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छिंदवाड़ाधर्मनरसिंगपुरबालाघाटमंडलामध्यप्रदेशसिवनी

30 अगस्त को “श्रावणी” बैनगंगा के पावन तट पर प्रात: 10 बजे

*यज्ञोपवीत पूजन एवं सप्त ऋषि पूजन पूजन होगा
*अनेक विद्वत्जन एवं ब्राह्मणजन इस अवसर पर उपस्थित रहेंगे
* सभी ब्राह्मणों को श्रावणी पर्व में उपस्थित होने किया गया आह्वान

 

सिवनी यशो:- श्रावण शुक्ल पूर्णिमा दिनांक 30 अगस्त 2023 को ब्राह्मणों का मुख्य पर्व श्रावणी बैनगंगा के पावन तट लखनवाड़ा में प्रात: 10 बजे वैदिक विधि विधान से मनाया जावेगा। विगत सन् 1980 से यह श्रावणी का पर्व परमपूज्य धर्मसम्राट जगद्गुरु शंकराचार्य जी के परमशिष्य, मातृधाम के प्रभारी रहे पं. गौरीशंकर जी तिवारी के द्वारा प्रारंभ श्रावणी के पर्व को मनाने की अनवरत क्रम बैनगंगा के पावन तट लखनवाडा घाट में सतत जारी है। नित्य श्रावण शुक्ल पूर्णिमा में अनेक ब्राह्मणों के साथ यह है श्रावणी पर्व बड़े श्रद्धा और विश्वास आज भी मनाया जाते रहा है पंडित गौरीशंकर तिवारी ने श्रावणी पर्व महत्त्व द्विजों को बताया और यज्ञोपवीत निर्माण करने का विधान ब्राह्मणों और उसके अंदर उपस्थित सभी देवताओं का और यज्ञोपवीत का महत्त्व को भी बताया। आज हम श्रावण शुक्ल पूर्णिमा में यह पर्व उनके बताए रास्ते में वैदिक विधि विधान से ब्राह्मणों और विद्वानों के साथ मना कर उनका पावन स्मरण करते हैं। उक्त जानकारी देते हुए धर्मवीर अजित तिवारी ने बताया कि श्रावण शुक्ल पूर्णिमा उपाकर्म का प्रसिद्ध काल माना गया है। उपाकर्म ग्रहण या संक्रांति के दिन नहीं होता। श्रावणी विशेषकर ब्राह्मणों अथवा पंडितों का पर्व है। वेदपरायण के शुभारंभ को उपाकर्म कहते हैं। जिस दिन यज्ञोपवीत के पूजन का भी विधान है। ऋषिपूजन व पुराना यज्ञोपवीत को उतारकर नया यज्ञोपवीत धारण करना इस दिन की श्रेष्ठता है । प्राचीन समय से यह कर्म गुरु अपने शिष्यों के साथ किया करते थे वह उत्सव द्विजों के वेदाध्यन का और आश्रमों के उस पवित्र जीवन का स्मारक है7 अत: इसकी रक्षा ही नहीं किंतु इसका यथार्थ रूप में मानना हमारा परम धर्म होना चाहिये7 सर्वप्रथम श्रावण पूर्णिमा को घर में स्नान करके संध्यावंदन करके नित्यकर्म आदि करके श्रावणी कर्म के इच्छुक ब्राह्मणों के साथ गंगा या किसी अन्य तीर्थ में जायें7 पंचगव्य प्राशन, पवित्री धारण करके तीर्थ प्रार्थना कर हिमाद्रि संकल्प कर तीर्थ आज्ञा एवं प्रार्थना के साथ मृत्तिका,गोमय, धान्य, द्रव्य, भस्म आदि दस उपचारों से स्नान के पश्चात् अपामार्ग,दूर्वा से मार्जन करें एवं तर्पण इत्यादि करके शुद्ध होकर गौरी गणेश,नवग्रह सहित सप्तर्षियों का पूजन करें। सप्त ऋषि पूजन करके यज्ञोपवीत पूजन, सूत्रत्रिगुणीकरण यज्ञोपवीत स्थित देवताओं का आह्वान करना और पुराना यज्ञोपवीत बदल कर नया यज्ञोपवीत धारण करते हुए ऋषि वंशावली का ध्यान करना यह श्रावणी का मुख्य कर्म है। सभी ब्राह्मणों से आग्रह किया है कि वह अपने मुख्य पर्व श्रावणी मनाने दिनांक 30 अगस्त 2023 को प्रात: 10 बजे बैनगंगा तट में लखनवाड़ा में उपस्थित हो और अधिक से अधिक ब्राह्मणों को इस पर्व की महत्ता बताते हुए श्रावणी कर्म करने को प्रेरित करें। श्रावणी के महापर्व पर ब्राह्मणों से श्रावणी महापर्व मनाने आह्वान किया गया है।

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