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नगरीय निकाय के अध्यक्षों को मोहन सरकार ने दिया अभयदान

सिवनी यशो:- मध्यप्रदेश के अनेक नगरीय निकायों में अध्यक्षों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने सुगबुगाहट तेज हो रही थी और निर्वाचित अध्यक्ष अविश्वास प्रस्ताव की चल रही योजनाओं से घबराएं हुए थे। 

मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने 20 अगस्त को मंत्री परिषद ने एक फैसले के माध्यम से पार्षदों के असंतोष से भयभीत अध्यक्षों को अभयदान प्रदान करते हुए अविश्वास प्रस्ताव लाने की समयसीमा दो वर्ष के स्थान पर तीन वर्ष कर दिया। 

मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 43-क में शब्द ” दो वर्ष” के स्थान पर “तीन वर्ष” स्थापित किये जाने हेतु संशोधन के संबंध में मध्यप्रदेश नगर पालिका (द्वितीय संशोधन) अध्यादेश 2024 पर स्वीकृति दी गई।

मोहन सरकार मंत्री मंडल के इस निर्णय से नगर सरकार के अध्यक्षों को अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से हटाने का दबाव बनाने वाले पार्षदों के मंसूबों पर पानी फिर गया।

अविश्वास प्रस्ताव होने की अवधि 3 वर्ष हो जाने से अध्यक्षों के विरुद्ध तीन वर्ष बाद भी कोई अविश्वास प्रस्ताव लाने की नहीं सोचेगा इसके पीछे कारण यह है कि अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए जहां दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है वहीं इसके पश्चात जो प्रक्रिया होती है वह प्रक्रिया भी लगभग 1 वर्ष तक चलती है ऐसे में अध्यक्षों को यह सुरक्षा भी प्राप्त हो रही है कि उनके विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने का कोई सोचेगा भी नहीं क्योंकि इससे नए अध्यक्ष का निर्वाचन बहुत अधिक कार्य का समय नहीं देता ।

Dainikyashonnati

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