छिंदवाड़ा
कन्हान काम्पलेक्स की लोकसुनवाई में अधिकारियों ने निभाई औपचारिकता
पर्यावरण को लेकर लोक सुनवाई में किसानों ने की नाराजी व्यक्त, कई किसानों को बोलने नहीं दिया गया, महज एक घंटे में सिमट गई लोक सुनवाई
Chhindwara 15 May 2025
छिंदवाड़ा यशो:- क्षेत्रीय कार्यालय छिन्दवाड़ा पॉल्युशन कंट्रोल बोर्ड द्वारा सिंचाई विभाग की प्रस्तावित सीआईसी बैलेंसिंग जलाशय परियोजना कन्हान उप क्षेत्र तहसील एवं जिला पांढुर्ना की पर्यावरण स्वीकृति हेतु लोक सुनवाई ग्राम खड़की, तहसील व जिला पांढुर्ना में आयोजित की गयी जिसमे उक्त परियोजना से पर्यावरण पर पडऩे वाले प्रभाव के सम्बन्ध में जन सामान्य से विचार सुझाव, आपत्ति , टिका टिप्पणी इत्यादि आमंत्रित किये गये लोक सुनवाई के दौरान परियोजना से प्रभावित किसान परिवारों में जमीन के मुआवजे एवम पुनर्स्थापन को लेकर नाराजगी नजर आयी। छिन्दवाड़ा प्रदूषण विभाग, सिंचाई विभाग ने जन मानस को वास्तविक तथ्यों से अनभिज्ञ रख कर प्रशासन की आंखों में धूल झोंकने का प्रयास कर लोक सुनवाई आयोजित की।
जो ग्राम डैम से प्रभावित हो रहे है उन्ही ग्रामवासियों को बोलने का अवसर दिया गया डूब क्षेत्र से प्रभावित लोगों के अलावा किसी को भी बोलने नही दिया गया जबकि अखबार में प्रकाशित सूचना में आम जन मानस से सुझाव, विचार, आपत्ति मांगी गयी थी उसमें कंही नही लिखा था कि केवल डूब क्षेत्र के व्यक्ति ही बात रख सकते है । पांढुर्ना के कुछ सामाजिक लोगो ने अपनी बात रखनी चाही तो उन्हें सुनने से मना कर दिया गया पांढुर्ना निवासी प्रकाश सिरस्कर, श्रीमती प्रेरणा धुर्वे, दिलीप सावदे आदि बड़ी संख्या में लोग लोकसुनवाई से रूष्ट हो कर चले गये उनकी यह शिकायत थी कि वे बड़ी उम्मीद से अपनी बात रखने आये थे उनका कहना है कि पर्यावरण अध्यन 10 कि. मी. के दायरे में किया गया है पांढुर्ना भी उसी दायरे में आता है तो फिर उन्हें अपनी बात रखने से क्यो वंचित रखा गया। नानंदवाड़ी निवासी संजय इरपाची का कहना पड़ा कि पर्यावरण अध्यन से सम्बंधित कोई भी रिपोर्ट पंचायतो को उपलब्ध नही कराई गई तो ग्रामीण कैसे अपनी बात रखे।
ग्राम पंचायत भूयारी के सरपंच ने जमीन अधिग्रहण को लेकर अपनी बात रखनी चाही तो उन्हें यह कह कर शांत कर दिया गया कि सिर्फ पर्यावरण के संबंध में ही अपनी बात रखे लोकसुनवाई समिति की ओर से ग्रामीणों को संतोषजनक जवाब प्राप्त नही हुए।
समाजसेवी एवं परियोजना मामलों के जानकार जितेंद्र सिंह चौहान का कहना पड़ा कि उन्होंने अपने जीवन मे पहली बार किसी लोकसुनवाई में केंद्र सरकार द्वारा जारी 14 सितंबर 2006 के ईआईए नोटिफिकेशन को हिटलर रवैय्ये द्वारा होते हुए देखा है। श्री चौहान ने इस लोकसुनवाई को फर्जी करार दिया तथा शासन से ऐसी लोक सुनवाई को निरस्त करने की मांग की ।



