मध्यप्रदेशसिवनी

नगरपालिका सिवनी में भ्रष्टाचार का खुला खेल!

सदर कॉम्पलेक्स से महामाया टंकी तक—सबूत मिटाने, अवैध को वैध करने की साज़िश?

16 फरवरी का विशेष सम्मेलन बना सत्ता–सिंडीकेट की अग्निपरीक्षा

Seoni 12–13 February 2026

सिवनी यशो:-‌ सिवनी नगरपालिका इन दिनों भ्रष्टाचार के आरोपों के भंवर में फंसी हुई है। सदर कॉम्पलेक्स की अवैध दुकानों को वैध करने की तैयारी से लेकर महामाया वार्ड की चर्चित पानी टंकी गिराने के प्रस्ताव तक—हर कदम पर लेन-देन, नियमों की अवहेलना और सबूत मिटाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। 16 फरवरी को प्रस्तावित विशेष सम्मेलन अब औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि सत्ता की नैतिकता और प्रशासनिक जवाबदेही की कसौटी बन गया है।

 सदर कॉम्पलेक्स: 2007 की गड़बड़ी, 2026 में ‘क्लीन चिट’?

सदर कॉम्पलेक्स की 49 दुकानें वर्ष 2007 में नियम-कानून ताक पर रखकर आवंटित की गईं। इसके बाद न एग्रीमेंट रिन्यू हुआ, न किराया जमा—मामला सालों तक विवादों में उलझा रहा।

बीते वर्ष तक मुख्य नगरपालिका अधिकारी इन व्यापारियों पर कानूनी कार्रवाई की बात कर रहे थे, लेकिन अब अचानक पूरे प्रकरण को रफा-दफा करने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं।

सबसे बड़ा सवाल—

 जो दुकानें कल तक अवैध कब्जा थीं, वे आज वैध कैसे?

 क्या सत्ता बदली तो नियम भी बदल गए?

राजनीतिक गलियारों में लंबे लेन-देन की चर्चाएं आम हैं। कांग्रेस परिषद के समय जिन मुद्दों पर दबाव बनाया गया, भाजपा परिषद आते ही वही मुद्दे मेहरबानी में बदलते दिख रहे हैं।

 भाजपा पार्षदों का दोहरा चरित्र?

कुछ माह पहले भाजपा पार्षदों ने खुद शिकायत कर कहा था कि नगरपालिका आर्थिक रूप से कंगाल है, विकास कार्य ठप हैं, जबकि संपत्तियाँ भरपूर हैं। आरोप था कि भ्रष्टाचार की दीमक ने आय के सभी स्रोत चाट लिए।

उसी शिकायत में सदर कॉम्पलेक्स की 49 दुकानों को बड़ा घोटाला बताया गया था।

अब वही पार्षद लीज नामांतरण के प्रस्ताव पास कराने को तैयार—तो सवाल लाज़िमी है:

नैतिकता कहाँ गई?

 प्रस्ताव क्रमांक 46: ‘लीज’ या ‘लेन-देन’?

पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष शफीक खान ने प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया कि 16 फरवरी 2026 की बैठक में प्रस्ताव क्रमांक 46 के तहत करीब 40 लीज नामांतरण प्रकरण लाए जा रहे हैं।

आरोप सीधा है—उद्देश्य अवैध वसूली।

सूत्र बताते हैं कि लेन-देन की शर्तें पहले ही तय हो चुकी हैं।

हाईकोर्ट में मामला, फिर भी आनन-फानन एजेंडा

रानी दुर्गावती वार्ड से जुड़े कई लीज नामांतरण मामले उच्च न्यायालय में लंबित हैं। इसके बावजूद आधा सैकड़ा से अधिक प्रस्ताव विशेष सम्मेलन में ठूंस दिए गए।

आरोप है कि पार्षदों को प्रलोभन देकर एजेंडा पास कराने की कोशिश हो रही है।

महामाया वार्ड की पानी टंकी: जनहित या सबूत मिटाने की कवायद?

कांग्रेस का आरोप है कि 2008 में बनी महामाया वार्ड की पानी टंकी सिवनी के सबसे बड़े भ्रष्टाचार का प्रतीक रही है—जिस पर आर्थिक अपराध शाखा ने कार्रवाई की थी।

अब उसी टंकी को जर्जर बताकर गिराने का प्रस्ताव प्रस्ताव क्रमांक 31 के रूप में लाया गया है।

कांग्रेस का सीधा आरोप—

यह जनहित नहीं, भ्रष्टाचार के सबूत मिटाने की साज़िश है।

“नौ माह में नगर विकास शून्य”

शफीक खान का आरोप है कि कार्यकारी अध्यक्ष के नौ माह के कार्यकाल में नगर विकास पूरी तरह ठप है।

जनता जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, भवन अनुमति, पेंशन, कर, विवाह पंजीयन जैसे कामों के लिए दर-दर भटक रही है, लेकिन सुनवाई शून्य।

 घटिया सड़क, नाम महान—राजनीति भारी

नगर में घटिया सड़क निर्माण और भ्रष्टाचार के आरोपों पर चुप्पी साधी गई है। विडंबना यह कि उसी सड़क का नाम अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर रखने का प्रस्ताव लाया गया है।

शफीक खान का तीखा तंज—

“अगर ज़रा भी शर्म बची है, तो अटल जी के नाम से जुड़ी सड़क का काम गुणवत्तापूर्ण कराइए और दोषी ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई कीजिए।”

निष्कर्ष: सवाल जनता का, जवाब सत्ता दे

सदर कॉम्पलेक्स की दुकानों से लेकर महामाया टंकी तक—सिवनी नगरपालिका सवालों के कटघरे में है।

जनता जानना चाहती है—

क्या कानून सबके लिए बराबर है?

या सत्ता बदलते ही अवैध भी वैध हो जाते हैं?

16 फरवरी का सम्मेलन सिर्फ बैठक नहीं—सिवनी के भविष्य का फैसला है।

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