सिवनी यशो :- जिले के विकासखंड कुरई अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चक्की खमरिया का संकुल इन दिनों गंभीर प्रशासनिक सवालों के घेरे में है। यहां एक शिक्षक पर तीन संतान नीति के नाम पर दो वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई की गई, जबकि इसी संकुल में चार शिक्षक ऐसे हैं जिनकी तीन संतानें हैं, फिर भी उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं की गई।इस कथित भेदभावपूर्ण और चयनात्मक कार्रवाई को लेकर उच्च माध्यमिक शिक्षक राजेन्द्र राव देशमुख ने दिनांक 30 दिसंबर 2025 को कलेक्टर, जिला सिवनी के समक्ष जनसुनवाई आवेदन प्रस्तुत कर न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
“एक ही विद्यालय में दो शिक्षक, दोनों की तीन संतान — एक पर कार्रवाई, दूसरे पर मौन! यह किस नियम का न्याय है?”
सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि इसी विद्यालय में एक अन्य शिक्षक भी हैं जिनकी तीन संतानें हैं, लेकिन उनके विरुद्ध न तो कोई शिकायत दर्ज की गई, न ही वेतन वृद्धि रोकने की कार्रवाई हुई। जबकि एक ही विद्यालय, एक ही नियम और एक जैसी स्थिति होने के बावजूद केवल एक शिक्षक को दंडित किया गया। यह स्थिति साफ तौर पर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या नियम सभी के लिए समान हैं, या कार्रवाई चयनात्मक और विद्वेषपूर्ण है?
मुख्य आरोप: नीति नहीं, विद्वेष में की गई कार्रवाई
आवेदन में स्पष्ट कहा गया है कि तीन संतान के आधार पर केवल आवेदक के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई गई और दो वेतन वृद्धि रोकने का प्रस्ताव संभागीय कार्यालय भेजा गया। जबकि RTI के माध्यम से प्राप्त जानकारी यह साबित करती है कि संकुल में चार अन्य शिक्षक भी तीन संतान वाले हैं। इसके बावजूद न उनके विरुद्ध कोई प्रस्ताव भेजा गया, न वेतन वृद्धि रोकी गई।RTI से खुली पूरी परत
सबसे गंभीर तथ्य यह है कि - तीन संतान वाले शिक्षकों की सूची स्वयं संकुल प्राचार्य द्वारा RTI में प्रदान की गई है। इससे यह सवाल उठता है कि- यदि नीति लागू थी, तो केवल एक शिक्षक की तीन संतान पर वेतन वृद्धि रोकना किस आधार पर उचित ठहराया जाएगा? एक पर दंड और अन्य पर मौन क्यों?आवेदन में दर्ज अन्य गंभीर आरोप
- शैक्षणिक नुकसान: सत्र 2024-25 में जोगीवाड़ा, कटंगी बंजर व भालीवाड़ा स्कूलों में अतिथि शिक्षकों की भर्ती नहीं की गई, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हुई।
- आदेश की अवहेलना: आयुक्त, भोपाल के निर्देश के बावजूद संकुल में शिक्षकों का संलग्नीकरण समाप्त नहीं किया गया।
- विषय से खिलवाड़: रसायन शास्त्र के स्थान पर जीव विज्ञान के शिक्षक से वर्षों तक रसायन पढ़वाया गया।
- क्रमोन्नति रोकी: 24 वर्ष सेवा पूर्ण करने के बावजूद द्वितीय क्रमोन्नति नहीं दी गई, जबकि अन्य सभी शिक्षकों को लाभ मिल चुका है।
- DA एरियर में भेदभाव: आवेदक का DA एरियर रोका गया, अन्य सभी शिक्षकों को भुगतान हो चुका है।
- मान्यता शुल्क पर सवाल: माध्यमिक शिक्षा मंडल की मान्यता शुल्क 5 वर्षों से किस मद से दी जा रही है, इसकी जानकारी तक नहीं दी जा रही।
- जनभागीदारी राशि: बाउंड्री वॉल निर्माण से जुड़ी राशि के बिल-वाउचर RTI में भी नहीं दिए गए।
- प्रभारियों की जानकारी छिपाई: विभिन्न मदों के प्रभारियों की सूची देने से इनकार।
- एक खाते पर नियंत्रण: वर्षों से एक ही महिला शिक्षिका के नाम से खाते का संचालन।
- नियम विरुद्ध नियुक्ति: अंग्रेजी विषय में अप्रशिक्षित नॉन D.Ed/B.Ed अतिथि शिक्षक वर्षों से रखे गए।
प्रशासन के सामने सीधा सवाल
आवेदक का कहना है कि- यह पूरा मामला केवल एक शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई तक सीमित नहीं, बल्कि संपूर्ण संकुल में प्रशासनिक मनमानी का संकेत देता है। अब निगाहें कलेक्टर पर टिकी हैं कि- क्या तीन संतान नीति के नाम पर हुए इस कथित भेदभाव और अन्य अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होगी, या मामला फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।यदि तीन संतान नीति लागू करनी थी, तो वह सभी तीन संतान वाले शिक्षकों पर समान रूप से क्यों नहीं लागू की गई? और यदि नीति लागू नहीं थी, तो केवल एक शिक्षक की तीन संतान पर वेतन वृद्धि रोकना किस आधार पर उचित ठहराया जाएगा?
(यह समाचार जनसुनवाई आवेदन, RTI दस्तावेजों एवं उपलब्ध अभिलेखों पर आधारित है।)
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सिवनी में तीन संतान के नाम पर शिक्षक की वेतन वृद्धि रोके जाने का मामला जनसुनवाई में पहुंचा