निलंबन से सागर अटैच हुए थे मिश्रा, अब ‘स्टे’ के सहारे सिवनी वापसी की चर्चा; 17 अगस्त को फिर संभालेंगे कुर्सी?
8 जून के शासनादेश में मुख्यमंत्री मॉनिट के प्रकरणों में अनावश्यक विलंब को बनाया गया था निलंबन का आधार, अब वापसी की खबर से आरईएस में फिर हलचल
उपेन्द्र मिश्रा सिवनी वापसी की चर्चा, निलंबन के बाद स्टे से 17 अगस्त को संभालेंगे कुर्सी?
Seoni 14 August 2026
सिवनी यशो:- सरकारी कुर्सियों का भी अपना अलग ही गणित है… कभी आदेश आता है—“तत्काल प्रभाव से निलंबित”, मुख्यालय सागर तय हो जाता है और कुर्सी किसी दूसरे अधिकारी को सौंप दी जाती है। फिर समय बदलता है, अदालत का दरवाजा खटखटता है और अब वही कुर्सी दोबारा बुलावा देती नजर आती है!
आरईएस के कार्यपालन यंत्री उपेन्द्र प्रसाद मिश्रा को लेकर सिवनी में इन दिनों कुछ ऐसी ही चर्चा है। 8 जून 2026 को मध्यप्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा जारी आदेश में उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर अधीक्षण यंत्री, ग्रामीण यांत्रिकी सेवा, मंडल कार्यालय सागर को उनका मुख्यालय बनाया गया था।
शासन के आदेश में निलंबन का कारण मुख्यमंत्री मॉनिट के प्रकरणों में कार्यवाही करने में अनावश्यक विलंब बताया गया था। साथ ही सिवनी आरईएस कार्यपालन यंत्री का अस्थायी प्रभार सहायक यंत्री लालचंद मरावी को सौंपा गया था।
अब चर्चा है कि हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद मिश्रा फिर सिवनी लौट रहे हैं और 17 अगस्त को कार्यपालन यंत्री का पदभार संभाल सकते हैं। हालांकि न्यायालय के आदेश और पदभार ग्रहण की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
8 जून के आदेश ने मचा दी थी हलचल
मध्यप्रदेश शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के 8 जून 2026 के आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि उपेन्द्र प्रसाद मिश्रा के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई अपेक्षित है। इसी आधार पर उन्हें मध्यप्रदेश सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9(1)(क) के तहत निलंबित किया गया।
निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिए जाने का भी आदेश में उल्लेख है।
सागर से फिर सिवनी… तो सवाल भी लौटेंगे!
अब यदि मिश्रा वास्तव में हाईकोर्ट की राहत के बाद सिवनी लौटते हैं, तो स्वाभाविक रूप से सवाल भी लौटेंगे।
जिस अधिकारी को शासन ने मुख्यमंत्री मॉनिट के प्रकरणों में अनावश्यक विलंब के मामले में निलंबित किया था, उनकी वापसी किन शर्तों पर हुई? हाईकोर्ट का आदेश क्या कहता है? विभाग ने उसके बाद क्या निर्णय लिया?
इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है।
कुछ चेहरे खुश, कुछ मायूस!
साहब की वापसी की चर्चा के बीच विभाग से जुड़े ठेकेदारों के बीच भी अलग-अलग प्रतिक्रियाओं की चर्चा है। कथित तौर पर कुछ ठेकेदार इसे “घर वापसी” जैसा मानकर खुश हैं, तो कुछ के चेहरे पर चिंता की लकीरें दिखाई देने की बातें कही जा रही हैं।
आखिर आरईएस की फाइलें और ठेकेदारी का गणित भी कम दिलचस्प नहीं होता—किसकी फाइल तेजी से चलेगी और किसकी फाइल को ब्रेक लगेगा, यह तो साहब की वापसी के बाद ही पता चलेगा!
अब निगाह हाईकोर्ट के आदेश पर
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज अब हाईकोर्ट का कथित स्टे/राहत आदेश होगा। यदि मिश्रा को न्यायालय से राहत मिली है तो उसके आधार और प्रभाव को सार्वजनिक किए जाने से स्थिति स्पष्ट होगी।
फिलहाल 8 जून का शासनादेश यह जरूर बताता है कि उपेन्द्र प्रसाद मिश्रा को निलंबित किया गया था और उनका मुख्यालय सागर निर्धारित किया गया था।
अब देखना दिलचस्प होगा कि 17 अगस्त को सिवनी में सिर्फ कार्यपालन यंत्री की वापसी होती है या फिर आरईएस की पुरानी चर्चाओं का भी ‘री-एंट्री शो’ शुरू होता है।
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