सिवनी में मक्का संकट चरम पर: “किसान बोला—रोने को जी चाहता है”, खेतों में सड़ रहा मक्का, सरकार वादों से पीछे – आंदोलन की तैयारी तेज
10 दिसंबर को बड़ा प्रदर्शन, जीतू पटवारी होंगे शामिल | विधायक दिनेश राय ‘मुनमुन’ ने कहा सरकार दखल दे,और ठा. रजनीश हरवंश सिंह ने सरकार को घेरा
Seoni 06 December 2025
सिवनी यशो:- मध्यप्रदेश का मक्का बेल्ट कहलाने वाला सिवनी इस समय भयानक कृषि संकट से गुजर रहा है। खेतों में झूमकर लहराई फसल अब किसानों की आँखों में आँसू बनकर तैर रही है। मक्के के दाम इतने नीचे गिर गए हैं कि किसान मेहनत, लागत और हड्डियाँ तोड़कर उगाई गई फसल को खेतों में ही सड़ने के लिए छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
गांवों में किसान खुले शब्दों में कह रहे हैं—
“मेहनत का दाम न मिले तो रोने को जी चाहता है।”
यह वाक्य सिर्फ दर्द नहीं, बल्कि इस वर्ष की खेती का संपूर्ण चित्रण बनकर उभरा है।
कीमत आधी, खर्च दोगुना – खेतों में ढेर होता मक्का
इस बार जिले और आसपास के क्षेत्रों में मक्का का उत्पादन काफी बढ़ा, लेकिन बाजार में मक्का 1200–1500 रुपये क्विंटल के बीच बिक रहा है—जो किसान की लागत तक नहीं पहुँचता।
• डीजल महंगा
• यूरिया–DAP महंगी
• मजदूरी महंगी
• लेकिन फसल का दाम आधा
यही कारण है कि कई गांवों में किसान ने गाहनी रोक दी, भुट्टे खेतों में ही पड़े हैं और कृषि अर्थव्यवस्था की साँसें अटकने लगी हैं।
किसान की चीत्कार – “हमने उम्मीद में रबी में भी मक्का बोया, अब बर्बादी सामने खड़ी है”
रबी सीजन में भी कई किसानों ने गेहूँ–चना छोड़कर मक्का बोयी, क्योंकि पिछले वर्ष दाम अच्छे मिले थे।
लेकिन इस बार हालात उलट हैं।
एक किसान ने बताया—
“मक्का बोकर सोच रहे थे घर चलेगा, पर अब घर चलाने लायक दाम ही नहीं। खेत में पड़ा मक्का देखकर दिल फटता है।”
यह सिर्फ एक किसान नहीं… हजारों किसानों की यही हालत है।
राजनीति गर्माई – कांग्रेस का 10 दिसंबर को बड़ा आंदोलन, जीतू पटवारी होंगे सिवनी में
मक्का संकट अब राजनीतिक संघर्ष का भी बड़ा मुद्दा बन चुका है।
कांग्रेस ने 10 दिसंबर को जिला स्तरीय विशाल आंदोलन का ऐलान किया है।
• प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी स्वयं सिवनी आने वाले हैं
• जिला कांग्रेस व किसान कांग्रेस ने आपात बैठक कर रणनीति बनाई
• किसानों की समस्याओं को लेकर प्रशासन को घेरने की तैयारी
कांग्रेस का आरोप—
“सरकार किसानों को बाजार के हवाले छोड़ रही है, राहत नहीं दे रही।”
सिवनी विधायक दिनेश राय ‘मुनमुन’ का बड़ा बयान—“एथेनॉल कंपनियों ने सिंडिकेट बनाकर मक्का रेट गिराए”
विधायक दिनेश राय मुनमुन ने मक्का दाम गिरने के पीछे एथेनॉल कंपनियों को कटघरे में खड़ा किया है।
उनका आरोप—
कंपनियाँ मक्का छोड़कर चावल से एथेनॉल बना रही हैं
कंपनियों ने सिंडिकेट बनाकर मक्का के भाव गिराए
जबकि उन्हें सरकार से सब्सिडी भी मिलती है
किसानों को इसका सीधा नुकसान
मुनमुन ने कहा—“इसकी उच्चस्तरीय जांच होना ही चाहि
अब केवलारी से भी सरकार पर निशाना – ठा. रजनीश हरवंश सिंह ने खोला मोर्चा
केवलारी विधायक ठाकुर रजनीश हरवंश सिंह ने भी मक्का संकट को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।
उन्होंने बताया कि—
“मैंने विधानसभा में इस पूरे मसले को उठाया है और साफ कहा है कि मक्का को समर्थन मूल्य पर खरीदना जरूरी है। सरकार ने चुनाव में किसानों से वादा किया था—
• गेहूँ ₹2700 में खरीदेगी
• धान ₹3100 में खरीदेगी
लेकिन अब सरकार किसान से मुकर गई। यह धोखा है।”
विधायक का तीखा बयान—
“मक्का 1200–1500 में बिक रहा है। यह किसान की मेहनत का अपमान है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था चरमराई – मंडियों में सन्नाटा, खरीददार गायब
• सिवनी, बालाघाट, मंडला और छिंदवाड़ा—सब जगह मक्का संकट
• मंडियों में आवक कम
• खरीदार रेट गिरने का इंतजार कर रहे
• किसान भंडारण के लिए संघर्ष कर रहे
कई परिवारों का बजट खेती पर निर्भर है, और मक्का का यह संकट अब उन्हें कर्ज, संकट और बेरोजगारी की ओर धकेल रहा है।
सिवनी का मक्का संकट केवल फसल का नहीं, किसान की उम्मीद का संकट बन गया है
10 दिसंबर का आंदोलन तय करेगा—
क्या सरकार किसानों की आवाज सुनेगी?
क्या समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू होगी?
क्या एथेनॉल कंपनियों की जांच होगी?
किसानों की नज़रें
अब राजनीति नहीं, राहत पर टिकी हैं।
और हर खेत से एक ही आवाज उठ रही है—
“हमारी फसल को बचाओ… हमें हमारा दाम दो।” किसान बोला रोने को जी चाहता है
प्रदेश सरकार ने 2600 रुपए प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने का निर्णय लिया



