मनरेगा बना लूट का अड्डा! जिला पंचायत अध्यक्ष मालती डहेरिया की शिकायत पर राज्य स्तर से जाँच दल गठित
कुरई–लखनादौन–घंसौर में प्रतिबंधित कार्यों की स्वीकृति, RES कार्यपालन यंत्री की भूमिका संदिग्ध
सरकारी प्रतिबंध के बाद भी करोड़ों के काम, कौन दे रहा था संरक्षण?
Seoni, December 15, 2025
सिवनी यशो:- महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को सिवनी जिले में भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला बना दिया गया।
राज्य शासन द्वारा 01 जुलाई 2024 से प्रतिबंधित चेकडेम, स्टॉपडेम व पुलिया जैसे सामग्री मूलक कार्यों को जनपद पंचायत कुरई, लखनादौन एवं घंसौर में खुलेआम स्वीकृति दी गई।
इस गंभीर मामले में जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मालती मुकेश डहेरिया द्वारा मुख्यमंत्री को की गई शिकायत के बाद अब राज्य स्तर से उच्च स्तरीय जाँच दल गठित किया गया है।
RES कार्यपालन यंत्री की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल
पूरे प्रकरण का मुख्य केंद्र ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) का वह कार्यपालन यंत्री है, जिसकी बिना जानकारी—
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प्रतिबंधित कार्यों की स्वीकृति
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तकनीकी मंजूरी
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ऑनगोइंग दर्ज
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जिओ-टैगिंग
संभव ही नहीं मानी जा सकती।
👉 सवाल यह नहीं कि भ्रष्टाचार हुआ या नहीं,
👉 सवाल यह है कि इतना बड़ा खेल किसके इशारे पर चला?
तीन जनपद, एक ही भ्रष्टाचार की स्क्रिप्ट
जाँच आदेश में स्पष्ट है कि—
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कुरई
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लखनादौन
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घंसौर
तीनों जनपद पंचायतों में—
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सहायक यंत्रियों द्वारा नियम विरुद्ध तकनीकी स्वीकृति
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APO स्तर पर जिओ-टैग और ऑनगोइंग में हेरफेर
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और अंततः गुणवत्ता विहीन निर्माण
➡️ यह स्पष्ट संकेत है कि यह व्यक्तिगत गलती नहीं बल्कि संगठित भ्रष्टाचार है।
ठेकेदार राज: सवाल उठाओ तो धमकी
ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार—
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घटिया निर्माण पर सवाल उठाने वालों को
👉 ठेकेदारों ने डराया
👉 धमकाया
👉 गुंडागर्दी तक की
सूत्र बताते हैं कि इन ठेकेदारों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है, जिसकी चर्चा—
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स्थानीय मीडिया
में लंबे समय से होती रही है।
मुख्यमंत्री कार्यालय की दखल से हिली व्यवस्था
श्रीमती मालती डहेरिया की शिकायत पर—
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मुख्यमंत्री कार्यालय ने संज्ञान लिया
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राज्य रोजगार गारंटी परिषद, भोपाल ने
👉 दो वरिष्ठ अधिकारियों की जाँच टीम गठित की
जाँच दल को 15 दिवस में प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश हैं।
अब बड़ा सवाल: कार्रवाई या लीपापोती?
जनता पूछ रही है—
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क्या RES कार्यपालन यंत्री पर गाज गिरेगी?
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क्या सहायक यंत्री और APO बच पाएंगे?
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क्या राजनीतिक संरक्षण प्राप्त ठेकेदारों पर कार्रवाई होगी?
या फिर—
⚠️ जाँच रिपोर्ट फाइलों में दफन कर दी जाएगी?
दैनिक यशोन्नति का सवाल
मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना को
➡️ लूट का अड्डा बनाने वालों पर
➡️ कठोर कार्रवाई कब होगी?
यह सिर्फ सिवनी का मामला नहीं,
यह पूरे सिस्टम की जवाबदेही का प्रश्न है।
✍️ (क्रमशः…)
अगले अंक में—
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कार्यवार भ्रष्टाचार का खुलासा
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जिम्मेदार अधिकारियों के नाम
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ठेकेदार–नेता–अधिकारी गठजोड़ का पूरा नक्शा
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🏛️ CM–ACTION TRACKER | मनरेगा भ्रष्टाचार मामला (सिवनी)
| क्रम | कार्रवाई बिंदु | स्थिति |
|---|---|---|
| 1️⃣ | जिला पंचायत अध्यक्ष मालती मुकेश डहेरिया द्वारा मुख्यमंत्री को लिखित शिकायत | ✅ प्राप्त |
| 2️⃣ | मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को पत्र जारी | ✅ निर्देशित |
| 3️⃣ | राज्य शासन का स्पष्ट आदेश: 01.07.2024 के बाद चेकडेम/स्टॉपडेम/पुलिया प्रतिबंधित | ❌ उल्लंघन |
| 4️⃣ | कुरई / लखनादौन / घंसौर में प्रतिबंधित कार्यों की स्वीकृति | ⚠️ जांचाधीन |
| 5️⃣ | RES कार्यपालन यंत्री द्वारा तकनीकी अनुमति की भूमिका | 🔍 संदेह के घेरे में |
| 6️⃣ | सहायक यंत्री एवं APO द्वारा जिओ-टैग/ऑनगोइंग स्वीकृति | 🔍 जांचाधीन |
| 7️⃣ | घटिया व गुणवत्ता विहीन निर्माण की पुष्टि | ⚠️ प्रारंभिक साक्ष्य |
| 8️⃣ | राज्य स्तर से उच्च स्तरीय जांच दल गठित | ✅ आदेश जारी |
| 9️⃣ | जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की समय-सीमा | ⏳ 15 दिवस |
| 🔟 | दोषियों पर निलंबन / एफआईआर / वसूली | ❓ प्रतीक्षित |
🔥 जनता की नजर अब मुख्यमंत्री पर
क्या भ्रष्टाचारियों पर कार्रवाई होगी या जाँच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगी?



