मध्यप्रदेशराजनीति

मध्य प्रदेश भाजपा में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल

हितानंद शर्मा को नई जिम्मेदारी, प्रचारकों के दायित्व भी बदले

विद्या भारती से संगठन महामंत्री तक का सफर: संघ पृष्ठभूमि से भाजपा रणनीति के केंद्र तक हितानंद शर्म

Bhopal 31 January 2026

विद्या भारती से संगठन महामंत्री तक का सफर हितानंद शर्मा को भाजपा के उन नेताओं में खड़ा करता है, जिन्होंने जमीनी स्तर से संगठन की शीर्ष जिम्मेदारी तक का रास्ता तय किया है। संघ पृष्ठभूमि, कैडर अनुशासन और रणनीतिक सोच उनकी पहचान रही है।

भोपाल यशो:-  मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक ढांचे में अहम बदलाव करते हुए प्रदेश संगठन महामंत्री रहे हितानंद शर्मा को अब मध्य क्षेत्र का सह-बौद्धिक प्रमुख नियुक्त किया है। उनकी नई कार्यस्थली जबलपुर निर्धारित की गई है। संगठन सूत्रों के मुताबिक यह बदलाव तत्कालिक नहीं बल्कि दीर्घकालिक रणनीति के तहत किया गया है।

अशोकनगर निवासी हितानंद शर्मा मूल रूप से चंबल अंचल से आते हैं और संघ पृष्ठभूमि के कारण संगठन में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। वे लंबे समय तक विद्या भारती से जुड़े रहे हैं और जमीनी स्तर से संगठन को समझने वाले नेताओं में उनकी गिनती होती है।

प्रचारकों की जिम्मेदारियों में भी बदलाव

संगठनात्मक फेरबदल के तहत तीन प्रचारकों के दायित्वों में भी परिवर्तन किया गया है—

सुरेंद्र मिश्रा को अब पूर्व सैनिक सेवा परिषद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

मुकेश त्यागी को ग्राहक पंचायत का दायित्व दिया गया है।

ब्रजकिशोर भार्गव को क्षेत्र गो सेवा प्रमुख नियुक्त किया गया है।

विद्या भारती से संगठन महामंत्री तक का सफर

भाजपा संगठन से पहले हितानंद शर्मा लगभग एक दशक तक विद्या भारती से जुड़े रहे। इसके पूर्व वे संघ में तहसील प्रचारक, जिला प्रचारक और विभाग प्रचारक जैसे महत्वपूर्ण दायित्व निभा चुके हैं।

संगठनात्मक अभियानों की गहरी समझ और कैडर प्रबंधन में दक्षता उनके कामकाज की पहचान रही है।

वर्ष 2020 में उन्हें सह-संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इसके बाद 2022 में उन्होंने सुहास भगत के स्थान पर प्रदेश संगठन महामंत्री का पद संभाला।

विशेष रूप से ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में संघ और भाजपा संगठन पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है।

अनुशासन और रणनीति के लिए जाने जाते हैं

संगठन के भीतर हितानंद शर्मा को अनुशासनप्रिय, कैडर आधारित कार्यशैली और रणनीतिक सोच के लिए जाना जाता है।

तहसील स्तर से शुरुआत कर जिला, विभाग और फिर प्रदेश स्तर तक पहुंचना उनके संगठनात्मक सफर को दर्शाता है।

चुनावी सफलता में निभाई अहम भूमिका

उनके कार्यकाल में संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ चुनावी रणनीतियों को भी नई धार मिली।

बूथ सशक्तिकरण अभियान, तकनीक का प्रभावी उपयोग और

मंडल स्तर तक निरंतर प्रवास को संगठन में बड़ा बदलाव माना गया।

विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली बड़ी जीत और लोकसभा चुनाव में प्रदेश की सभी 29 सीटों पर विजय के पीछे उनकी पर्दे के पीछे की रणनीतिक भूमिका को संगठन में अहम माना जा रहा है।

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