।

अब जांच में खुलेगा खरीदी का पूरा खेल

एक तरफ पंचायत स्तर पर सामग्री खरीदी और भुगतान किए जाने के आरोप हैं, तो दूसरी तरफ जनपद पंचायत के अधिकारी किसी भी प्रकार के खरीदी आदेश जारी करने से इनकार कर रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि जनपद स्तर से आदेश नहीं दिए गए तो पंचायतों ने किस प्रस्ताव, किस प्रक्रिया और किस मद से इन सामग्रियों की खरीदी की?

अब पूरे मामले में पंचायतों के प्रस्ताव, कोटेशन, बिल, भुगतान वाउचर, जीएसटी बिल, सामग्री की वास्तविक बाजार कीमत और स्टॉक रजिस्टर की जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

कलेक्टर के हस्तक्षेप की मांग

मामले को लेकर शिकायतकर्ताओं ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि जिला प्रशासन इस मामले को संज्ञान में लेकर पंचायतवार खरीदी और भुगतान की जांच कराता है या नहीं।

यदि दस्तावेजों की जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह केवल एक सामग्री की खरीदी का मामला नहीं, बल्कि पंचायतों में शासकीय धन के उपयोग और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला हो सकता है।

दैनिक यशोन्नति की टिप्पणी: इस खबर में लगाए गए भ्रष्टाचार एवं दबाव से संबंधित आरोप शिकायत/दावे के आधार पर हैं। संबंधित अधिकारियों ने खरीदी के आदेश से इनकार किया है। आरोपों की अंतिम पुष्टि प्रशासनिक जांच एवं उपलब्ध दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही होगी।

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