धर्मसिवनी

अपने पूज्य की सेवा की जाती है, दान श्रेष्ठ को दिया जाता है – निर्विकल्प स्वरूप जी

सिवनी यशो:- अपने से पूज्य को दया और दान नहीं दिया जाता, माता-पिता और गुरु को दान नही, इन की सेवा की जाती है, दान ब्राम्हण को दिया जाता है, क्योंकि वह श्रेष्ठ हैं
ब्रह्मचारी निर्विकल्प स्वरूप जी महाराज ने ये बाते आज जैतपुर में चल रही भागवत कथा के विश्राम दिवस में श्रद्धालुओ को बताते हए कहा कि सदाचारी ब्राह्मणों को दान करना चाहिए, दुराचारी को दान करोगे तो धन भी नष्ट और पुण्य भी नहीं मिलेगा। इसी प्रकार कन्या एक रत्न है, वह भी सबसे श्रेष्ठ रत्न है, इसीलिए कन्या दान से बढ़कर ओर कोई दान नहीं माना गया है।
भगवान श्री कृष्ण पर झूँठा कलंक क्यों लगा था इस बात को स्पष्ट करते हुए ब्रह्मचारी जी ने कहा बताया कि भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का जो चंद्रमा है उसका दर्शन कर लिया था। इसीलिए भगवान श्री कृष्ण को चोरी का कलंक लगा था।
आदि शंकराचार्य जी ने मठामनाय महानुशासन मे लिखा है, झगड़े का मूल है ये संपत्ति, इसीलिए बहुत सावधानी रखना चाहिए, संपत्ति कमाइये, बहुत इक_ी कीजिये मगर वो कहीं आपकी शांति भंग न कर दे उसका भी ध्यान रखना चाहिए। आदमी संपत्ति क्यों कामाता है, सुख शांति के लिए। कहीं संपत्ति आपका सुख, चैन न छीन ले। इसीलिए बहुत सावधान रहना चाहिए।
एक प्रश्न के उत्तर में ब्रह्मचारी जी कहा कि आज मानव कामचार, कामवात, कामभक्ष्य में लगा है अर्थात वह मनमाना आचरण कर रहा है, कुछ भी अनर्गल बाते बोल रहा है, अभक्ष्य भोजन कर रहा है जबकि उसे शास्त्रचार याने शास्त्रानुसार आचरण, शास्त्रवात याने शास्त्रों के अनुसार संयमित और अच्छा बोलना चाहिए और शास्त्र भक्ष्य याने शास्त्रों के अनुसार जो खाने योग्य है उसी वस्तु को भोजन में शामिल करना चाहिए आज मानव मनमानी कर रहा है जबकि उसे सनातनी हिन्दू होने के नाते शास्त्रों के बताए रास्ते पर चलना चाहिए। ब्रह्मचारी जी ने वर्तमान परिवेश पर चुटकी लेते हुए कहा कि आजकल अवसरवादी भी बहुत हो गये है, पार्टी में रहते हुए अपने मुखिया के गुण गाते रहते है और मन की नहीं होती तो पार्टी बदल लेते है और जिसके कभी गुण गाते नहीं थकते थे उसकी आलोचना करना प्रमुख कार्य हो जाता है।
पूज्य ब्रह्मचारी जी महाराज ने सप्त दिवसीय कथा के निर्विघ्न संपन्न होने पर सबसे पहले अपने पूज्य गुरुदेव भगवान ब्रह्मलीन जगद्गुरु शंकराचार्य जी को इसका पूरा श्रेय दिया, साथ ही उपस्थित श्रोता गण , आयोजक परिवार एवं प्रत्यक्ष अप्रत्यक्ष रूप से सहायोग करने वाले भगवत प्रेमीयों को शुभाशीष दिया साथ ही जिले प्रिंट और इलेक्टानिक मीडिया विशेष रूप से उन अखबारों के प्रतिनिधियों को शुभाशीष प्रदान करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया जिन्होंने प्रतिदिन की कथा को अपने अखबारों में स्थान दे प्रकाशित किया।

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