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बैंक ऑफ महाराष्ट्र पलारी की लापरवाही से किसान बर्बाद चेक गुम, खाता खाली… एक लाख डूबा

Dainik Yashonnati

Dainik Yashonnati / Dec 14, 2025 01:48 pm / Post views : 355

बैंक ऑफ महाराष्ट्र पलारी की लापरवाही से किसान बर्बाद चेक गुम, खाता खाली… एक लाख डूबा
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खैरा पलारी (सिवनी) यशो:- सिवनी जिले के केवलारी विकासखंड अंतर्गत ग्राम खैरा पलारी स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र एक बार फिर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की कथित घोर लापरवाही ने एक मेहनतकश किसान को ऐसा आर्थिक झटका दिया है, जिससे वह पूरी तरह टूट गया है। मामला केवल एक चेक के गुम होने का नहीं, बल्कि बैंकिंग व्यवस्था में जवाबदेही के अभाव का गंभीर उदाहरण बन गया है।

किया चेक जमा , लेकिन खाते में नहीं आई रकम

ग्राम नवीन पलारी निवासी किसान मनोज ठाकुर ने बताया कि उन्होंने हाल ही में एक प्लॉट का सौदा किया था। सौदे के तहत उन्होंने एक लाख रुपये बयाने में देकर प्लॉट बुक किया था। प्लॉट की अंतिम रजिस्ट्री की तिथि 4 दिसंबर 2025 तय थी। रजिस्ट्री के लिए पैसों की जरूरत पड़ने पर किसान ने अपनी मक्का की फसल कम दाम पर बेचने का मजबूरन निर्णय लिया। श्रीराम ट्रेडर्स, पलारी द्वारा उन्हें 1,50,645 रुपये का चेक दिया गया, जिसे किसान ने अपने बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पलारी स्थित बचत खाते में जमा कर दिया।

एक ही बैंक के खातों के बावजूद लटकता रहा भुगतान

चौंकाने वाली बात यह है कि चेक देने वाली फर्म का खाता भी उसी बैंक में है, इसके बावजूद बैंक द्वारा कई दिनों तक राशि खाते में स्थानांतरित नहीं की गई। 3 दिसंबर तक किसान ने  इंतजार किया, लेकिन जब 4 दिसंबर को रजिस्ट्री के दिन भी खाते में पैसे नहीं आए, तो उन्होंने प्लॉट विक्रेता से दो दिन का समय मांगा।

देरी की कीमत चुकाई किसान ने

6 दिसंबर 2025 तक भी बैंक द्वारा कोई राशि ट्रांसफर नहीं की गई। परिणामस्वरूप प्लॉट की रजिस्ट्री रद्द हो गई और किसान का एक लाख रुपये का बयाना पूरी तरह डूब गया। यह नुकसान केवल आर्थिक नहीं, बल्कि उस किसान के सपनों और भविष्य पर सीधा प्रहार है।

ब्रांच मैनेजर ने स्वीकार की चेक गुम होने की बात

मामले ने उस समय गंभीर मोड़ ले लिया जब पलारी ब्रांच मैनेजर वैभव खरात ने कथित तौर पर चेक गुम हो जाने की बात स्वीकार की। यह स्वीकारोक्ति बैंक की कार्यप्रणाली पर बेहद गंभीर सवाल खड़े करती है— चेक बैंक से कैसे गुम हुआ? जिम्मेदार अधिकारी कौन है? किसान को हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा?

पुलिस चौकी और उच्च अधिकारियों से शिकायत

पीड़ित किसान ने इस पूरे मामले की पुलिस चौकी पलारी में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। साथ ही बैंक ऑफ महाराष्ट्र के उच्च अधिकारियों को भी आवेदन भेजकर— 1,50,645 रुपये तत्काल खाते में जमा कराने, डूबे हुए एक लाख रुपये की भरपाई, और लापरवाह अधिकारियों व कर्मचारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की मांग की है।

पहले भी विवादों में रहा है बैंक

स्थानीय लोगों का कहना है कि बैंक ऑफ महाराष्ट्र,खैरा पलारी के अधिकारी-कर्मचारी पहले भी लापरवाह रवैये और हितग्राहियों से दुर्व्यवहार को लेकर विवादों में रहे हैं। पूर्व में भी इसकी शिकायतें की जा चुकी हैं और यह मुद्दा प्रिंट मीडिया में प्रकाशित हो चुका है, लेकिन सुधार के ठोस प्रयास नहीं किए गए।

सवालों के घेरे में बैंकिंग सिस्टम

यह मामला केवल एक किसान का नहीं है, बल्कि यह सवाल खड़ा करता है कि— क्या ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों की मेहनत की कमाई सुरक्षित है? क्या बैंकिंग तंत्र में आम आदमी की कोई सुनवाई है? क्या गलती हमेशा उपभोक्ता की ही मानी जाएगी?

न्याय या फाइलों में दबी कार्रवाई?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बैंक प्रशासन पीड़ित किसान को न्याय दिलाएगा या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबा दिया जाएगा। किसान की नजर अब प्रशासन और बैंक के शीर्ष अधिकारियों पर टिकी है।

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